ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच इराक में अमेरिकी वायुसेना का बड़ा झटका लगा है. अमेरिका का केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर विमान पश्चिमी इराक में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. विमान में 6 क्रू मेंबर्स में से 04 की मौत हो गई. अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने वायुसेना के विमान के हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं. ये पता किया जा रहा है कि क्या किसी मिसाइल के कारण विमान ध्वस्त हुआ या तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ. मौके पर राहत बचाव कार्य जारी है. विमान में सवार दो क्रू सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
28 फरवरी से अब तक चौथा अमेरिकी विमान दुर्घटनाग्रस्त
अमेरिका के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान एक और अमेरिकी विमान क्रैश हुआ है. केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर विमान के जरिए लड़ाकू विमानों में ईधन भरा जाता है, ताकि वे लंबे समय तक ऑपरेशन जारी रख सकें. रिफ्यूलिंग टैंकर युद्ध क्षेत्र के पीछे सुरक्षित इलाकों में काम करते हैं, ताकि उन्हें दुश्मन की बमबारी से बचाया जा सके. लेकिन ये हादसा है या इसे जानबूझकर टारगेट किया गया, इसकी जांच की जा रही है.
यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, यह दुर्घटना फ्रेंडली एयरस्पेस में दो विमानों से जुड़े एक अज्ञात घटना के बाद हुई. घटना में शामिल दूसरा विमान सुरक्षित लैंड कर गया.
अमेरिका अधिकारियों के बयान पर गौर किया जाए तो दो विमान आपस में टकरा गए, जिसमें एक क्रैश हो गया और दूसरा बच कर सुरक्षित उतर गया.
ये हादसा ऐसे वक्त में हुआ है, जब हाल ही में कुवैत में तीन अमेरिकी एफ 15 लड़ाकू विमानों के क्रैश का वीडियो सामने आया था. कुवैत ने गलती से अमेरिकी विमानों को मार गिराया था.
ईरान समर्थित ग्रुप इस्लामिक रेजिस्टेंस ने ली अमेरिकी विमान गिराने की जिम्मेदारी
आशंका जताई जा रही है इस घटना को ईरान समर्थिक ग्रुप ने अंजाम दिया है. इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों के एक समूह इस्लामिक रेजिस्टेंस ने अमेरिकी विमान को गिराने की जिम्मेदारी ली है, समूह ने एक बयान में कहा कि उसने अपने देश की संप्रभुता और हवाई क्षेत्र की रक्षा में केसी-135 विमान को मार गिराया है.
इस्लामिक रेजिस्टेंस वही ग्रुप है, जो इराक से ईरान की ओर से अमेरिका के सैन्य बेस और उनके विमानों पर हमला कर रहा है. ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक बयान में हिजबुल्लाह के साथ-साथ इस गुट की तारीफ की थी. मोजतबा ने कहा, “हम रेजिस्टेंस फ्रंट के देशों को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते हैं. कुर्बानी देने वाला हिजबुल्लाह तमाम मुश्किलों के बावजूद ईरान की मदद के लिए आगे आया है. बहादुर इराकी रेजिस्टेंस ने भी पक्के इरादे से उसी रास्ते पर चलना जारी रखा है.”

