भारत-पाकिस्तान के पारंपरिक अदावत के बीच, अटारी-वाघा बॉर्डर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. वीडियो में एक पाकिस्तानी सैनिक, भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी बीएसएफ के एक आला-अधिकारी को सैल्यूट करता नजर आ रहा है. ऐसे में कुछ इंटरनेट-कम्युनिटी में पाकिस्तानी सैनिक के सैन्य अनुशासन प्रशंसा की जा रही है तो कुछ लोगों का मानना है कि ये भारत के पाकिस्तान पर अधिकार जमाने की तैयारी है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स (बीएसएफ-तुल्य सीमा सुरक्षा बल) के बीच होने वाली बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में बदलाव किया गया था. अब बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच लगा गेट नहीं खोला जाता है. ऐसे में दोनों देशों की सीमा सुरक्षा बल, अपने-अपने क्षेत्र में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी करती हैं. जबकि पहले, गेट खुलता था, और सेरेमनी खत्म होने के बाद दोनों देशों के जवान आपस में हाथ भी मिलाते थे.
महज 14 सेकंड के इस वीडियो में देखा जा सकता है कि अटारी-वाघा बॉर्डर से थोड़ी दूर जीरो-लाइन पर बीएसएफ के दो-तीन अधिकारी फोटो सेशन के लिए पहुंचते हैं. इसी दौरान वहां, सेरेमोनियल-ड्यूटी के लिए खड़े पाकिस्तानी रेंजर्स के जवान ने बीएसएफ के कमांडेंट रैंक के अधिकारी को जोरदार सैल्यूट किया. इस दौरान, दोनों तरफ के सीमा-क्षेत्र में बीटिंग रिट्रीट परेड देखने आने वाले आम नागरिक भी खड़े हैं. (https://www.instagram.com/reel/Dbk9dnkyFVy/?igsh=MXVwOGx3Mmh5a2xoMg==)
दरअसल, इस जीरो-लाइन पर परेड देखने आने वाले आम लोगों को फोटो खींचने की इजाजत है. ऐसे में पाकिस्तानी नागरिकों की परवाह ना करते हुए भी पाक रेंजर ने भारतीय कमांडेंट को सैल्यूट ठोंक दिया. बीएसएफ के अधिकारी ने भी गर्दन हिलाकर सैल्यूट का जवाब दिया.
पंजाब के अमृतसर सेक्टर में, भारत-पाकिस्तान की आखिरी बॉर्डर पोस्ट है अटारी-वाघा. भारत की तरफ आखिरी गांव है अटारी तो पाकिस्तान की तरफ है वाघा. भारत की तरफ की सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी बीएसएफ के कंधों पर है और पाकिस्तान की तरफ पाक रेंजर्स तैनात रहते हैं.
देशभक्ति का तीर्थ-स्थल है अटारी बॉर्डर
कई दशक पहले, दोनों देशों की बॉर्डर गार्डिंग फोर्स के बीच समन्वय और सहयोग बढ़ाने के लिए यहां बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी शुरु की गई थी. ये दुनियाभर में दो दुश्मन देशों के बीच की सीमा सुरक्षा बलों की अनोखी मिलिट्री सेरेमनी है. यही वजह है कि देश-दुनिया से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग इस सेरेमनी को देखने के लिए जुटते हैं. स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर यहां लोगों का रेला लगता है. यही वजह है कि दोनों देशों ने अपनी-अपनी तरफ मेन गेट के आस-पास स्टेडियम का निर्माण कराया है ताकि सेरेमनी देखने आए लोगों को दिक्कत का सामना ना करना पड़े. भारत की तरफ बने स्टेडियम में करीब 35 हजार लोगों के बैठने की क्षमता है. विशेष अवसर पर भीड़ स्टेडियम के बाहर तक जुटती है. ऐसे में अटारी बॉर्डर को देशभक्ति का एक अहम तीर्थ-स्थल माने जाना लगा है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से बीएसएफ ने बंद किया पाक रेंजर्स से हाथ मिलाना और मिठाइयों का आदान-प्रदान
समय-समय पर इस परेड में व्यवधान भी आते रहे हैं. जब-जब भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तल्खी आई, परेड का रोक दिया जाता है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से परेड के बाद बीएसएफ ने पाक रेंजर्स से हाथ मिलाने की परंपरा बंद कर दी है. साथ में स्वतंत्रता दिवस इत्यादि पर पाक रेंजर्स को मिठाइयों और दूसरे उपहारों का आदान-प्रदान भी बंद कर दिया है.
परेड को लेकर बीएसएफ को आलोचना का शिकार भी होना पड़ा है. जब-जब कश्मीर में हालात बिगड़े या पाकिस्तान से संबंधों में दरार आई, तब तब परेड का पूरी तरह बंद करने की मांग उठने लगी. सर्जिकल स्ट्राइक (2016) और बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019) के बाद परेड को पूरी तरह बंद कर दिया गया था. लोगों की एंट्री तक बॉर्डर तक बंद कर दी गई थी. ऑपरेशन सिंदूर के बाद बीएसएफ ने पाकिस्तान से अपनी तल्ख संबंधों का इजहार, परेड के बाद बॉर्डर पर लगे गेट को ना खोलकर साफ कर दिया है.
एक-दूसरे के देश में जाने के लिए खुला है बॉर्डर
दोनों देशों के नागरिक, हालांकि यहां से पासपोर्ट, इमीग्रेशन और कस्टम क्लीयरेंस के जरिए एक-दूसरे के देश में आवाजाही के लिए जरूर इस्तेमाल करते हैं. पिछले कुछ समय में यहां से बॉर्डर पार करने वाले यात्रियों की संख्या में भी भारी गिरावट देखने को आई है. दिल्ली-लाहौर बस सेवा भी अब बंद कर दी गई है, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शुरु की गई थी (1998-2004).

