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मेक इन इंडिया Rafale को मंजूरी, मैक्रों के दौरे का बेसब्री से इंतजार

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की दिल्ली यात्रा से पहले, भारत और फ्रांस में रफाल (राफेल) फाइटर जेट को लेकर मेगा-डील की तैयारी शुरु हो गई है. गुरुवार को रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के लिए 114 मेक इन इंडिया रफाल लड़ाकू विमानों को बनाने की मंजूरी दे दी. 

भारत में बनने वाले फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों के इस सौदे की कुल कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है, जो दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील में से एक हो सकती है.

गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की अहम बैठक हुई, जिसमें सीडीएस और वायुसेना प्रमुख सहित रक्षा सचिव भी मौजूद रहे. बैठक में डीएसी, इस डील मंजूरी दी गई.

रफाल की 5-6 नई स्क्वाड्रन बनाने की तैयारी

पिछले महीने रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने वायुसेना के इस प्रपोजल को हरी झंडी दी थी, जो किसी भी रक्षा सौदे की पहली सीढ़ी होती है. डीएसी के बाद ये प्रोजेक्ट (प्रस्ताव) वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के पास जाएगा. ऐसे में बहुत संभव है कि इन 114 रफाल फाइटर जेट में से 16 को सीधे फ्रांस से खरीदा जा सकता है. इन 114 रफाल फाइटर जेट से वायुसेना की 5-6 स्क्वाड्रन को खड़ा किया जा सकता है. भारतीय वायुसेना की एक स्क्वाड्रन में 18-20 लड़ाकू विमान होते हैं.

अगले हफ्ते एआई समिट के लिए मैक्रों का दिल्ली दौरा

माना जा रहा है कि अगले हफ्ते (17-19 फरवरी) फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के दौरान इस सौदे को लेकर अहम घोषणा हो सकती है. पिछले दोनों रफाल फाइटर जेट सौदों की तरह ये भी जीटूजी यानी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील होने जा रही है.

वर्ष 2016 में भारत ने फ्रांस से सीधे 36 रफाल लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया था, उसकी कुल कीमत करीब 59 हजार करोड़ थी. पिछले वर्ष अप्रैल में भारत ने नौसेना के लिए रफाल लड़ाकू विमानों के मरीन वर्जन यानी रफाल (एम) खरीदने को लेकर करार किया था. इन रफाल (एम) लड़ाकू विमानों को स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा.

जीटूजी डील के तहत बनेंगे 114 रफाल लड़ाकू विमान

भारतीय वायुसेना ने घटती स्क्वाड्रन के मद्देनजर 114 रफाल (राफेल) फाइटर जेट देश में बनाने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को सौंपा था. पिछली रफाल डील की तरह ये सौदा भी जीटूजी यानी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट करार करेगा. करार होने के बाद रफाल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दासो (दसॉल्ट), भारत में किसी स्वदेशी कंपनी के साथ देश (भारत में) ही एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी. भारत में बनने वाले स्वदेशी रफाल फाइटर जेट में करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी हथियार और उपकरण लगे होंगे.

ऑपरेशन सिंदूर का हीरो है रफाल फाइटर जेट: वायुसेना

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय वायुसेना के मौजूदा रफाल फाइटर जेट की ऑपरेशन्ल क्षमताओं को देखते हुए मेक इन इंडिया के तहत फ्रांसीसी लड़ाकू विमान बनाने का फैसला लिया था.

बुधवार को वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने रफाल को ऑपरेशन सिंदूर का हीरो करार दिया था. वाइस चीफ ने एयर फोर्स में ज्यादा संख्या में रफाल को लेकर उम्मीद जताई थी.

पहलगाम नरसंहार का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से ऑपरेट करने वाले आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद के हेडक्वार्टर को तबाह करने के लिए भारतीय वायुसेना ने रफाल फाइटर जेट का इस्तेमाल किया था.

जिन 36 रफाल फाइटर जेट को फिलहाल भारतीय वायुसेना इस्तेमाल करती है, उन्हें मिटयोर, मीका और स्कैल्प मिसाइलों से लैस किया गया है. ये सभी फ्रांसीसी मिसाइल है. लेकिन मेक इन इंडिया रफाल फाइटर जेट को भारत में बनी मिसाइलों से भी लैस किया जा सकता है.

सरकार से यदि इस 114 रफाल प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल जाती है तो वायुसेना का पुराना एमआरएफए यानी मीडियम वेट फाइटर जेट प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा. एमआरएफए प्रोजेक्ट में भी 114 फाइटर जेट मेक इन इंडिया में ही बनाए जाने थे. लेकिन उसमें विदेश की अलग-अलग एविएशन कंपनी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती थी (दासो सहित). लेकिन मौजूदा डील, सीधे भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच में होगी.

पिछले वर्ष नौसेना के लिए 26 मरीन वर्जन का भी हुआ था सौदा

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष अप्रैल के महीने में ही भारत ने नौसेना के लिए फ्रांस के साथ रफाल के 26 मरीन वर्जन का सौदा भी किया था, जिसकी कीमत करीब 63 हजार करोड़ थी. इन रफाल (एम) विमानों को नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात करने के लिए खरीदा जा रहा है. 

स्कैल्प मिसाइल

गुरुवार को डीएसी ने रफाल फाइटर जेट के लिए 400 स्कैल्प मिसाइल खरीदने को भी मंजूरी दी. ये वही स्कैल्प मिसाइल है जिससे, भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाली आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा के हेडक्वार्टर को तबाह किया था. यूरोप की एमबीडीए कंपनी इन स्कैल्प मिसाइल का उत्पादन करती है. 

करीब 1300 किलो वजन की ये एक डीप स्ट्राइक (हवा से जमीन पर मार करने वाली) क्रूज मिसाइल है, जिसे रफाल से लॉन्च किया जाता है. 

शूडो-सैटेलाइट

डीएसी ने वायुसेना के लिए 15 हजार करोड़ के एयर-शिप बेस्ड हाई ऑल्टिट्यूड शूडो सैटेलाइल (एएस-एचएपीएस) को भी मंजूरी दे दी. ये दरअसल, बेहद ऊंचाई पर उड़ने वाले पायलट-लेस एयरक्राफ्ट (यूएवी) होते हैं, जो आसमान से रणभूमि पर नजर रखते हैं. 

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