परमाणु खतरों को देखते हुए सरकार ने भारतीय सेना के लिए विशेष सीबीआरएन रेकी व्हीकल्स की खरीद को मंजूरी दी है. ये खास वाहन, केमिकल बायोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (सीबीआरएन) खतरों का पता करने में कामगार हैं. इसके अलावा सरकार ने सेना के तीनों अंगों के लिए कुल 1.10 लाख करोड़ के हथियार, मिसाइल और सैन्य उपकरणों की खरीद को हरी झंडी दी है.
सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने सशस्त्र सेनाओं के विभिन्न अधिग्रहण प्रस्तावों के लिए ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (एओएन) यानी सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी दी. इस मंजूरी में भारतीय सेना (थलसेना) के लिए, सीबीआरएन वाहन के अलावा हाई मोबिलिटी वाहन (एचएमवी), सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स (एमएमएल), एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच), ट्रॉवल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम खरीदने की मंजूरी दी गई.
डीएसी की बैठक के बाद, रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि सीबीआरएन रेकी वाहन, केमिकल बायोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर एजेंटों से दूषित क्षेत्रों का पता लगाने, उनकी पहचान करने, निगरानी करने और उन्हें चिन्हित करने में सक्षम होंगे.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान परमाणु हमले तक पहुंच गई थी अदावत
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान के किराना हिल्स स्थित न्यूक्लियर ठिकाने पर हमला हुआ था. उस वक्त माना जा रहा था कि ऐसा कर भारत ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर-ब्लफ का भंडाफोड़ किया है. क्योंकि पाकिस्तान ने धमकी दी थी कि अगर भारत ने हमला किया तो परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे में किराना हिल्स पर हमला कर पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को तबाह किया गया था.
हाल में पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान (रिटायर) ने हालांकि, एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सफाई देते हुए कह दिया था कि किराना हिल्स, भारतीय वायुसेना के टारगेट पर नहीं था. लेकिन करीब में पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस पर एक ड्रोन लॉन्च किया गया था. ये ड्रोन सरगोधा एयरबेस के कमांड सेंटर के बजाए किराना हिल्स के कंट्रोल सेंटर पर जाकर गिर गया था.
ऐसे में परमाणु हमले का खतरा बना रहता है. यही वजह है कि रक्षा मंत्रालय ने थलसेना के लिए खास सीबीआरएन गाड़ियों की खरीद की मंजूरी दी है. थलसेना, पहले से डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) की सीबीआरएन व्हीकल्स को ऑपरेट कर रही है. लेकिन अब अतिरिक्त व्हीकल्स की खरीद को हरी झंडी दी गई है.
सीबीआरएन के अलावा, एएलएच हेलीकॉप्टर और स्पेशल व्हीकल्स को भी हरी झंडी
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, एचएमवी, मुश्किल इलाकों में ऑपरेशन क्षमता, लॉजिस्टिक सपोर्ट और आवाजाही की क्षमता को बढ़ाएंगे और एमएमएल, मुश्किल इलाकों में तेज़ी से और तुरंत माइन बिछाने की जरूरी ऑपरेशन क्षमता हासिल करेंगे. एएलएच (‘ध्रुव’) हेलीकॉप्टर, भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के लिए सभी तरह के इलाकों और ऑपरेशनल स्थितियों में जटिल मिशन पूरे करेंगे. ट्रॉवल टैंक और ब्रिज सिस्टम का इस्तेमाल अलग-अलग इलाकों में ऑपरेशन के दौरान फाइटिंग यूनिट्स को क्रॉसिंग की सुविधा देने के लिए किया जाएगा.
नौसेना के लिए अरुण रडार और वायुसेना के लिए मिसाइलों को भी मंजूरी
भारतीय नौसेना के लिए, अरुध्र रडार खरीदने और मरीन गैस टरबाइन (एमजीटी) के डिजाइन, विकास और बाद में उनकी खरीद के लिए एओएन को मंजूरी दी गई. अरुध्र रडार विभिन्न नौसेना एयर स्टेशनों पर मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेगा और एमजीटी (एक युद्धपोत प्रोपल्शन सिस्टम) विदेशी वेंडरों पर निर्भरता कम करेगा.
भारतीय वायु सेना के लिए, फाइटर, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर की युद्ध क्षमता बढ़ाने वाले विभिन्न (मिसाइल) प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पस जैमर खरीदने और डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड (डेफसेक) सिस्टम लगाने की भी मंजूरी दी गई. जैमर, दुश्मनों के रडार के खिलाफ प्रभावी जैमिंग करेगा और डेफसेक, मौजूदा कागज़ी पहचान पत्र (पास/परमिट) की जगह इंटर-ऑपरेबल रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन-बेस्ड स्मार्ट कार्ड सिस्टम लाएगा
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दी गई कुल एओएन में से, लगभग 98 प्रतिशत खरीद भारतीय इंडस्ट्री से की जाएगी.

