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आतंकवाद पर किताबी ज्ञान नहीं, घुसकर मारने का अनुभव: राजनाथ

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आतंकवाद के खिलाफ भारत की जंग महज ‘क्लास-रुम’ अनुभव नहीं बल्कि ग्राउंड जीरो पर अर्जित किया गया अनुभव है. चीन और अमेरिका के रक्षा मंत्रियों की मौजूदगी में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान से संचालित आतंकवाद पर करारा प्रहार किया है. मौका था फिलीपींस के सेबू में चल रही आसियान प्लस डिफेंस मिनिस्टर्स (एडीडीएम-प्लस) समिट का.

सेबू शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने साफ तौर से कहा कि “आतंकवाद-विरोधी अभियानों में भारत का व्यापक अनुभव केवल क्लास-रुम तक थ्योरेटिकल नॉलेज (सैद्धांतिक ज्ञान) तक सीमित नहीं, बल्कि सीमा-पार (पाकिस्तान) की जटिल सुरक्षा चुनौतियों का दशकों तक सीधे सामना करके अर्जित किया गया अनुभव है.”

पाकिस्तान का नाम लिए बगैर, राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रोएक्टिव और बैटल-टेस्ट्ड डॉक्ट्रिन को निर्णायक रूप से प्रदर्शित किया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान में घुसकर एयर-स्ट्राइक की थी.  रक्षा मंत्री के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारत ने आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त किया और (पाकिस्तान) के स्टेट स्पॉन्सर आतंकवाद के विरुद्ध किसी भी प्रकार की समझौता न करने वाली स्पष्ट सीमा निर्धारित की. (https://x.com/rajnathsingh/status/2115701144345563162?s=20)

रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के सभी रूपों के उन्मूलन और सामूहिक क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई. 13 वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की प्रत्येक रणनीति को वास्तविक परिस्थितियों में संचालित अभियानों के दौरान परखा गया है, उसे और अधिक प्रभावी बनाया गया है तथा उसकी उपयोगिता सिद्ध हुई है.

रक्षा मंत्री ने साफ तौर से कहा कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती और भारत संयुक्त अभ्यासों, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा व्यापक खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के माध्यम से एडीएमएम-प्लस के साझेदार देशों के साथ अपना व्यावहारिक एवं धरातल पर परखा हुआ अनुभव साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है, ताकि सामूहिक क्षमताओं को सुदृढ़ किया जा सके.

राजनाथ सिंह ने कहा कि एडीएमएम-प्लस प्रारूप के अंतर्गत आतंकवाद-रोधी सहयोग एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है. भारत और मलेशिया वर्ष 2024 से 2027 तक की समय-सीमा के लिए आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं.

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