ऑपरेशन सिंदूर के बाद संबंधों में आई खटास के बीच, भारत ने अमेरिका से जैवलिन एटीजीएम मिसाइल खरीदने का फैसला लिया है. इस बाबत भारतीय सेना ने अमेरिका से 148 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने के ऑफर पर हस्ताक्षर किए हैं. डील की कुल कीमत 45.7 मिलियन डॉलर यानी करीब 440 करोड़ है.
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने डील की जानकारी देते हुए इसे एक ‘बड़ी खबर’ बताया है. गोर के मुताबिक, भारत लड़ाई में परखे जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम को खरीदने की योजना बना रहा है. अमेरिका राजदूत ने आगे लिखा कि जैसा कि जैसा कि अमेरिकी रक्षा सचिव (पीट हेगसेथ) ने मई 2026 के शांगरी-ला डायलॉग में बताया था, यह अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है और इससे मिलकर उत्पादन की संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं. हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है.”
फायर एंड फॉरगेट तकनीक से काम करती है जैवलिन मिसाइल
जैवलिन एक एडवांस, मीडियम रेंज, फायर एंड फॉरगेट एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है, जिसे अमेरिका की आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन कंपनी मिलकर बनाती हैं. यूएस आर्मी और अमेरिकी मरीन कोर सहित कई देशों की सेनाएं, जैवलिन का इस्तेमाल करती हैं. दुश्मन के टैंक और बंकरों को तबाह करने के लिए जैवलिन मिसाइल का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी रेंज करीब ढाई (2.5) किलोमीटर है और ऑपरेट करने में बेहद आसान है. इसे महज एक सैनिक द्वारा लॉन्च किया जा सकता है.
फोरेन मिलिट्री सेल्स (एफएमएस) के तहत भारत ने 100 जैवलिन राउंड्स के साथ, एक जैवलिन मिसाइल एफजीएम-148 मिसाइल और 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट और इससे जुड़े हुए उपकरण खरीदने का फैसला किया है.
अमेरिका की एम-777 गन और सिग-सोर राइफल भी इस्तेमाल करती है भारतीय सेना
भारतीय सेना (थलसेना) पहले से अमेरिका से खरीदी गई एम-777 लाइट होवित्जर (तोप) का इस्तेमाल करती हैं. इन तोपों को भारतीय सेना ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर (पीओके) में आतंकियों के ठिकानों और पाकिस्तानी सेना की चौकियों को तबाह करने के लिए इस्तेमाल किया था. इसके अलावा, अमेरिका की सिग-सोर राइफल भी भारतीय सैनिक इस्तेमाल करती है.
अमेरिकी रक्षा विभाग की डिफेंस सिक्योरिटी कॉपरेशन एजेंसी ने डील पर बयान जारी करते हुए कहा कि “यह प्रस्तावित बिक्री, अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगी. इससे अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक संबंध मजबूत होंगे और एक प्रमुख रक्षा साझेदार की सुरक्षा बेहतर होगी. यह साझेदार इंडो-पैसिफिक और दक्षिण एशिया क्षेत्रों में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण ताकत बना हुआ है.”
अमेरिकी रक्षा विभाग के मुताबिक,इस प्रस्तावित बिक्री से भारत की मौजूदा और भविष्य के खतरों से निपटने की क्षमता बेहतर होगी, देश की सुरक्षा मजबूत होगी और क्षेत्रीय खतरों को रोकने में मदद मिलेगी. भारत को इन उपकरणों और सेवाओं को अपनी सेना में शामिल करने में कोई कठिनाई नहीं होगी. लेकिन साथ में ये भी कहा कि “इन उपकरणों और सहायता की प्रस्तावित बिक्री से क्षेत्र में बुनियादी सैन्य संतुलन नहीं बदलेगा.”
निकट भविष्य में भारत में बन सकती हैं जैविलन मिसाइल
माना जा रहा है कि आने वाले समय में आरटीएक्स (रेथियॉन) और लॉकहीड मार्टिन, इन जैवलिन मिसाइलों का भारत में निर्माण कर सकती हैं. क्योंकि कुछ महीने पहले, इसके लिए रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) से इसके लिए करार किया था.
उल्लेखनीय है कि थल सेना, फिलहाल फ्रांस की मिलन और रूस की कोनकोर एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल इस्तेमाल करती है. लेकिन एलओसी से लेकर एलएसी तक मिलने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय सेना की इंफ्रेंटी रेजीमेंट को बड़ी संख्या में ऐसी एटीजीएम की जरूरत है. यही वजह है कि जैवलिन मिसाइल को खरीदने और साझा निर्माण की योजना तैयार की गई है. इसका इशारा, नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के बयान से दिखाई पड़ता है.
डील के बाद यूएस एंबेसी ने बयान जारी कर कहा कि “जैवलिन समझौता भारतीय सेना के लिए अमेरिकी समर्थन की गहराई को दिखाता है और हमारे रक्षा उद्योगों के लिए साथ मिलकर काम करने के नए अवसर पैदा करता है. हम भविष्य में सहयोग की बहुत बड़ी संभावना देखते हैं, जिससे दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत होंगे.”

