लद्दाख से सटे शिनजियांग में चीन और पाकिस्तान ने अपना पहला युद्धाभ्यास शुरु किया है. इस युद्धाभ्यास का नाम काराकोरम-2026 दिया गया है. दोनों देशों की सेनाओं के बीच ये युद्धाभ्यास ऐसे वक्त में हो रहा है कि जब लद्दाख के 28 नए इलाकों को भारत के मैप में शामिल करने से चीन भड़का हुआ है. इसके अलावा लद्दाख में लगातार भारत के विकास से चीन तमतमाया हुआ है.
चीन-पाकिस्तान के युद्धाभ्यास के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को लद्दाख में करीब 3,350 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण कर रहे हैं, जिसमें लद्दाख को मेनलैंड भारत से जोड़ने वाले एक नया हाईवे भी है. लद्दाख के निम्मो को ये हाईवे, ज़ंसकार रेंज के जरिए हिमाचल प्रदेश के दारचा (लाहौल-स्पिति) से जोड़ देगा.
चीन-पाकिस्तान का काराकोरम सैन्य युद्धाभ्यास
भारत से सटे शिनजियांग प्रांत में चीन और पाकिस्तान की सेनाओं ने संयुक्त सैन्य ट्रेनिंग के लिए अभ्यास शुरू किया है. काराकोरम 2026 नाम से यह युद्धाभ्यास 14 उत्तर-पश्चिम चीन के शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र के कोरला में एक ट्रेनिंग बेस पर आयोजित किया गया. यह दोनों देशों की नियमित थल सेनाओं के बीच का पहला संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है.
इस साझा अभ्यास में ऊंचाई वाले इलाकों में संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियानों पर केंद्रित ड्रोन संचालन, टारगेट पर निशाना साधना और लंबी दूरी की स्नाइपिंग (निशानेबाजी) की ट्रेनिंग शामिल हैं. समारोह के बाद, दोनों पक्षों ने आतंकवाद-रोधी अनुभव साझा किए और पाकिस्तानी सैनिकों ने कुछ चीनी हथियारों और उपकरणों को देखा.
दोनों देशों के बीच यह पहला संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण है, जो आतंकवाद-रोधी अभियानों में आपसी सहयोग को गहरा करने और दोनों सेनाओं के बीच तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) को मजबूत करने में मदद के लिए है
लद्दाख में भारत ने चीन को दिया जैसे को तैसा वाला जवाब
चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को मान्यता देने से इंकार कर दिया है. चीन के विदेश मंत्रालय की ये तीखी प्रतिक्रिया उस कदम के बाद आई है जिसमें भारत के गृह मंत्रालय ने इसी महीने की शुरुआत में लद्दाख और उससे सटे चीन के कब्जे वाले विवादित इलाकों सहित कुल 28 जगहों के मानक नामों की घोषणा की थी.
दरअसल पिछले कई सालों से चीन, अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के चीनी नाम जारी कर अपने आधिकारिक नक्शों में शामिल कर रहा था. भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन के इस कदम का कई बार विरोध दर्ज कराया था. लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था. ऐसे में भारत ने भी जैसे को तैसे वाली चाल चली और अक्साई चिन सहित लद्दाख से सटे उन विवादित इलाकों के भारतीय नाम जारी कर दिए. इनमें 28 जगहों में हॉट-स्प्रिंग और गोगरा जैसे इलाके भी हैं, जहां 2020 में गलवान घाटी की झड़प के दौरान दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने आ गई थी.
लद्दाख में लगातार विकास कर रहा भारत
पाकिस्तान-चीन के बीच भारत से सटे प्रांत में युद्धाभ्यास के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख की जनता को बड़ी सौगात दी है. पीएम मोदी ने लद्दाख में लगभग 3350 करोड़ रुपये की 5 बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया है. इन 5 प्रोजेक्ट्स से क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत होगा, एनर्जी इंफ्रा में सुधार होगा, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा और जल सुरक्षा बढ़ेगी.
इसके अलावा पीएम मोदी सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बनाई गई 298 किलोमीटर लंबी निम्मो-पदुम-दारचा रोड देश को समर्पित किया. लेह के निम्मो को हिमाचल प्रदेश के दारचा से सुदूर ज़ांस्कर घाटी के माध्यम से जोड़ने वाली ये सड़क लद्दाख के लिए एक वैकल्पिक संपर्क मार्ग है और श्रीनगर-लेह तथा मनाली-लेह हाईवे का पूरक है.


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