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तुलसी गबार्ड का खुलासा, Wuhan लैब की अमेरिका ने की फंडिंग

अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड  अपने पद से जाते-जाते ऐसा खुलासा किया है, जिससे बीजिंग से लेकर वॉशिंगटन तक हड़कंप मच गया है. अमेरिका की खुफिया प्रमुख गबार्ड ने नए दस्तावेज जारी करते हुए दावा किया है कि जिस कोविड महामारी से पूरी दुनिया त्रस्त थी, उस महामारी की मूल चीन की लैब वुहान को अमेरिका से फंडिंग की गई थी.

गबार्ड ने सबूत पेश करते हुए बताया है कि कोरोना वायरल की रिसर्च के लिए अमेरिका से फंडिंग की गई और जब इस वायरस ने दुनियाभर में हाहाकार मचा दिया तो कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़े तथ्यों को दबाने में भूमिका में भी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के सलाहकार थे.

गबार्ड ने अमेरिकी संसद को गुमराह करने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए साथ ही वायरस को लेकर सीआईए, एफबीआई और डीएनआई के कुछ अधिकारियों की भी संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाए.

वुहान लैब को अमेरिकी फंडिंग, संदिग्ध भूमिका में खुफिया अधिकारी: गबार्ड

तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कुछ नए दस्तावेज और ईमेल सार्वजनिक किए हैं. ये दस्तावेज कोविड-19 महामारी से जुड़े हुए हैं. खुफिया प्रमुख ने जो दस्तावेज दिखाए हैं, उनमें दावा किया गया है कि कोविड-19 महामारी की शुरुआत से पहले अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (एनआईएआईडी) के तत्कालीन प्रमुख डॉ. एंथनी फॉसी ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (चीन की लैब) में चमगादड़ों से जुड़े कोरोना वायरस पर हो रहे रिसर्च के लिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के करोड़ों डॉलर की फंडिंग दी थी.

डॉक्यूमेंट्स में आरोप लगाया गया है कि यही रिसर्च बाद में उस लैब लीक से जुड़ी हो सकती है, जिसे कुछ लोग कोविड-19 महामारी की संभावित वजह मानते हैं.

जारी दस्तावेजों में दावा किया गया है कि डॉक्टर फॉसी ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर कोविड की उत्पत्ति से जुड़े तथ्यों को दबाने की कोशिश की. उन्होंने लैब-लीक थ्योरी को कमजोर करने और वायरस की प्राकृतिक उत्पत्ति की कहानी को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई.

डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, फॉसी ने अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों की राय खुफिया एजेंसियों तक पहुंचाई और बाद में उन्हीं निष्कर्षों को वैज्ञानिक सहमति के तौर पर पेश किया गया.

जारी की गई बातचीत और ईमेल डॉक्टर फॉसी की साल 2024 में कांग्रेस के सामने दी गई गवाही से मेल नहीं खाते. उस समय उनसे पूछा गया था कि क्या उन्होंने कोविड या वायरस रिसर्च को लेकर एफबीआई, सीआईए या डीआईए या अन्य अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से बातचीत की थी. लेकिन फॉसी ने अमेरिकी संसद में झूठ बोला.

लैब लीक थ्योरी का समर्थन करने वाले अधिकारियों को धमकाया गया: गबार्ड

गबार्ड के दफ्तर के मुताबिक, “जिन खुफिया विश्लेषकों ने लैब-लीक थ्योरी का समर्थन किया, उन्हें दबाव का सामना करना पड़ा. कुछ को प्रमोशन न मिलने की चेतावनी दी गई, जबकि एक कर्मचारी को शिकायत करने के कुछ दिनों बाद नौकरी से निकाल दिया गया. शिकायत प्रक्रिया में गोपनीयता खत्म कर दी गई थी, जिससे लोगों में डर का माहौल बना. और पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई.”

तुलसी गबार्ड का कहना है कि “एक साल तक चले प्रॉसेस के बाद ये दस्तावेज सामने लाए गए हैं. कुछ अधिकारियों ने अपनी गलतियों को छिपाने, आलोचकों को चुप कराने और खुफिया जानकारी को प्रभावित करने का काम किया. अब इन मामलों को आगे जांच के लिए इंटेलिजेंस कम्युनिटी के इंस्पेक्टर जनरल के पास भेजा गया है.”

तुलसी गबार्ड ने कहा, “कोविड महामारी ने दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित किया और लाखों लोगों की जान गई. अमेरिकी जनता को अब पूरी सच्चाई, पारदर्शिता और जवाबदेही मिलनी चाहिए.”

आपको बता दें कि तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे में अपने पति की गंभीर बीमार को इस्तीफे का कारण बताया है. लेकिन बताया जा रहा है कि ईरान युद्ध में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ असहमति और ईरान के पक्ष में दिए गए कुछ खुफिया दस्तावेज गबार्ड के इस्तीफे की असली वजह है.

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