By Nalini Tewari
इस्लामिक नाटो की कोशिश में बनाया गया मक्का पैक्ट कितना फर्जी है वो हालिया संघर्षों में देखा जा चुका है. यमन के हूतियों के खिलाफ मक्का पैक्ट के मुख्य सदस्य सऊदी अरब के लिए दूसरा सदस्य पाकिस्तान ही नहीं खड़ा हुआ तो समझ लीजिए कि ये मक्का पैक्ट कितने पानी में है. बहरहाल कागज़ी मक्का पैक्ट को मिल गया है अपना नया कमांडर.
मक्का गठबंधन के पहले महासचिव का तमगा पाकिस्तान के पूर्व मिलिट्री कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद (रिटायर्ड) को पहनाया गया है. ये वही नौमान महमूद हैं, जिसे कभी असीम मुनीर की जगह पाकिस्तान का सेना प्रमुख बनाया जाना था.
नोमान को रियाद में गठबंधन के महासचिवालय का नेतृत्व संभालने की जिम्मेदारी ली है, लेकिन बड़ा सवाल अभी भी यही है कि क्या सऊदी अरब की मदद के लिए हूती विद्रोहियों के खिलाफ पाकिस्तान कोई बड़ी कार्रवाई करके ईरान से दुश्मनी मोल लेगा?
पाकिस्तान का पूर्व मिलिट्री कमांडर मक्का एग्रीमेंट का पहला महासचिव
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के पहले महासचिव के रूप में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को नियुक्त किया गया है. इनका कार्यकाल तीन वर्षों का रहेगा.
अगस्त में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने समझौता किया है कि इन तीनों में किसी एक देश पर किया गया हमला तीनों देश पर हमला माना जाएगा और तीनों मिलकर इस हमले का जवाब देंगे.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि “नोमान महमूद को मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत पहला सेक्रेटरी जनरल बनाया गया है. उन्हें हिलाल-ए-इम्तियाज (मिलिट्री) सम्मान भी मिल चुका है.”
महमूद को 2022 के फेरबदल के दौरान आर्मी स्टाफ के प्रमुख पद के लिए उम्मीदवार माना गया था, लेकिन यह पद असीम मुनीर को मिला. साल 1987 में पाकिस्तानी सेना की बलूच रेजिमेंट में शामिल हुआ था नोमान. करियर में पेशावर में XI कोर की कमान, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के एनालिसिस निदेशालय का नेतृत्व और इस्लामाबाद में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी की अध्यक्षता (2021–2023) शामिल है.
नोमान महमूद का अग्निपरीक्षा, हूतियों पर एक्शन को लेकर सस्पेंस
अगस्त के पहले सप्ताह में तुर्किए, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए गठबंधन में तीनों देशों ने हमले के वक्त एकदूसरे के साथ खड़े रहने की कसमें खाईं थीं. एग्रीमेंट में भी यही लिखा गया है, कि किसी देश पर अटैक को बाकी दोनों देशों पर अटैक माना जाएगा. लेकिन पिछले कुछ दिनों से हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब पर हमला कर रहे हैं, बावजूद इसके पाकिस्तान, सऊदी अरब की मदद के लिए नहीं आया. इतना ही नहीं हूती के हमलों की निंदा भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कई दिनों बाद की. जबकि सऊदी के प्रिंस ने पाकिस्तान से एक्शन लेने के लिए कहा. लेकिन पाकिस्तान इसलिए अब तक सैन्य मदद देने से कतरा रहा है क्योंकि अगर उसने हूतियों के खिलाफ एक्शन लिया तो ईरान की खिलाफत कर बैठेगा. कुल मिलाकर मक्का पैक्ट पाकिस्तान के लिए गले की फांस बन चुका है.
इस बीच सऊदी विदेश मंत्रालय ने बताया कि “मक्का पैक्ट में शामिल तीनों देश पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी के आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है.”
इमरजेंसी मीटिग के बाद हूतियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा सकती है. ऐसे में नोमान महमूद के लिए ये एक अग्निपरीक्षा से कम नहीं है.
भारत के साथ जंग में मारे गए थे नोमान के पिता
1971 की जंग में भारतीय सेना से लड़ते हुए पाकिस्तानी अफसर लेफ्टिनेंट कर्नल राजा सुल्तान महमूद मारे गए थे. राजा सुल्तान महमूद पाकिस्तान की 32 बलूच रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे. दिसंबर 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के पीरगंज इलाके में भारतीय सेना और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच भीषण लड़ाई हुई थी. बताया जाता है कि कर्नल राजा सुल्तान की भारतीय गोरखा राइफल्स से आमना सामना हुआ था. कहा जाता है कि बाद में गोरखा राइफल्स से जुड़े भारतीय सैन्य अधिकारी इत्तबार सिंह ने वर्षों बाद नौमान महमूद को एक पत्र लिखा था.


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