रामायण में जिस तरह माता सीता ने घास (कुशा) के एक तिनके के जरिए रावण को अपने करीब नहीं फटकने दिया था ठीक वैसे ही भारत अब दुश्मन के हवाई हमलों से निपटने के लिए स्वदेशी एस-400 मिसाइल तैयार करने में जुट गया है. गुरूवार को डीआरडीओ ने लॉन्ग रेंज एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम कुशा का सफल परीक्षण किया. खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परीक्षण का वीडियो जारी कर दुनिया को इस उन्नत मिसाइल सिस्टम की जानकारी साझा की.
कुशा मिसाइल के जरिए भारत, दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइलों को भारत की धरती पर गिरने से पहले हवा में मार गिराने की तैयारी कर रहा है. रूस के एस-400 मिसाइल प्रणाली की तर्ज पर डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने कुशा मिसाइल प्रणाली को तैयार किया है.
करीब 22 हजार करोड़ का कुशा प्रोजेक्ट, 2028-29 तक हो जाएगा पूरा
जानकारी के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2023 में डीआरडीओ को 21,700 करोड़ के लागत वाले ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के लिए अपनी मंजूरी (आवश्यकता की मंजूरी यानि एओएन) दे थी. इस प्रोजेक्ट के तहत डीआरडीओ लॉन्ग रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल यानि लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल की पांच स्क्वड्रन तैयार करेगा. डीआरडीओ ने वर्ष 2028-29 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा है. उसी कड़ी में गुरूवार का टेस्ट माना जा रहा है.
150-350 किलोमीटर की रेंज में तीन मिसाइल बनाए जाएंगी
डीआरडीओ ने इस प्रोजेक्ट के तहत तीन तरह की मिसाइल को विकसित करने का प्लान तैयार किया है. ये तीन मिसाइल 150 किलोमीटर, 250 किलोमीटर और 350 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन के एरियल अटैक को विफल करने में सक्षम होंगी. ऐसे में दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल को उनकी स्पीड के अनुसार अलग-अलग दूरी पर मार गिराया जा सकता है. टोही विमान या फिर मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को ये मिसाइल सिस्टम 350 किलोमीटर की दूरी पर ही तबाह कर सकती है, लड़ाकू विमान को 250 किलोमीटर की दूरी पर नेस्तनाबूद कर देगी. इसके अलावा दुश्मन के स्टील्थ फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और प्रेशेसियन म्युनिशन को भी मार गिरा सकने की ताकत इस कुशा मिसाइल में होगी. ये दुश्मन के टारगेट को ‘लो-रडार क्रॉस सेक्शन’ पर भी मार गिरा सकती है यानि जो एरियल टारगेट बेहद ही कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं.
राजनाथ सिंह ने साझा किया कुशा के परीक्षण का वीडियो
रक्षा मंत्री ने परीक्षण का वीडियो और तस्वीर जारी करते हुए अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि “डीआरडीओ ने आज ओडिशा के तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल कुशा का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया.” रक्षा मंत्री ने आगे लिखा कि कुशा मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, यूएवी और बड़े दुश्मन विमानों सहित विभिन्न प्रकार के “हवाई खतरों को एक विस्तृत रेंज और ऊंचाई के दायरे में निष्क्रिय करने में सक्षम है.” (https://x.com/rajnathsingh/status/2080285107085258781?s=20)
लॉन्ग रेंज मिसाइल सिस्टम टेक्नोलॉजी, बेहद चुनिंदा देशों के पास
राजनाथ सिंह के मुताबिक, “लंबी दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की क्षमता केवल कुछ ही देशों के पास है. इससे ऐसे सिस्टम के लिए आयात पर निर्भरता भी समाप्त होगी और यह देश की वायु रक्षा क्षमता में एक बड़ी छलांग का प्रतीक है. मैं इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और अन्य सभी संबंधित लोगों को बधाई देता हूं.”
