बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए सार्क पर हुई एक सेमिनार के दौरान भारत का गलत नक्शा दिखाने पर भारतीय राजनयिक ने सबके सामने ही बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त अहमद तारिक करीम को आईना दिखा दिया.
महिला भारतीय डिप्लोमेट पूजा कुमारी झा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और ये नक्शा तथ्यात्मक रूप से गलत है.
दरअसल बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त ने प्रेजेंटेशन के दौरान मैप में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताया था. लेकिन भारतीय राजनयिक ने जिस तरह से तारिक करीम को टोका और सच्चाई दुनिया के सामने रखी, सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ की जा रही है.
भारतीय राजनयिक और बांग्लादेशी पूर्व हाईकमिश्नर की बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल है.
दरअसल सार्क यानी दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन को एक बार फिर फिर खड़ा करना चाहते हैं पाकिस्तान और बांग्लादेश. लेकिन पाकिस्तान के आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण भारत के विरोध के बाद सार्क निष्क्रिय है. साल 2016 में उरी हमले के बाद से ही सार्क की कोई बैठक नहीं हुई है.
जब भारतीय राजनयिक ने दिखाया बांग्लादेश के वरिष्ठ को आईना
ढाका में एक सेमिनार का आयोजन हुआ. सेमिनार बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज यानी बीआईआईएसएस में हुआ था, जिसका विषय था ‘सार्क को फिर से मजबूत बनाने के रास्ते’. इस विषय पर बोलते हुए बांग्लादेश के वरिष्ठ एक्सपर्ट और पूर्व उच्चायुक्त तारिक करीम ने जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बता दिया.
वो एक मैप दिखा रहे थे. उस मैप को देखते ही ढाका में भारतीय उच्चायोग की सेकंड सेक्रेटरी पूजा कुमारी झा ने तुरंत आपत्ति जताते हुए कहा कि “यह नक्शा गलत है और जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है.”
इस पर करीम ने सफाई दी कि यह नक्शा केवल प्रतीकात्मक रूप से इस्तेमाल किया गया है और इसमें असली सीमाएं नहीं दिखाई गई हैं.
लेकिन पूजा झा इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुईं और उन्होंने फिर दोहराया कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे गलत तरीके से दिखाया गया है, इसलिए वे इस बात को सामने रखना चाहती थीं.
इसके बाद करीम ने पूछा कि क्या पूजा झा भारत से हैं, जिस पर पूजा झा ने खुद को भारतीय उच्चायोग की अधिकारी बताया.
फिर करीम ने पूजा झा की आपत्ति पर कहा कि उन्होंने ये बात नोट कर ली है.
खास बात ये है कि जब ये बहस हो रही थी तो बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थीं.
पूजा झा और करीम के बीच हुई इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है, जिसके बाद यूजर्स ने पूजा झा को दमदार अफसर बताया है और कहा कि पूजा झा मजबूत अफसर हैं, और उन्होंने भारत का पक्ष सशक्त तरीके से रखा.
सार्क को फिर से सक्रिय बनाने की कोशिश में ढाका
बांग्लादेश की कोशिश है कि दक्षिण एशियाई संगठन सार्क एक बार फिर से एक्टिव हो. सेमिनार में मौजूद बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ने सार्क को लेकर कई सुझाव दिए और एशियाई देशों के आपसी सहयोग पर बात की.
शमा ने कहा, “सार्क संगठन को बेहतर तरीके से काम करने की क्षमता, मजबूत वित्तीय स्थिति और असरदार तरीके से फॉलो अप करने की जरूरत है. बांग्लादेश आने वाले महीनों में सार्क देशों के साथ मिलकर भरोसा बढ़ाने के कुछ कदम उठाने पर विचार कर रहा है, जिसमें ढाका में मौजूद सार्क देशों के राजदूतों से बातचीत और काठमांडू स्थित सार्क सचिवालय से संपर्क शामिल हो सकता है.”
सार्क नहीं बिम्सटेक पर है भारत का ध्यान
सार्क (दक्षेस) की साल 2014 में काठमांडू में आखिरी शिखर सम्मेलन के बाद से कोई शिखर सम्मेलन नहीं हुआ है. साल 2016 का सार्क शिखर सम्मेलन इस्लामाबाद में होना था लेकिन जम्मू कश्मीर के उरी में भारतीय सेना के शिविर पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने विरोध जताते हुए पाकिस्तान में होने वाले शिखर सम्मेलन से दूरी बना ली थी.
भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी सार्क सम्मेलन में जाने से मना कर दिया था. जिसके बाद सार्क ठंडे बस्ते में चला गया. अब भारत का फोकस बिम्सटेक पर है.
बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी के आस-पास के देशों को क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें बांग्लादेश, भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं. इसका लक्ष्य इन देशों में आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है. (BIMSTEC करेगा पाकिस्तान को अलग थलग)
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सार्क के निष्क्रियता का कारण भी कई अलग-अलग मंचों से बताया है. एस जयशंकर का कहना है कि आतंकवाद एक ऐसा मुद्दा है, जिसके साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता. लेकिन सार्क देश ही दूसरे देश पर हमला करे तो हम सार्क को आगे नहीं बढ़ा सकते.”
जयशंकर ने कहा था कि “पिछले 5-6 सालों में हमने क्षेत्रीय विकास देखा है. बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका के साथ भारत रिश्तों को देखेंगे, तो रेलवे लाइनों की बहाली की जा रही हैं, फिर से सड़कें बनाई जा रही हैं, बिजली ग्रिड का निर्माण हो रहा है. लेकिन अगर कोई हमारा पड़ोसी (पाकिस्तान) आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है तो उस पर रोक लगानी चाहिए.”

