अरुणाचल प्रदेश से सटी एलएसी पर चल रही तनातनी के बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन पर दिया है बेहद नपातुला बयान. राजनाथ सिंह के मुताबिक, इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) में रुल ऑफ लॉ और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन एंड ओवरफ्लाइट पर भारत का जोर किसी देश (चीन) के विरुद्ध नहीं बल्कि इसका उद्देश्य इस क्षेत्र के देशों के सामूहिक हितों की रक्षा करना है.
गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के सेबू में आसियान प्लस डिफेंस मिनिस्टर्स (एडीडीएम-प्लस) समिट को संबोधित किया. 13वीं एडीएमएम-प्लस की विषयवस्तु ‘नेविगेटिंग अवर फ्यूचर, टुगेदर’ के संदर्भ में रक्षा मंत्री ने कहा कि “भारत, आसियान की केंद्रीय भूमिका और एक सुरक्षित, मुक्त, समावेशी, सुदृढ़ तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को विशेष महत्व देता है, जहां शांति और स्थिरता केवल आकांक्षाएं नहीं, बल्कि सामूहिक प्रतिबद्धता का परिणाम हैं.”
राजनाथ सिंह ने कहा कि आसियान के साथ भारत का रणनीतिक जुड़ाव दीर्घकालिक है और साझा हितों, पारस्परिक सम्मान तथा व्यावहारिक सहयोग पर आधारित है. इस संबोधन के दौरान, चीन, अमेरिका और फिलीपींस सहित सभी आसियान देशों के रक्षा मंत्री मौजूद थे.
साउथ चाइना सी में चीन की दादागिरी से फिलीपींस और वियतनाम जैसे देश परेशान
दरअसल, साउथ चाइना सी में चीन का फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के जहाजों के नौवहन और आसमान में एयरक्राफ्ट उड़ान को लेकर तनातनी चल रही है. संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के आदेशों और कानूनों के अवहेलना कर इस क्षेत्र में दादागिरी चलाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में भारत और अमेरिकी सहित आसियान देश, चीन की इस जोर-जबरदस्ती का विरोध करते आए हैं. लेकिन पहली बार भारत ने चीन का नाम लिए बगैर संभल कर बयान दिया.
राजनाथ सिंह ने दोहराया कि यह भारत की विदेश एवं रक्षा नीति की अवधारणाओं के साथ-साथ उसकी सभ्यतागत भावना ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ से भी सामंजस्य रखती है. यह भावना विश्वभर के सभी लोगों की प्रसन्नता, समृद्धि और कल्याण की आकांक्षा को प्रतिबिंबित करती है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह विषय हमें याद दिलाता है कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारी एकजुटता और अपनी भौगोलिक, आर्थिक तथा रणनीतिक विविधता का लाभ उठाने की साझा क्षमता में निहित है. भारत पारस्परिक विश्वास, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास करता है. यही सहयोग की भावना हमें शांति और व्यवस्था के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाती है.
राजनाथ सिंह ने वर्ष 2026 के दौरान आसियान के साथ भारत के जुड़ाव में समुद्री सहयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने वर्ष 2026 को ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष’ घोषित किए जाने और दूसरे आसियान-भारत समुद्री अभ्यास के आयोजन का उल्लेख किया. उन्होंने बल देकर कहा कि भारत केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के सिद्धांतों की बात नहीं करता, बल्कि समुद्री सुरक्षा से संबंधित वैश्विक कानूनों का दृढ़ता से पालन भी करता है.
अदन की खाड़ी से लेकर ईरान जंग तक भारतीय युद्धपोतों ने दी कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा
राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2008 से भारतीय नौसेना अदन की खाड़ी जैसे अत्यंत संवेदनशील समुद्री गलियारों में लगातार सक्रिय उपस्थिति बनाए हुए है. इस दौरान किसी प्रकार की दबावपूर्ण कार्रवाई या एकतरफा कदम नहीं उठाए गए हैं, जो अन्य देशों के अधिकारों को कमजोर करते हों.
रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की तैनाती के माध्यम से भारत ने हजारों वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया है और खुले समुद्र में जहाजों के अपहरण की दर्जनों घटनाओं को विफल किया है. इस दौरान जहाजों के ध्वज या राष्ट्रीयता को ध्यान में रखते हुए बिना वाणिज्यिक नौवहन को सुरक्षा प्रदान की गई है. उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को भारत की जिम्मेदारी बताया.
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में, जब वैश्विक व्यापार मार्गों को सीमा पार के जटिल खतरों का सामना करना पड़ रहा है, भारत केवल बयानबाजी तक सीमित रहने के बजाय ठोस कार्रवाई के लिए तैयार है. प्रभावी कदम उठाने, नियमित परिचालन उपस्थिति बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है. भारत हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक विश्वसनीय शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा.
अरुणाचल प्रदेश में चीन से चल रही है तनातनी
अरुणाचल प्रदेश से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच अपर सुबानसुरी इलाके में पिछले तीन महीनों से फेस-ऑफ (गतिरोध) चल रहा है. हाल में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने इस फेस-ऑफ को लेकर सनसनीखेज बयान देकर देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है.


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