रूस की एस-400 ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के छुड़ाए थे छक्के
लंबी दूरी पर दुश्मन के हवाई हमलों से निपटने के लिए भारत ने वर्ष 2018 में रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदी थी. ये सिस्टम 380-400 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन के एरियल अटैक को मार गिराने का दम रखती है. 5.43 बिलियन डॉलर (करीब 39 हजार करोड़) में भारत ने रूस से ऐसी पांच स्क्वाड्रन खरीदी हैं. इनमें से तीन स्क्वाड्रन भारत को मिल चुकी हैं जिन्हें चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर तैनात किया गया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय वायुसेना ने एस-400 मिसाइल सिस्टम का पाकिस्तान के खिलाफ सटीक निशाना लगाते हुए लड़ाकू विमान और टोही विमान मार गिराए थे. एक टोही विमान को करीब 400 किलोमीटर की दूरी पर आसमान में मार गिराया था, जो सैन्य इतिहास का अब तक का सबसे लंबी दूरी पर एरियल हिट था.
यूक्रेन जंग के चलते एस-400 की दो स्क्वाड्रन की डिलीवरी अटकी
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते हालांकि, दो स्क्वाड्रन की डिलीवरी में देरी चल रही है. ये देरी डॉलर में पेमेंट न होने के चलते हो रही है लेकिन माना जा रहा है कि अगले एक साल में ये दोनों स्क्वाड्रन भी भारत पहुंच जाएंगी. ऐसे में कुशा प्रोजेक्ट से भारत को एस-400 जैसे उन्नत किस्म की एयर डिफेंस सिस्टम पर निर्भरता भी बेहद कम हो जाएगी.
प्रोजेक्ट कुशा के तहत तैयार होने वाली मोबाइल एलआर-सैम प्रणाली को वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (आईएसीसीएस) से जोड़ा जाएगा ताकि भारत की एयर-स्पेस को मजबूत सुरक्षा दी जा सके. रूस की एस-400 प्रणाली की तरह ही मोबाइल होने के चलते एलआर-सैम को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है.
भारत की एयर डिफेंस ताकत जानिए
भारत की एयर स्पेस की जिम्मेदारी फिलहाल लंबी दूरी की एस-400 सिस्टम के पास है तो मध्यम दूरी के लिए डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘बराक’ एमआर-सैम के हवाले है. ये मीडियम रेंज-सर्फेस टू एयर मिसाइल डीआरडीओ ने इजरायल की मदद से तैयार की है. एमआरसैम की रेंज करीब 70 किलोमीटर है. कम दूरी के लिए भारत के पास ‘आकाश’ मिसाइल है जिसकी रेंज 24 किलोमीटर है. इसके अलावा भारत के पास इजरायल की कम दूरी की ‘स्पाइडर’ मिसाइल है तो कंधे से मार करने वाली पुरानी ‘इग्ला’, ‘ओसा’ और ‘पिचोरा’ मिसाइल भी हैं.
माता सीता की कुशा के डर से रावण नहीं फटकता था करीब
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, माता सीता के पास ऐसी शक्ति थी कि वे दुश्मन को अपनी आंखों से भस्म कर सकती थीं. लेकिन अपने ससुर राजा दशरथ के कहने पर उन्होनें किसी को भी गुस्से से न देखने का प्रण किया था. ऐसे में जब रावण अशोक वाटिका में उनसे मिलने आता था तो वे उसकी तरफ न देखकर कुशा यानि घास के एक तिनके को उठाकर उसी की तरफ कर देती थी. जैसे ही रावण उस तिनके को छूता था तो उसे जोर का झटका लगता था. क्योंकि माता सीता की शक्तियों से वो कुशा भी एक आग के गोले में तब्दील हो गई थी जिसके कारण दुश्मन (रावण) उनके पास फटकने की ज़ुर्रत नहीं कर पाता था. ठीक वैसे ही स्वदेशी प्रोजेक्ट कुशा से दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल भारत की एयर-स्पेस में दाखिल होने से पहले हजार बार सोचेगी.

