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डिएगो गार्सिया का बदला मालिकाना हक, यूएस मिलिट्री बेस रहेगा जारी

हिंद महासागर में सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण चागोस का मालिकाना हक अब मॉरीशस के हाथ में आ गया है. ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीप को लेकर दशकों पुराना विवाद खत्म हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने के लिए ब्रिटेन के सौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसकी जानकारी ब्रिटेन ने दी है. हालांकि, चागोस द्वीप पर स्थित यूएस का डिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस जारी रहेगा.

अमेरिका के हस्ताक्षर करने के बाद अब ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच समझौते को “अंतिम रूप” दिया जा रहा है. हालांकि द्वीप को लेकर समझौते में साफ तौर पर कहा गया है कि चागोस द्वीप पर डिएगो गार्सिया में अमेरिकी मिलिट्री बेस बना रहेगा. मौजूदा जियोपॉलिटिकल स्थिति को देखते हुए ब्रिटेन और अमेरिका में सैन्य बेस बने रहने पर सहमति बनी है. वर्ष 2020 में गलवान घाटी झड़प के बाद चीन को धमकाने के लिए अमेरिका ने इसी द्वीप (चागोस) से अपने स्ट्रेटेजिक बॉम्बर को भारत की सीमा में भेजा था. हालांकि, भारत ने इस बॉम्बर की मांग नहीं की थी.

मॉरीशस को होगा चागोस, ब्रिटेन ने क्या दी जानकारी?

प्रधानमंत्री कीर स्टार्र के प्रवक्ता टॉम वेल्स ने कहा, हम समझौते को अंतिम रूप देने और उस पर हस्ताक्षर करने के लिए मॉरीशस सरकार के साथ काम कर रहे हैं. हस्ताक्षर होने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों में रखा जाएगा. हमने अमेरिका के साथ चर्चा की है. फरवरी के महीने में जब ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने पहुंचे थे, उस वक्त चागोस द्वीप के स्वामित्व को लेकर बातचीत की गई थी.

चागोस द्वीप क्यों है महत्वपूर्ण?

दरअसल हिंद महासागर की निगहबानी के लिए ये द्वीप रणनीतिक तौर पर अमेरिका और ब्रिटेन दोनों के लिए अहम है. चागोस को लेकर भारत हमेशा से मॉरीशस के पक्ष में रहता है, क्योंकि चागोस द्वीप भारत के लक्षद्वीप के करीब है. चागोस, हिंद महासागर में 60 से अधिक द्वीपों का एक द्वीपसमूह है. चागोस द्वीपसमूह, मॉरीशस के मुख्य द्वीप से लगभग 2200 किलोमीटर उत्तर पूर्व में और तिरुवनंतपुरम से लगभग 1700 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में स्थित है. 

ईरान से झड़प में निभाएगा अहम भूमिका

न्यूक्लियर डील को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ईरान और अमेरिका में जुबानी जंग तेज हो गई है. ट्रंप ने ईरान पर बमबारी करने की धमकी दी है तो ईरान की तरफ से भी भडकाऊ बयान सामने आई है.

अगर चीन से संबंध बिगड़ते हैं तो मिडिल ईस्ट में ऑपरेशन के लिए डिएगो गार्सिया एक सामरिक भूमिका निभा सकता है. हाल के दिनों में ऐसी खबरें भी आई थी कि अमेरिका ने डिएगो गार्सिया बेस पर बी2 बॉम्बर की संख्या बढ़ा दी है.

गलवान झड़प के दौरान अमेरिका ने यहीं से की थी भारत की मदद

वर्ष 2020 में  गलवान घाटी झड़प के बाद चीन को धमकाने के लिए अमेरिका ने इसी द्वीप से अपने स्ट्रेटेजिक बॉम्बर को भारत की सीमा में भेजा था. हालांकि, भारत ने इस बॉम्बर की मांग नहीं की थी. लेकिन अमेरिका ने भारत से सामरिक-संबंधों के चलते स्ट्रेटेजिक बॉम्बर को भेजा था कि जरूरत पड़ने पर डिएगो गार्सिया से जरूरी मदद भेजी जा सकती है.  

चागोस द्वीप पर विवाद खत्म, हिंद महासागर में क्या बदलेगा?
ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीप को लेकर समझौता कर लिया गया है. इस द्वीप को लेकर लंबा विवाद है, लेकिन ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन के बाद से और कीर स्टार्मर के सत्ता में आने के बाद से विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही है. अब अमेरिका ने भी हामी भर दी है. पिछले साल ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर और मॉरीशस के पीएम ने एक संयुक्त बयान भी जारी किया था. ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने कहा, “इस सरकार को ऐसी स्थिति विरासत में मिली थी. लंबे समय से डिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस का सिक्योरिटी ऑपरेशन खतरे में था.” वहीं मॉरीशस का कहना था कि “चागोस द्वीप मॉरीशस के लिए संप्रभुता का प्रतीक है.” 

ब्रिटेन ने 200 साल पहले किया था चागोस पर कब्जा
चागोस द्वीप के इतिहास में अगर जाएं तो साल 1814 में ब्रिटिश ने चागोस के साथ-साथ मॉरीशस पर भी कब्जा कर लिया. मॉरीशस को 1967 में ब्रिटेन से आजादी मिल गई पर चागोस पर कब्जा ब्रिटेन का ही रहा. चागोस के निवासियों को हटाकर ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह के डिएगो गार्सिया को अमेरिका को किराए पर दे दिया और अमेरिका ने रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण इस द्वीप का इस्तेमाल नौसेना के लिए किया. अमेरिका ने सैन्य अड्डा बनाया हुआ है.

रणनीतिक तौर पर अहम चागोस द्वीप पर क्या है भारत का रुख?

चागोस विवाद पर भारत ने हमेशा मॉरीशस के दावे का समर्थन किया है, जो उपनिवेश मुक्त होने के सिद्धांतों और देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के अनुरूप है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने पिछले साल एक बयान जारी करके कहा था कि भारत समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए मॉरीशस और दूसरे समान विचारधारा वाले साझेदारों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है. 

पिछले साल अक्टूबर में ही चागोस को लेकर समझौता हो गया था, लेकिन मॉरीशस में सरकार बनने और डिएगो गार्सिया में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे को लेकर सहमति न बन पाने के कारण समझौते में देरी थी, लेकिन अब ट्रंप के हस्ताक्षर होने के बाद सौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है. 

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