जिस लेबनान के नाम पर ईरान ने अमेरिका से चल रही वार्ता टाल दी, उसी लेबनान के राष्ट्रपति ने तेहरान पर लगाए हैं गंभीर आरोप. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने बड़ा बयान देते हुए कहा है ईरान सिर्फ उनके देश का फायदा उठा रहा है और लेबनान का नाम अमेरिका-इजरायल के साथ सौदेबाजी के लिए कर रहा.
राष्ट्रपति आउन ने इजरायल के साथ सीधी बातचीत का समर्थन करते हुए कहा है कि लेबनान के लोग इस युद्ध से तंग आ चुके हैं और हर दिन खौफ के साए में जी रहे हैं. ये युद्ध रुक जाना चाहिए.
राष्ट्रपति जोसेफ आउन का ताल्लुक सेना से है और वो पहले पूर्व सेनाध्यक्ष रह चुके हैं. इसलिए कहते हैं कि मैं जानता हूं कि युद्ध किसी भी देश के लिए कितना नुकसानदेह हो सकता है. आउन का कहना है कि वो हिजबुल्लाह से बात करके समझाने की कोशिश करेंगे.
इजरायल के साथ सीधी बातचीत के लिए तैयार लेबनान, हिजबुल्लाह का विरोध
आउन ने कहा कि उनकी सरकार इजरायल के साथ सीधे बातचीत और युद्धविराम समझौते के लिए तैयार है. आउन ने कहा, “मेरा मानना है कि लेबनान और इजरायल के पास दशकों पुरानी दुश्मनी खत्म करने का बड़ा मौका है. दोनों देशों के लोग 1948 से संघर्ष झेल रहे हैं और अब उन्हें युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति का रास्ता चुनना चाहिए.”
राष्ट्रपति आउन ने कहा, “मैं खुद युद्ध की पीड़ा झेल चुका हूं और आज भी शरीर में युद्ध के दौरान लगे छर्रे मौजूद हैं. इसके बावजूद मैं मानता हूं कि किसी भी समस्या का सबसे अच्छा समाधान युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति है.”
लेकिन इजरायल के साथ ईरान के लिए जंग में उतर हिजबुल्लाह के प्रमुख नाइम कासिम ने लेबनान-इजरायल वार्ता को सरेंडर बताया है. कासिम का कहना है कि “जब तक इजरायली सेना लेबनान की जमीन नहीं छोड़ती, तब तक हिजबुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ेगा.”
लेबनान आईआरजीसी का देश नहीं, हिजबुल्लाह को समझाने की कोशिश करूंगा: लेबनानी राष्ट्रपति
राष्ट्रपति ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर पर निशाना साधते हुए कहा, “लेबनान, आईआरजीसी का देश नहीं, हमारा देश है. ईरान अमेरिका के साथ अपनी बातचीत में लेबनान का इस्तेमाल कर रहा है. लेबनान के लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं. हमारे हित और ईरान के हित एक जैसे नहीं हैं.”
आउन ने कहा कि उनकी सरकार हिज्बुल्लाह के हथियारों को नियंत्रित करने और उसके प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रही है, ताकि इजरायल के साथ संघर्ष खत्म हो सके.
आउन ने कहा वो हिजबुल्लाह को समझाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी रखेंगे भले ही यह रास्ता आसान न हो.
“लेबनान के लोग लगातार युद्ध से परेशान हो चुके हैं और अब शांति चाहते हैं. लेबनान के लोग सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने के हकदार हैं. वे हर कुछ साल बाद अपने घर तबाह होते नहीं देखना चाहते.”
अमेरिका की मध्यस्थता, लेबनान में रुकी गोलीबारी
अमेरिका की मध्यस्थता में हुई वार्ता के बाद इजरायल और लेबनान ने अपने नाजुक संघर्षविराम को फिर से लागू करने तथा लेबनान के भीतर कई पायलट सुरक्षा जोन स्थापित करने पर सहमति जताई है. इन सुरक्षा क्षेत्रों में हिजबुल्लाह लड़ाकों के प्रवेश पर रोक रहेगी.
अमेरिकी विदेश विभाग (स्टेट डिपार्टमेंट) में हुई बातचीत के चौथे दौर के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि “सीजफायर की सफलता हिज्बुल्लाह की ओर से पूरी तरह से गोलीबारी बंद किए जाने और लिटानी नदी के दक्षिणी क्षेत्रों से उसके सभी लड़ाकों के हटने पर निर्भर करेगी.”
सभी देशों ने इस बात को दोहराया कि इजरायल और लेबनान के बीच संबंधों का भविष्य दोनों संप्रभु सरकारों द्वारा ही तय किया जाना चाहिए.

