पहली बार चीन के किसी फाइटर जेट ने फ्रांस में बने रफाल (राफेल) लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरी है. मौका है मिस्र (इजिप्ट) में आयोजित साझा एक्सरसाइज ‘ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन’ का, जिसका वीडियो खुद चीन की पीएलए (एयर फोर्स) ने जारी किया है. चीन सीमा पर तैनात भारतीय वायुसेना के रफाल फाइटर जेट के कारण, पीएलए की जान हमेशा सांसत में रहती है.
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए)-एयर फोर्स ने मिस्र के साथ हुई एक्सरसाइज का वीडियो जारी किया है. करीब 04 मिनट के वीडियो में साफ दिखाई पड़ रहा है कि जे-10 के कॉकपिट में बैठे पायलट ने रफाल की वीडियो बनाई है. वीडियो में मिस्र का रफाल लड़ाकू विमान मैनुवर करता दिखाई पड़ रहा है.
सुखोई की कॉपी है चीन का जे-16 लड़ाकू विमान
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीन से लिए जे-10 फाइटर जेट से भारतीय वायुसेना के रफाल लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा किया था. हालांकि, पाकिस्तान ने इस दावे के समर्थन में कभी कोई सबूत पेश नहीं किया. ऐसे में पाकिस्तानी वायुसेना के दावे खोखले साबित हुए. ऐसे में चीन के जे-16 का रफाल के साथ उड़ान भरना बेहद मायने रखता है. चीन का जे-16, एक हैवीवेट फाइटर जेट है, जिसे रूस के सुखोई (सु-30) की तर्ज पर तैयार किया गया है. इस विमान के कॉकपिट में दो (02) पायलट उड़ान भरते हैं.
एक रफाल को काउंटर करने के लिए चीन के 04 एयरक्राफ्ट
ऑपरेशन सिंदूर से पहले भी गलवान घाटी की झड़प के बाद, भारतीय वायुसेना ने पूर्वी लद्दाख में रफाल को तैनात किया था. उस वक्त, चीन की वायुसेना को एक रफाल के मुकाबले चार-चार फाइटर जेट तैनात करने पड़े थे. हालांकि, बाद में चीन ने अपने तथाकथित स्टील्थ फाइटर जेट जे-10 चेंगदू को अपग्रेड करने के बाद भारत से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात किया था. हाल में चीन ने तिब्बत के दो अतिरिक्त एयरबेस पर जे-10 को तैनात किया था, जिनकी सैटेलाइट इमेज भी सोशल मीडिया पर सामने आई थी.
परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है भारतीय रफाल
हाल ही में फ्रांस ने अपने रफाल फाइटर जेट से न्यूक्लियर मिसाइल का परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था. वर्ष 2016 में जब भारत ने फ्रांस से 36 रफाल फाइटर जेट खरीदने का सौदा किया था तो उस वक्त खुलकर कभी ये दावा नहीं किया गया था. गुपचुप तरीके से भारतीय की रक्षा-सुरक्षा तंत्र से जुड़े सीनियर अधिकारी इस बात की तरफ इशारा जरुर करते थे. लेकिन फ्रांस ने परमाणु परीक्षण कर रफाल की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है. साफ है कि भारत के 36 रफाल भी इस ताकत से लैस हैं. यही वजह है कि रफाल फाइटर जेट की डील बेहद महंगी साबित हुई थी.
पूर्वी लद्दाख जैसे हाई ऑल्टिट्यूड रीजन में तैनात हो सकता है रफाल
पूर्वी लद्दाख जैसे बेहद ऊंचाई और ठंडे इलाकों में तैनाती के लिए भी फ्रांस ने भारतीय रफाल को खास तकनीक से लैस किया है. यही वजह है कि भारत आने के तुरंत बाद ही रफाल फाइटर जेट को पूर्वी लद्दाख में तैनात कर दिया गया था. रफाल के ट्रायल की भी जरूरत भी नहीं पड़ी थी. जबकि चीन के जे-20 स्टील्थ फाइटर जेट को हाल में बेहद ऊंचाई वाले एयरबेस पर पहली बार तैनात किया गया था.
जे-20 में चीन ने स्वदेशी ‘पीएल-15’ एयर टू एयर मिसाइल से लैस किया है. हालांकि, इस मिसाइल की रेंज रफाल में लगी ‘मिटियोर’ मिसाइल की तरह ही करीब 200 किलोमीटर है लेकिन रैमजेट इंजन के चलते मिटियोर मिसाइल पीएल-15 के खिलाफ बाजी मार जाती है. पीएल-15 में सोलिड रॉकेट मोटर है. इससे पीएल-15 की रेंज तो बढ़ जाती है लेकिन ‘रैमजेट’ इंजन के चलते मिटियोर मिसाइल का ‘नो-एस्केप जोन’ काफी बड़ा है.

