अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान से सीजफायर खत्म होने और हमले करने के ऐलान के बाद मिडिल ईस्ट में हालात नाजुक मोड़ पर पहुंच चुके हैं. गुरुवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर भी बमबारी की है.
उसी चाबहार पोर्ट पर जिसे भारत की मदद से बनाया गया है. चाबहार पोर्ट भारत का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसके जरिए पाकिस्तान को बायपास करते हुए ये रास्ता अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया को रास्ता देता है.
यह पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए भारत को माल भेजने का एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है, जिससे ढुलाई (शिपिंग) की लागत में लगभग 60% और समय में 50% की कमी आती है.
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते से चाबहार पोर्ट पर फिर से काम पटरी पर लौटने की उम्मीद थी, लेकिन ताजा हमले में चाबहार को निशाना बनाए जाने से इस महत्वाकांक्षी योजना में देरी होगी.
आपको बता दें कि अमेरिका पहले भी इस चाबहार पोर्ट पर आपत्ति जता चुका है. लेकिन अरब सागर में चीन और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का जवाब माने जाने वाला चाबहार बंदरगाह भारत के लिए सामरिक महत्व रखता है. इसके अलावा व्यापार की दृष्टि से भी ईरान का ये बंदरगाह भारत के लिए आर्थिक मायने रखता है.
अमेरिका ने चाबहार पोर्ट पर किया हमला
अमेरिका ने पहली बार भारत के मदद से ईरान में तैयार किए गए चाबहार पोर्ट पर एयरस्ट्राइक की है. (https://www.instagram.com/reel/DajzefZRO4l/?igsh=cG5tcnAyNnplbXgw) इस बंदरगाह का एक बड़ा हिस्सा भारत की मदद से बनाया गया है. 28 फरवरी से शुरु हुए युद्ध में ये पहला मौका था, जब अमेरिकी सेना ने चाबहार पोर्ट पर बम बरसाया है. हालांकि फिलहाल भारत चाबहार में सीधे तौर पर सक्रिय नहीं है.
दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार पर ताजा हवाई हमले किए. हमलों के बाद चाबहार के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और शहर में कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. हमलों में बंदरगाह, एक समुद्री यातायात नियंत्रण टावर और पास की सैन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि उन्होंने लगातार दूसरे दिन ईरान के 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों, पुलों, सड़कों और परियोजनाओं को नष्ट किया है.
ईरान के लिए अहम चाबहार, भारत के हित जुड़े हुए
चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर है. यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के पश्चिम में सिर्फ 170 किलोमीटर दूर है. ऐसे में पाकिस्तान को साइडलाइन करते हुए ये रास्ता मध्य एशिया का अहम मार्ग है. यह पोर्ट भारत को कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे ऊर्जा-समृद्ध मध्य एशियाई देशों के साथ निर्बाध व्यापार करने का मार्ग प्रदान करता है.
चाबहार भारत की विदेश नीति में करीब दो दशक से एक खास जगह बनाए हुए है. अदन की खाड़ी के उत्तर में स्थित चाबहार पोर्ट, पाकिस्तान से जाने वाले मार्ग से छोटा और जियोपॉलिटिकल-स्वतंत्र रूट है. इस बंदरगाह से भारत, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनसीटीसी) को जोड़कर अपना व्यापार बढ़ा सकता है.
दरअसल, दुश्मनी के कारण भारत ने पाकिस्तान के रास्ते अपना पूरा व्यापार बंद कर रखा है. ऐसे में पाकिस्तान पर निर्भर हुए बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा रास्ता तलाशने के साथ-साथ इस पोर्ट को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) में भी एक अहम कड़ी के तौर पर देखा गया है.
लैंड-लॉक्ड अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के साथ संपर्क और व्यापार करने के लिए ईरान का चाबहार पोर्ट बेहद मुफीद है.
चाबहार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता लगातार दिखी है. साल 2024 में भारत ने चाबहार के शहीद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए ईरान के साथ 10 साल का समझौता किया था.
दरअसल चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना के जवाब में भारत, ईरान और रुस एक नॉर्थ-साउथ गलियारे का निर्माण कर रहे हैं. ‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ (आईएनएसटीसी) के जरिए भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान और रुस मिलकर एशिया-यूरोप के बीच माल ढुलाई के लिए 7200 किलोमीटर लंबी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. इस परियोजना से भारत और अफगानिस्तान के बीच माल की आवाजाही आसान हो जाएगी. यूरोप तक भारत के सामान पहुंचने में भी 15 दिन कम लगेंगे. लेकिन अमेरिका को भारत की रुस और ईरान से नजदीकियां एक आंख नहीं सुहा रही है.

