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समझौता गया तेल लेने, अमेरिकी एयरस्ट्राइक से ईरान में हड़कंप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेना, ईरान पर टूट पड़ी. अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरी बार बड़ा हमला किया है. ईरान में अमेरिकी सेना ने तकरीबन 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है.

ट्रंप के ऐलान के बाद अमेरिकी सेना ने आक्रामक हमले शुरू किए. बुधवार रात में ही चाबहार पोर्ट से लेकर मूसा आइलैंड तक, कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया है.

राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन हमलों का एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें दिखाया गया है कि एयरस्ट्राइक से ईरानी सेना के ठिकानों को कैसे ध्वस्त किया गया है. (https://www.instagram.com/reel/Daj4lq6R5Os/?igsh=ZmU1ZWMzZWJiNHhh)

अमेरिकी हमलों का बदला ईरान लगातार खाड़ी देशों को निशाना बनाकर दे रहा है. खास बात ये है कि सीजफायर का टूटना और हमले तेज होना ऐसे वक्त में शुरु हुआ है, जब गुरुवार को ही सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है. लाखों की भीड़ सड़कों पर उतरी हुई है. ऐसे में मिडिल ईस्ट में सैन्य संघर्ष खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है.

एक के बाद एक हुई एयरस्ट्राइक से दहला तेहरान

अंकारा में ट्रंप की ईरान पर कड़े हमले की धमकी के बाद यूएस सेंट्रल कमांड ने हमले शुरु कर दिया. सेंटकॉम (सेंट्रल कमांड) ने एक वीडियो पोस्ट करके सबूत दिया है कि उनकी सेना ने आईआरजीसी से जुड़े सैन्य ठिकानों को नेस्तानाबूत कर दिया है.

सेंटकॉम ने ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो जारी करते हुए लिखा, “8 जुलाई को अमेरिकी सेना ने ईरान के विरुद्ध मिलिट्री ऑपरेशन किया. इस एक्शन का लक्ष्य ईरान की उस सैन्य ताकत को कमजोर करना था, जिसके माध्यम से वह होर्मुज की खाड़ी में गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर हमला कर सकता है.”

सेंटकॉम ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के नेवी सैन्ड अड्डों को भारी नुकसान पहुंचाया है. सेंटकॉम ने लिखा, “ईरान के करीब 90 मिलिट्री अड्डों को टारगेट किया गया. इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, कोस्टल सर्विलांस से जुड़े उपकरण, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज सेंटर, नेवी क्षमताओं से जुड़े अड्डों और ईरान के समुद्री तट पर मौजूद सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं.”

खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक करने से पहले हमले तेज

ईरान के अलग-अलग इलाकों में अमेरिका ने ये हमले किए है. अबू मूसा आइलैंड, बंदर अब्बास, सिरिक, बुशहर, कोनारक जैसे ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों पर अमेरिका धमाके किए है. चाबहार में भी हमले हुए हैं जिसके बाद यहां बिजली सप्लाई कट गई है. अमेरिका इन हमलों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुए जहाजों पर अटैक का बदला बता रहा है. 

आज ही (09 जुलाई) को मशहद शहर में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को सुपुर्द-ए खाक किया जाना है. लेकिन उससे पहले अमेरिका ने एयरस्ट्राइक करके ईरान को चुनौती दे डाली है.

17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग साइन हुआ था. ये माना जा रहा था कि अब जंग खत्म हो गई. उस डील पर साइन होने के बाद दोनों देशों को अलग-अलग मुद्दों पर सहमति के लिए वार्ता करनी थी. लेकिन ये वार्ता विफल रही.

नाटो शिखर सम्मेलन के लिए अंकारा पहुंचे ट्रंप ने कह दिया कि ईरान ने धोखा किया, जिसके बाद सीजफायर टूट चुका है. ट्रंप ने ईरान पर उनकी हत्या की साजिश का भी आरोप लगाया है.

दरअसल तेहरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के जनाजे में ईरान के कट्टरपंथियों ने ट्रंप की हत्या के नारे लगाए थे. इस दौरान डेथ टू अमेरिका का स्लोगन वाले पोस्टर चस्पा किए गए.  वहीं एक वीडियो ऐसा भी आया था, जिसमें ईरानी लोग ट्रंप के पोस्टर पर पत्थर फेंक रहे थे, ठीक वैसे जैसे मक्का-मदीना में शैतान पर पत्थर फेंक कर रस्म निभाई जाती है. इसके अलावा ईरान के विशेषज्ञ परिषद ने एक फतवा जारी कर कहा था कि ट्रंप की हत्या करना सभी ईरानियों के लिए एक धार्मिक कर्तव्य है.

इसी बात से नाराज ट्रंप ने कहा, “ईरान के लोग किसी को नहीं बख्शते हैं. मुझे भी निशाने पर ले रखा है. वे मुझे भी नहीं छोड़ना चाहते हैं. वे लोग काफी गंदे हैं. मैंने उन लोगों से कह दिया है कि आप अगर हमला करोगे, तो हम छोड़ेंगे नहीं. ईरान के लोग किसी की बात नहीं मानते हैं.”

अमेरिका ने मशहद जाने वाले दो ब्रिज को तबाह किया

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि अमेरिका ने अपने ताजा हमलों में ईरान के पूर्वी हिस्से में मशहद जाने वाले दो अहम पुलों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया. आईआरजीसी का आरोप है कि यह हमला दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम विदाई समारोह को प्रभावित करने की कोशिश है.

आईआरजीसी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि “अमेरिका की यह आक्रामक कार्रवाई बिना जवाब के नहीं छोड़ी जाएगी.”

आईआरजीसी ने दावा किया कि जवाबी कार्रवाई के पहले चरण में उसकी नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर संयुक्त मिसाइल और ड्रोन हमला किया.”

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