उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में ऑपरेशन सिंदूर ‘मोर’ का शंखनाद किया तो इधर नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने कार्यभार संभालने के बाद जम्मू कश्मीर से सटी एलओसी की जिम्मेदारी संभालने वाली उत्तरी कमान के फॉरवर्ड लोकेशन पर सैन्य तैयारियों का जायजा लिया.
थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 07 से 09 जुलाई तक उत्तरी कमान (मुख्यालय उधमपुर) के अंतर्गत आने वाली दोनों कोर (15 और 16 कोर) की 06 फॉरवर्ड लोकेशन का दौरा किया. सेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद यह कमान का उनका पहला दौरा था.
तीन दिवसीय दौरे के दौरान, सेना प्रमुख ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) और जम्मू कश्मीर के अंदरुनी क्षेत्रों में तैनात सैन्य टुकड़ियों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, परिचालन तत्परता और युद्धक तैयारी की समीक्षा की. जनरल सेठ ने श्रीनगर स्थित चिनार कोर (15 कोर) के मुख्यालय, कश्मीर घाटी में स्थित टुकड़ियों, नगरोटा (जम्मू) स्थित व्हाइट नाइट कोर (16वीं कोर) और जम्मू क्षेत्र के अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया.
श्रीनगर में जनरल सेठ को उत्तरी कमान के परिचालन परिप्रेक्ष्य और चिनार कोर की परिचालन तत्परता के बारे में जानकारी दी गई. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की. दौरे के दौरान उन्होंने विभिन्न हितधारकों से बातचीत की और केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा, स्थिरता और समन्वय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की.
जम्मू कश्मीर दौरे पर थलसेना का बयान आया सामने
भारतीय सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि मुख्यालय चिनार कोर में जनरल सेठ ने परिचालन तैनाती, आतंकवाद-रोधी अभियानों, अंतर-एजेंसी समन्वय, बदलती सुरक्षा स्थिति और चल रही श्री अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. उन्होंने प्रौद्योगिकी को अपनाने, क्षमता वृद्धि और अभियानों के पूरे स्पेक्ट्रम में एकीकृत युद्धक तैयारी की पहलों की भी समीक्षा की.
चिनार कोर के अंतर्गत कुपवाड़ा, उरी और मानसबल पहुंचे जनरल सेठ
थलसेना प्रमुख ने चिनार कोर के अंतर्गत एलओसी के कुपवाड़ा, उरी और मानसबल में स्थित टुकड़ियों का भी दौरा किया, जहां उन्हें सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद-रोधी ग्रिड, निगरानी ढांचे, फील्ड नवाचारों और परिचालन तत्परता के बारे में जानकारी दी गई. उन्होंने सैनिकों से बातचीत की और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उनके व्यावसायिकता, समर्पण और अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की.
दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ ने स्वदेशी तकनीकों को प्रदर्शित करने वाले एक नवाचार प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया. उन्होंने प्रौद्योगिकी अपनाने, नवाचार और क्षमता वृद्धि पर दिए गए ध्यान की सराहना की. साथ में परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया.
जम्मू क्षेत्र के पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी में लिया सैन्य तैयारियां का जायजा
इसके बाद सेनाध्यक्ष ने मुख्यालय व्हाइट नाइट कोर और पुंछ, राजौरी तथा सुंदरबनी में नियंत्रण रेखा के साथ अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया. उन्होंने नियंत्रण रेखा के साथ मौजूदा सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद-रोधी ग्रिड, बुनियादी ढांचे के विकास और क्षेत्र में टुकड़ियों की एकीकृत युद्धक तैयारी की समीक्षा की.
मेलबर्न में पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर का किया शंखनाद
उल्लेखनीय है कि गुरूवार को प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में भारतीय मूल के नागरिकों को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) का जिक्र करते हुए कहा था कि उस दौरान हमले आतंकी अड्डों पर हुए थे, लेकिन गूंज पूरी दुनिया में हुई थी. पीएम मोदी ने साथ में ये भी जोड़ दिया था कि भारत यहीं तक रूकने वाला नहीं है. भारत ‘ग्रो मोर’ चाहता है. (https://youtu.be/BhgAWtMxRfU)
गृह मंत्रालय ने 23 पाकिस्तानी आतंकियों को डाला टेरर लिस्ट में
हाल में गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान से ऑपरेट करने वाले 23 आतंकियों को भारत की टेरर लिस्ट में शामिल किया है. इनमें वे नाम शामिल थे, जो आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा के सरगना मसूद अजहर और हाफिज सईद के करीबी हैं. जैश और लश्कर ने मिलकर पहलगाम नरसंहार (22 अप्रैल 2025) को अंजाम दिया था, जिसमें भारत के 23 मासूम नागरिकों (पर्यटकों) की जान चली गई थी.
खुफिया एजेंसियों को इस बात के इनपुट भी लगातार मिल रहे हैं, कि ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद, पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाले आतंकी संगठन जैश और लश्कर, एक बार रीग्रुप (संगठित) होने की तैयारियां कर रहे हैं. पहलगाम नरसंहार का बदला लेने के लिए, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर छेड़ा था.
ईरान जंग से मुनीर-परस्त आतंकी संगठनों के हौसले बुलंद
ईरान जंग से एक बार फिर पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीब आने की फिराक में है. ऐसे में मुनीर की सरपरस्ती में पल रहे आतंकी संगठन कहीं फिर अपना फन ना उठाए, ऐसे में जम्मू कश्मीर और एलओसी पर सैन्य तैयारियों को दुरुस्त रखना जरूरी है. यही वजह है कि थलसेना प्रमुख जनरल सेठ ने आर्मी की कमान संभालने के बाद सबसे पहला दौरा, जम्मू कश्मीर का किया है.


Leave feedback about this