एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने साफ तौर से कह दिया है कि देश में थिएटराइजेशन से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है अपनी खामियों को सुधारना. वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, इंडियन एयर फोर्स सेना के तीनों अंगों की साझा थिएटर कमांड के खिलाफ नहीं है लेकिन ऑपरेशन सिंदूर जारी है. ऐसे में पूरे सुरक्षा तंत्र में उथल-पुथल करने की बजाए चरणबद्ध तरीके से थिएटरीकरण को किया जाए.
शनिवार शाम कानपुर में एक सैन्य कार्यक्रम के संबोधन में एयर चीफ मार्शल ने स्वदेशी फाइटर जेट के निर्माण में देरी और भारतीय वायुसेना की तेजी से गिरती फाइटर स्क्वाड्रन की तरफ साफ तौर से इशारा किया.
पीएम मोदी का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है थिएटर कमांड
वर्ष 2019 से देश की सेना के तीनों अंगों यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना की एकीकृत कमांड बनाने पर काम चल रहा है. सशस्त्र सेनाओं की ज्वाइंट थिएटर कमांड, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है. लेकिन वायुसेना की तरफ से थिएटर कमांड बनाने को लेकर आपत्ति जाहिर की गई है. यही वजह है कि रिटायरमेंट से कुछ हफ्ते पहले, एयर चीफ मार्शल सिंह ने थिएटर कमांड को लेकर अपनी आशंकाए उजागर की.
कारगिल युद्ध के जरिए एयर चीफ मार्शल ने समझाई अपनी बात
कारगिल युद्ध पर हाल में रिलीज हुई ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ सीरीज का जिक्र करते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि उस दौरान (1999 युद्ध) में भी सेना के तीनों अंगों की ज्वाइंटमैनशिप थी. एयर चीफ मार्शल के मुताबिक, “मैं अपने लोगों को भरोसा दिला सकता हूं कि एयर फ़ोर्स ‘थिएटराइजेशन’ के ख़िलाफ़ नहीं है. एयर फोर्स का ज़ोर इस बात पर रहा है कि हम इसे निष्पक्ष नजरिए से देखें. आइए देखें कि क्या समस्याएं हैं, क्या गलत है और हमें क्या सुधारने की ज़रूरत है.”
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि “हमें एक ढांचा तैयार करना होगा (थिएटर कमांड के लिए). इसलिए, बस किसी चीज़ को उठाकर इस्तेमाल न करें. आइए इसे निष्पक्ष नजरिए से देखें. आइए इसे चरण-दर-चरण तरीके से करें ताकि कम से कम रुकावट आए और सिस्टम में कोई उथल-पुथल न हो, खासकर ऐसे समय में जब हमने यह साफ कर दिया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी भी जारी है.
सेना की मौजूदा 19 कमांड को महज 3-4 में समेटना चाहती है सरकार
मौजूदा सैन्य तंत्र में थलसेना, वायुसेना और नौसेना की अलग-अलग 19 कमांड हैं. इनमें थलसेना की सात (07), वायुसेना की सात (07) और नौसेना की तीन (03) कमांड हैं. इसके अलावा दो (02) एकीकृत कमांड हैं—अंडमान निकोबार कमांड और स्ट्रेटेजिक फोर्स कमांड. सरकार की कोशिश है कि इन सभी कमान को मिलाकर कुल 03-04 कमान कर दी जाएं. ऐसा करने के पीछे, सरकार का तर्क है कि सेना के तीनों अंग मिल-जुलकर बेहतर तरीके से ऑपरेशन्स को अंजाम दे पाएंगे. लॉजिस्टिक पर होने वाले खर्च को भी बचाने की कोशिश कर रही है. साथ में सेना के तीनों अंगों का कार्यों की डुप्लीकेसी को भी खत्म करना चाहती है. क्योंकि अभी एयर डिफेंस की जिम्मेदारी भी तीनों अंगों की अलग-अलग है. हथियार और मिलिट्री प्लेटफॉर्म भी एक जैसे हैं.
वायुसेना को थिएटर कमांड से ज्यादा कम होती स्क्वाड्रन की चिंता
वायुसेना का हालांकि, तर्क है कि लड़ाकू विमानों की लगातार कम हो रही स्क्वाड्रन पर पहले जोर दिए जाने की सख्त जरूरत है. क्योंकि इस वक्त, भारतीय वायुसेना की महज 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि सेंक्शन 42 की हैं. विदेशी फाइटर जेट्स पर निर्भर रहना भी वायुसेना को अखर रहा है. स्वदेशी फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के प्रोडक्शन में अमेरिकी इंजन इत्यादि के चलते काफी अड़चनें देखने को मिल रही है. वायुसेना का तर्क है कि थिएटर कमांड बनाएंगी तो कम लड़ाकू विमानों को साझा करना होगा, जो किसी एक एयरस्पेस में ऑपरेशन के दौरान जोखिम उठाने जैसा हो सकता है.
गलतियों को ना दोहराने का जिक्र किया एयर चीफ मार्शल ने
कानपुर में अपने संबोधन में वायुसेना प्रमुख ने इंफॉर्मेशन, एआई, डाटा और डिजिटल-टूइंस पर भी चर्चा कर अपनी गलतियों को भविष्य में रिपीट ना करने की सलाह दी. हालांकि, एयर चीफ मार्शल ने ये साफ नहीं किया कि ये गलतियों कौन सी हैं.

