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ओमान में भारतीय क्रू पर हमला, अमेरिकी डिप्लोमेट तलब

होर्मुज की खाड़ी और ओमान में लगातार तीसरे दिन अमेरिका ने उन जहाजों पर बम बरसाए हैं, जिसमें भारतीय सवार थे. अमेरिका की दादागीरी के कारण पिछले 72 घंटों में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है.

गुरुवार को ओमान के तट के पास अमेरिकी नेवी ने एमटी जलवीर नाम के एक कार्गो जहाज पर हमला हुआ है. जहाज पर 20 भारतीय नाविक मौजूद है. एमटी जलवीर पर होर्मुज स्ट्रेट के पास 3 दिन में किसी जहाज पर हुआ तीसरा हमला है.

भारतीयों की मौत के बाद भारत भड़क गया है और नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के उप-मिशन प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया है और अपना “कड़ा विरोध” दर्ज कराया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चेतावनी देते हुए कहा है कि समुद्री व्यापार को रोकना या खतरे में डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भी भारत ने कमर्शियल जहाजों पर हमले का मामला उठाया है.

अमेरिका की दादागीरी, 03 भारतीयों की मौत, 21 बचाए गए

कमर्शियल जहाज सेटबेलो पर अमेरिकी नेवी के हमले में लापता हुए 03 भारतीय क्रू की मौत की पुष्टि की गई है. जबकि 21 को बचा लिया गया है.

स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सेटेबेलो जहाज पर जिन तीन नाविकों की मौत हुई, उनकी पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश के तौर पर हुई है. वहीं मैनेजमेंट कंपनी को जहाज पर मौजूद बाकी नाविकों के साथ संपर्क साधने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

तीनों भारतीयों की मौतें तब हुईं, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने ओमान के तट पर पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर पर अटैक किया. आरोप है कि यह टैंकर ईरानी तेल पर लगी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था. इस जहाज पर उस वक्त हमला किया जब ओमान के सोहार बंदरगाह से करीब 37 किलोमीटर दूर था.

जहाज पर हमले का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अमेरिकी नेवी के हमले के बाद आग लगती दिखी, जिसके बाद क्रू मेंबर्स में अफरातफरी का माहौल बन गया. फौरन आपातकालीन मैसेज दिया गया कि जहाज में आग लग गई.

ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी ‘वैनगार्ड टेक’ और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) के अनुसार, जहाज से एक संकटकालीन संदेश  भेजा गया था जिसमें कहा गया था कि उसके इंजन रूम में मिसाइल लगी है और वहां आग लग गई है.

भारत ने अमेरिकी अधिकारी को तलब किया

इन हमलों के बाद भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक तनाव गरमा गया है. भारत सरकार ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के उप-मिशन प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया है और अपना “कड़ा विरोध” दर्ज कराया है.

विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “हम ओमान तट के पास वाणिज्यिक पोत ‘सेटेबेलो’ पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं. जहाज पर मौजूद 24 भारतीयों में से अब तक 21 को सुरक्षित निकाल लिया गया है. क्षेत्र में जहाजों पर लगातार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं और यह वहां जारी संघर्ष का सीधा परिणाम है. हम सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान के लिए जारी वार्ताओं को सफल बनाने की अपील करते हैं, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल हो सके. वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाने की घटनाएं तुरंत बंद होनी चाहिए तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवागमन और व्यापार बहाल किया जाना चाहिए.”

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि “सेटेबेलो जहाज पर हुई यह घटना बहुत दुखद है. उन्होंने कहा कि सरकार मृतकों के परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव मदद करेगी. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बचाए गए भारतीय नाविकों को जल्द भारत लाया जाए और मृतकों के शव भी अंतिम संस्कार के लिए जल्दी भेजे जाएं.”

इस हमले पर सेंटकॉम ने क्या बयान दिया

अमेरिका का कहना है कि जहाज ईरान से तेल ले जा रहा था और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था. इसी वजह से उस पर हमला किया गया.

अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उनके बलों द्वारा बार-बार दिए गए निर्देशों और चेतावनियों का पालन करने में चालक दल विफल रहा, जिसके बाद अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाकर मिसाइल दागी.

अमेरिका ने एक और जहाज पर हमला किया

अमेरिकी नौसेना ने पुष्टि की है कि उसने गिनी-बसाऊ के झंडे वाले जहाज एमटी जलवीर पर हमला किया है. सेंटकॉम ने बताया कि उसने गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले एमटी जलवीर के खिलाफ कार्रवाई की. अमेरिकी दावे के अनुसार, “जहाज ईरान से तेल लेकर ओमान की खाड़ी के रास्ते आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा था. जब चालक दल ने अमेरिकी बलों के निर्देशों का बार-बार पालन नहीं किया, तो एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाते हुए दो हेलफायर मिसाइलें दागीं.”

दरअसल ईरान पर समझौते का दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका पश्चिम एशिया के समुद्री इलाके में जहाजों पर कार्रवाई कर रहा है. अमेरिका उन जहाजों को रोकने या निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है, जिन पर ईरान से जुड़े कारोबार या ईरानी तेल ले जाने का संदेह है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी का सख्ती से पालन का निर्देश दिया है.

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