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अमेरिका-इजरायल और ईरान-हिजबुल्लाह एक सिक्के के दो पहलू: अराघची

अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने डील के बारे में जानकारी दी है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अलग-अलग देशों के राजदूतों और राजनयिकों को अमेरिका के साथ हो रही संभावित डील के बारे में बताया है.

वहीं लेबनान के मुद्दे पर ईरान सख्त रुख अपनाए हुए है. अराघची ने कहा है कि हमारे नजरिए से अमेरिका और इजरायल एक सिक्के के दो पहलू हैं, ठीक ऐसे ही ईरान और हिजबुल्लाह हैं.

लेबनान में युद्ध रुके बिना समझौता अधूरा: अराघची

विदेशी राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि “ईरान, लेबनान के संगठन हिजबुल्लाह के साथ-साथ इजरायल को भी अमेरिका के साथ हुए समझौते का एक पक्ष मानता है. मैं एक जरूरी बात पर जोर देना चाहता हूं. हमारे नजरिए से समझौते का एक पक्ष अमेरिका और इजरायल है और दूसरा पक्ष ईरान और हिजबुल्लाह है. लेबनान में लड़ाई रोकना, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने का एक जरूरी हिस्सा है. इस युद्ध के दौरान कब्जे में लिए गए इलाकों से इजरायली सेना के हटे बिना, युद्ध को पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता. लेबनान पर इजराइल का कोई भी हमला समझौते का उल्लंघन माना जाएगा.”

19 फरवरी को जिनेवा में होने वाली बैठक से पहले ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर से साफ-साफ कहा है कि लेबनान पर किसी भी तरह का इजरायली हमला या वहां के किसी हिस्से पर कब्जा करना अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का उल्लंघन माना जाएगा.

समझौते के किसी भी उल्लंघन का जिम्मेदार अमेरिका होगा: अराघची

राजदूतों और राजनयिकों के साथ बैठक में ईरानी विदेश मंत्री ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर बात की है. इस बातचीत की जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, समझौते के किसी भी उल्लंघन के लिए अमेरिका जिम्मेदार होगा. अमेरिका पर यह जिम्मेदारी है कि वह मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह निभाए.

इस्माइल बघाई ने कहा, कि “अमेरिका केवल अपने कदमों के लिए ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में मौजूद अपने सहयोगियों और अन्य पक्षों द्वारा समझौते के उल्लंघन की स्थिति में भी जिम्मेदार माना जाएगा. अमेरिकी पक्ष पर यह दायित्व है कि वह समझौते का सम्मान सुनिश्चित करे.”

अब्बास अराघची ने बताया कि “एमओयू साइन होने के बाद युद्ध स्थायी तौर से समाप्त हो जाएगा. लेबनान में भी जंग खत्म हो जाएगी.”

02 चरणों में होगा समझौता लेकिन हम अपराधों को नहीं भूलेंगे: अराघची

अब्बास अराघची ने बताया कि 02 चरणों में होगा समझौता. पहला चरण—एमओयू की घोषणा. युद्ध खत्म, होर्मुज शामिल, ईरान के खिलाफ नेवल ब्लॉकेड समाप्त. इसके बाद एमओयू होगा.

दूसरा चरण—60 दिन का होगा. न्यूक्लियर कार्यक्रम और ईरान पर प्रतिबंध खत्म करने पर चर्चा होगी.

19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे. ईरान के अनुसार, इस समझौता ज्ञापन का मतलब लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को रोकना है.

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि “मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग तक पहुंचने का यह मतलब नहीं है कि अतीत की घटनाओं और अपराधों को माफ कर दिया गया है या उन्हें भुला दिया गया है. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा.”

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