Acquisitions Breaking News Indo-Pacific Weapons

टाटा बनाएगी जैवलिन मिसाइल, US कंपनी रेथियॉन ने किया करार

Grok image

भारत में जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल के साझा-निर्माण के लिए अमेरिका कंपनी रेथयॉन और लॉकहीड मार्टिन ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड को चुना है. सोमवार को रेथियॉन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर टाटा कंपनी के करार का ऐलान किया.

रेथियॉन ने टाटा से करार का ऐलान ऐसे समय में किया है जब शुक्रवार को खबर आई थी कि भारतीय सेना (थलसेना) ने अमेरिका से 300 करोड़ की 100 जैवलिन मिसाइल खरीदने का फैसला किया है.

रेथियॉन के मुताबिक, भारत में को-प्रोडक्शन के लिए कई कंपनियों को परखा गया था, लेकिन टाटा को प्राइम-पार्टनर के तौर पर चुना गया है. ऐसे में अब भारत में टाटा कंपनी के साथ मिलकर जैवलिन मिसाइल की फाइनल-असेंबली और इंटीग्रेशन फैसिलिटी बनाई जाएगी.

अब तक 55 हजार जैवलिन मिसाइल और 12 हजार कमांड सेंटर का हो चुका है निर्माण

जैवलिन एक एडवांस, मीडियम रेंज, फायर एंड फॉरगेट एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है, जिसे अमेरिका की रेथियॉन आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन कंपनी मिलकर बनाती हैं. यूएस आर्मी और अमेरिकी मरीन कोर सहित कई देशों की सेनाएं, जैवलिन का इस्तेमाल करती हैं. दुश्मन के टैंक और बंकरों को तबाह करने के लिए जैवलिन मिसाइल का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी रेंज करीब ढाई (2.5) किलोमीटर है.

अमेरिका में रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन, इन मिसाइलों को अपने-अपने टक्सन (एरीजोना) और ऑरलैंडो (फ्लोरिडा) प्लांट में निर्माण करती हैं. दोनों कंपनियां मिलकर अब तक  
करीब 55 हजार जैवलिन मिसाइल और 12 हजार कमांड सेंटर बना चुकी हैं. यूएस आर्मी और अमेरिकी मरीन कोर के अलावा, कई नाटो देश इस जैवलिन मिसाइल को ऑपरेट करती हैं.

अमेरिका मिसाइल सौदे को गोर ने बताया था बड़ी खबर

ऑपरेशन सिंदूर के बाद संबंधों में आई खटास के बीच, भारत ने अमेरिका से जैवलिन एटीजीएम मिसाइल खरीदने का फैसला लिया था. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने डील की जानकारी देते हुए इसे एक ‘बड़ी खबर’ बताया था. गोर के मुताबिक, भारत लड़ाई में परखे जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम को खरीदने की योजना बना रहा है. अमेरिका राजदूत ने आगे लिखा कि जैसा कि जैसा कि अमेरिकी रक्षा सचिव (पीट हेगसेथ) ने मई 2026 के शांगरी-ला डायलॉग में बताया था, यह अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है और इससे मिलकर उत्पादन की संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं. हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है.”

फोरेन मिलिट्री सेल्स (एफएमएस) के तहत भारत ने 100 जैवलिन राउंड्स के साथ, एक जैवलिन मिसाइल एफजीएम-148 मिसाइल और 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट और इससे जुड़े हुए उपकरण खरीदने का फैसला किया है.

भारतीय सेना (थल सेना) पहले से अमेरिका से खरीदी गई एम-777 लाइट होवित्जर (तोप) का इस्तेमाल करती हैं. इन तोपों को भारतीय सेना ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर (पीओके) में आतंकियों के ठिकानों और पाकिस्तानी सेना की चौकियों को तबाह करने के लिए इस्तेमाल किया था. इसके अलावा, अमेरिका की सिग-सोर राइफल भी भारतीय सैनिक इस्तेमाल करती है.

भारतीय सेना फिलहाल करती है फ्रांस की मिलन और रूस के कोनकर्स एटीजीएम का इस्तेमाल

उल्लेखनीय है कि थल सेना, फिलहाल फ्रांस की मिलन और रूस की कोनकर्स एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल इस्तेमाल करती है. लेकिन एलओसी से लेकर एलएसी तक मिलने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय सेना की इंफ्रेंटी रेजीमेंट को बड़ी संख्या में ऐसी एटीजीएम की जरूरत है. यही वजह है कि जैवलिन मिसाइल को खरीदने और साझा निर्माण की योजना तैयार की गई है.

डील के बाद यूएस एंबेसी ने बयान जारी कर कहा था कि “जैवलिन समझौता भारतीय सेना के लिए अमेरिकी समर्थन की गहराई को दिखाता है और हमारे रक्षा उद्योगों के लिए साथ मिलकर काम करने के नए अवसर पैदा करता है. हम भविष्य में सहयोग की बहुत बड़ी संभावना देखते हैं, जिससे दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत होंगे.”

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.