उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के सीक्रेट पैक्ट का खुलासा किए जाने के बाद यूक्रेन और दक्षिण कोरिया के बीच जमकर ठन गई है. मामला इतना बढ़ चुका है कि दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन से अपने राजदूत को वापस बुलाने की घोषणा की है. वहीं यूक्रेन ने भी सियोल पर रूस की मदद का आरोप लगाते हुए कह दिया है कि दक्षिण कोरिया, रूस को तेल सप्लाई कर रहा है,
यूक्रेन ने हाल में गुपचुप तरीके से उत्तर कोरिया के 02 युद्धबंदियों को दक्षिण कोरिया भेज दिया था. दक्षिण कोरिया का आरोप है कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की उनके देश के साथ वादाखिलाफी की है. उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को लेकर हुई सीक्रेट संधि का सार्वजनिक तौर से खुलासा कर दिया है.
सियोल ने कीव से सार्वजनिक माफी की मांग की है, इनकार करने पर दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय ने 8 अक्टूबर को यूक्रेन में अपने राजदूत पार्क की-चांग को वापस बुलाने का ऐलान कर दिया है. (https://thefinalassault.com/zelensky-breach-of-trust-leads-to-tension-in-korean-peninsula/)
उत्तर कोरियाई सैनिकों को लेकर दक्षिण कोरिया-यूक्रेन में तकरार
23 सितंबर को, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में खुलासा किया कि रूस के कुर्स्क सीमा क्षेत्र में पकड़े गए दो उत्तर कोरियाई सैनिकों को दक्षिण कोरिया को सौंप दिया गया है.
जेलेंस्की के इस बयान के बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग नाखुश हुए और उन्होंने दोनों देशों के बीच गोपनीयता समझौते का उल्लंघन करने के लिए कीव की आलोचना की.
दरअसल जंग के मैदान में पकड़े गए उत्तर कोरिया के 02 सैनिकों को दक्षिण कोरिया को सौंपा गया है. ये दोनों कोरियाई सैनिक, रूस की तरफ से जंग में यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे थे और 2024 में पकड़े गए थे.
दोनों देशों में उत्तर कोरियाई सैनिकों को सियोल सौंपे जाने पर सीक्रेट करार हुआ था लेकिन जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसका खुलासा कर दिया. ऐसे में दक्षिण कोरिया भन्नाया है और जेलेंस्की के माफी मांगने से मना करने पर सियोल ने अपना राजदूत कीव से वापस बुला लिया है.
यूक्रेन के विदेश मंत्री ने घटना को राजनयिक गलतफहमी बताया
यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने इस घटना को केवल “राजनयिक गलतफहमी” बताया और कहा है कि साउथ कोरिया के साथ यह मतभेद जल्द ही सुलझ जाएगा.
साउथ कोरिया के विदेश मंत्री ने अपने बयान में कहा, “मैंने इस मुद्दे पर यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से बात की, और उन्होंने स्थिति को लेकर अपनी कठिनाइयां बताईं, उन्होंने माफी भी मांगी, लेकिन कार्रवाई का स्तर हमारी अपेक्षा से अलग है, इसलिए हम और अधिक निर्णायक कदम उठाने की योजना बना रहे हैं.”
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “सरकार ने राजदूत पार्क को वापस बुलाने का फैसला किया है. हमें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच सभी लंबित मुद्दे सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझ जाएंगे. इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दक्षिण कोरिया यूक्रेन के साथ बातचीत जारी रखेगा.”
यूक्रेन ने कोरिया प्रायद्वीप की सुरक्षा खतरे में डाली: साउथ कोरियाई राष्ट्रपति
साउथ कोरियाई राष्ट्रपति ने जेलेंस्की के बयान पर नाराजगी जाहिर की है. राष्ट्रपति ली ने कहा, “मुझे नहीं पता कि यूक्रेन ने समझौते का उल्लंघन क्यों किया और इस मामले को सार्वजनिक क्यों किया, लेकिन यह बेहद निराशाजनक है, उत्तर कोरियाई कैदियों को दक्षिण कोरिया वापस लाने का मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील है, जिसका कूटनीति, सुरक्षा और कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है.”
दरअसल रूस के आक्रमण के बाद से दक्षिण कोरिया ने खुलकर यूक्रेन की मदद की थी. सियोल ने यूक्रेन को सैन्य साजो सामान तक सप्लाई किए थे. लेकिन दक्षिण कोरिया से रूस को बड़ी मात्रा में ईंधन (डीजल) भेजे जाने के आरोप के बाद भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है.
2024 में कुर्स्क की लड़ाई में उत्तर कोरियाई सेना ने लिया था हिस्सा
अगस्त 2024 में यूक्रेन ने रूस पर बड़ा पलटवार करते हुए सीमावर्ती कुर्स्क इलाके के एक बड़े हिस्से पर कर लिया था. यूक्रेन को अपनी धरती से खदेड़ने में रूस के पसीने निकल गए थे. ऐसे में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से मदद की गुहार लगाई थी.
किम जोंग ने उत्तर कोरिया के करीब 10 हजार सैनिकों को यूक्रेन के खिलाफ लड़ने के लिए रूस भेजा था. करीब एक साल तक चली लड़ाई के बाद कोरियाई सैनिकों की मदद से रूस ने कुर्स्क प्रांत से यूक्रेनी सेना को खदेड़ दिया था. लेकिन जंग के दौरान कोरियाई सेना को भी नुकसान पहुंचा था. कोरिया के सैनिकों की जान भी गई थी और बड़ी संख्या में घायल भी हुए थे. कुछ सैनिकों को यूक्रेन ने बंधक बना लिया था.
उस वक्त बंधक बनाए उत्तर कोरियाई सैनिकों के वीडियो भी यूक्रेन ने जारी किए थे. खुद किम जोंग ने रूस से लौटे घायल सैनिकों से मुलाकात की थी और कुछ सैनिकों को वीरता के लिए मेडल भी दिए थे. किम जोंग ने उन सैनिकों के प्रति सहानुभूति जाहिर की थी, जो रणभूमि से लौट नहीं पाए थे.


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