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भारत से मिसाइल ट्रेनिंग लेगा जापान, प्रशांत महासागर में चल रही अदावत से आजिज़ टोक्यो

लंबी दूरी की मिसाइल लॉन्च करने की ट्रेनिंग के लिए जापान ने भारत से सहयोग मांगा है. युद्धपोत से दागे जानी वाली एंटी-शिप मिसाइल को लॉन्च करने की ट्रेनिंग के लिए जापानी सैनिक भारत आएंगे. ये खबर ऐसे समय में सामने आई है जब बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के दौरे के दौरान जापानी समकक्ष शिंजीरो कोइजुमी से मुलाकात की. 

जापान की सेल्फ डिफेंस फोर्सेज (जेएसडीएफ) के चीफ (सेना प्रमुख) के मुताबिक,भारत से टाइप-25 मिसाइल दागने की ट्रेनिंग लेने की तैयारी है. जापान के जंगी बेड़े में 1000 किलोमीटर रेंज की हाइपरसोनिक टाइप-25 मिसाइल तो है लेकिन उसे दागने का अभ्यास नहीं है. जबकि, पिछले कई दशक से भारत की स्ट्रेटेजिक फोर्स कमांड (एसएफसी), 5000 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि मिसाइल को लॉन्च करने का परीक्षण कर चुकी है. इसके अलावा, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने हाइपरसोनिक मिसाइल भी बनाकर तैयार कर ली है और उसका भी परीक्षण हो चुका है. 

डीआरडीओ और एसएफसी, लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण अमूमन ओडिसा के व्हीलर आईलैंड  (अब एपीजे अब्दुल कलाम आईलैंड) से करती आई हैं. इस दौरान बंगाल की खाड़ी से लेकर अंडमान निकोबार और दक्षिणी हिंद महासागर को नो-फ्लाई ज़ोन घोषित किया जाता है. इस दौरान आसमान से गिरने के बाद मिसाइल जहां गिरती है, उन इलाकों को समुद्री-जहाजों के नौवहन के लिए भी आउट ऑफ बाउंड्स रखा जाता है. यही वजह है कि जापान ने इस तरह के परीक्षणों के लिए भारत से सीखने की इच्छा जताई है.  साथ में काउंटर-ड्रोन ट्रेनिंग में भी भारत से जापान ने सहयोग की अपेक्षा की है.

धर्म-गार्जियन एक्सरसाइज में जापानी लड़ाकू विमान पहुंचे थे जोधपुर

पिछले कुछ सालों में भारत और जापान के सैन्य संबंध काफी मजबूत हुए हैं. भारत और जापान की नौसेनाएं, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं के साथ मिलकर साझा मेरीटाइम युद्धाभ्यास मालाबार में हिस्सा लेती हैं. इसके अलावा, हाल में धर्म-गार्जियन एक्सरसाइज के लिए पहली बार जापान के फाइटर जेट (एफ-2) राजस्थान के जोधपुर भी पहुचें थे.  

बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जापानी समकक्ष से फिलीपींस में मुलाकात की है और रक्षा सहयोग के नए आयामों पर चर्चा की. भारत की तरह, जापान का भी चीन से समुद्री-विवाद का लंबा इतिहास रहा है और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है. 

जापान ने बढ़ाया डिफेंस बजट, मॉस्को की तनी भौहें

जापान के रक्षा मंत्री की राजनाथ सिंह से ऐसे समय में मुलाकात हुई है, जब हाल के महीनों में टोक्यो के संबंध रूस से काफी खराब हो गए हैं. इसके पीछे जापान का वो ‘व्हाइट पेपर’ हैं जिसमें प्रशांत महासागर में ‘यूक्रेन युद्ध’ जैसे हालात को लेकर आशंका जताई गई थी.

रूस-यूक्रेन युद्ध के खतरे को देखते हुए जापान ने अपने डिफेंस बजट को बढ़ाने की बात इस व्हाइट पेपर में की थी. जापान का इस वर्ष का रक्षा बजट करीब 67 बिलियन डॉलर था, यानी करीब साढ़े छह लाख करोड़. ये बजट पिछले साल, 2025 के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत ज्यादा था. ये रक्षा बजट, जापान की जीडीपी का करीब 02 प्रतिशत था.

पैसिफिक ओसियन में बन रहे यूक्रेन जैसे जंग के हालात

जापान ने अगले वर्ष यानी 2027 तक अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए एक खास शील्ड (एसएचआईईएलडी) का भी ऐलान किया है यानी सिनक्रेनाइजेड हाइब्रिड इंटीग्रेटेड इनहेंस्ड लिटोरल डिफेंस. इस शील्ड में युद्धपोतों के एक मजबूत जंगी बेड़े के साथ समुद्री ड्रोन्स का एक बड़ा बेड़ा शामिल करना है.ऐसे में रूस ने जापान के बढ़ते डिफेंस बजट को लेकर आपत्ति जताई थी. 

रुस की आपत्ति पर जापान ने पैसिफिक ओसियन में यूक्रेन जंग से हालात को लेकर अपनी चिंता जता दी. बदले में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जापान के करीब विवादित कुरील आईलैंड का दौरा शुरु कर दिया. इसको लेकर जापान की भौंहे तन गई और टोक्यो स्थित रूसी राजदूत को तलब कर फटकार लगा दी. क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले तक ये आईलैंड जापान के कब्जे में थे. द्वितीय विश्वयुद्ध में मिली हार के बाद, जापान को ये कुरील आईलैंड रूस को देने पड़े थे. जापान अभी भी इन आईलैंड को अपना बताता है. ऐसे में रूस और जापान के बीच तनातनी जबरदस्त बढ़ गई है.

जापान को रूस और चीन के प्रशांत महासागर में साझा समुद्री-युद्धाभ्यास भी कभी नहीं भाए हैं. क्योंकि जापान का चीन से भी सेनकाकू आईलैंड को लेकर लंबा विवाद रहा है. इसके अलावा टोक्यो को इस बात की आशंका है कि चीन और रूस, उत्तर कोरिया के साथ मिलकर जापान की घेराबंदी करने की जुगत में है. 

20वीं सदी के शुरुआत में जापान के उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद को लेकर प्योंगयांग और टोक्यो की लंबी अदावत रही है. ऐसे में उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन ने जापानी समंदर में बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण कर टोक्यो की नाक में दम कर रखी है. यही वजह है कि जापान भी अब लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण के लिए भारत से सहयोग मांग रहा है. 

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