By Nalini Tewari
अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की आशंका एक बार फिर बढ़ी हुई है, तो वहीं मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों में जंग बढ़ चुकी है. हूतियों के हमले झेल रहे सऊदी अरब के मक्का समझौता पार्टनर पाकिस्तान और तुर्किए की धड़कनें बढ़ी हुई हैं, यही कारण है कि पाकिस्तान का फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर बार-बार तेहरान का चक्कर लगा रहा है. इस बार असीम मुनीर के साथ तुर्किए का खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलीम और सऊदी के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान भी हैं. कवायद इस बात की है कि ईरान को मक्का पैक्ट में शामिल किया जा सके.
दरअसल ईरान के कड़े और अडिग रुख के कारण अमेरिका-इजरायल किसी भी वक्त हमले शुरु कर सकते हैं, तो वहीं सऊदी अरब इस आस में बैठा है कि हूतियों के खिलाफ पाकिस्तान और तुर्किए उसका साथ देंगे. लेकिन पाकिस्तान के लिए मक्का पैक्ट गले की फांस बन चुका है, क्योंकि अगर वो हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के साथ आया तो ईरान को नाराज कर बैठेगा.
यही कारण है कि तेहरान में असीम मुनीर और तुर्किए के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलीम और सऊदी के डिफेंस मिनिस्टर का दौरा हो रहा है, क्योंकि अगर अमेरिका ने तेहरान पर हमला किया तो तेहरान के लपेटे में फिर से गल्फ देश आ जाएंगे. वहीं हूतियों और सऊदी के बीच सैन्य संघर्ष को रुकना भी जरूरी है, नहीं तो मिडिल ईस्ट के जंग की आग गल्फ के अलावा और देशों में भी फैलनी तय है.
तेहरान की चौखट पर असीम मुनीर, तुर्किए और सऊदी
मक्का पैक्ट के देश यानि पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब की कोशिश है कि ईरान को मक्का पैक्ट का हिस्सा बनाया जाए, ताकि इस्लामिक नाटो को एक मजबूत साथी मिले. मक्का पैक्ट से जुड़े शीर्ष अधिकारियों की सोमवार को ईरान की राजधानी तेहरान में मीटिंग हो रही है जिसमें असीम मुनीर भी शामिल है. यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब यमन के हूती विद्रोहियों के हमले सऊदी अरब पर तेज हो गए हैं.
हालांकि हाल ही में असीम मुनीर जब तेहरान पहुंचे थे, तो ईरान ने कड़ा संदेश दिया था और अमेरिका का पैरवी करने के चक्कर में मुनीर को खूब हड़काया था. ईरान के सिक्योरिटी चीफ ने अपने संदेश में कह दिया था कि एक ग्राम न्यूक्लियर भी ईरान से बाहर नहीं जाएगा.
लेकिन इस बार मुनीर के साथ साथ सऊदी के रक्षा मंत्री और तुर्किए के इंटेलिजेंस चीफ भी हैं, जिसके बाद माना जा रहा है कि तीनों तेहरान को मक्का पैक्ट को लेकर बात करने वाले हैं, और तीनों की कोशिश है कि ईरान को मक्का पैक्ट में शामिल करके मुस्लिम देशों को एकजुट किया जा सके.
ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के उप-सचिव अली बघेरी ने मक्का पैक्ट वाले देशों के नेताओं के दौरे की पुष्टि की है. तुर्किए की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कलिन, तेहरान में ईरानी अधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक में हिस्सा लेंगे.
मक्का पैक्ट की ईरान में पहली बड़ी बैठक
इस बैठक को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि मक्का पैक्ट के तीनों सदस्य देशों के प्रतिनिधि पहली बार ईरान के साथ इस स्तर पर एक साथ बातचीत कर रहे हैं. अगस्त में हुए इस रक्षा समझौते में इस बात पर मुहर लगाई गई थी कि किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला बाकी सदस्यों पर हमला माना जाएगा.
इसी महीने मक्का पैक्ट के सदस्य देशों के मंत्रियों ने रियाद में इमरजेंसी मीटिंग की थी. उस बैठक में सऊदी अरब में सैन्य बलों और उनकी क्षमताओं की तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने पर सहमति बनी थी.
दरअसल तीनों देश तेहरान के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बात करना चाहते हैं और ये समझाने की कोशिश करेंगे कि हूती और सऊदी अरब के बीच सैन्य तनाव रुकना चाहिए. क्योंकि अगर इजरायल-अमेरिका ने तेहरान पर हमला किया तो ईरान अलग-थलग पड़ सकता है, क्योंकि उसके प्रॉक्सी सऊदी अरब से जंग लड़ रहे होंगे.
सऊदी अरब की ओर से बताया गया कि “यह दौरा मक्का समझौते से जुड़े देशों के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य मौजूदा संकट में तनाव को कम करना, बातचीत और कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना है. साथ ही, इसका मकसद कतर और पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करना और जोर देना है कि क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने में ‘मक्का समझौते’ से जुड़े देशों की अहम भूमिका है.”
पिछले सप्ताह भी अमेरिका की बात रखने पहुंचे थे मुनीर
इस ताजा दौरे से एक सप्ताह पहले मुनीर तेहरान में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और सुरक्षा सचिव से मुलाकात करने पहुंचे थे. इस दौरे के दौरान ईरानी नेताओं ने मुनीर से साफ-साफ कह दिया था कि जब तक तेहरान की मांगे पूरी नहीं हो जाती हैं तब तक अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं होगी.
मक्का समझौता वाले देशों से बैठक से पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “तेहरान युद्ध की स्थिति में हैं और देश रक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाएगा. बयानों की परवाह किए बिना, हम हालात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. ईरान की रक्षा करने में हमारे सशस्त्र बलों को कोई संकोच नहीं है.”


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