इजरायल की खतरनाक खुफिया एजेंसी मोसाद का एक हैरतअंगेज कारनामा फिर चर्चा में है. ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद जो कभी इजरायल को खूब गालियां देते थे, उन्हीं राष्ट्रपति को मोसाद ने अपना एसेट या यूं कहें तो अपना एजेंट बना लिया. ये एक कहानी जैसा लगेगा, लेकिन सच्चाई जब दुनिया के सामने आई तो ईरान के पैरों तले जमीन खिसक गई है.
आनन-फानन में आईआरजीसी ने अपने ही पूर्व राष्ट्रपति को कड़ी निगरानी में रखा है. क्योंकि वे मोसाद के संपर्क में थे और अमेरिका-इजरायल की मदद से दोबारा सत्ता हासिल करना चाह रहे थे.
मोसाद के सेफ हाउस में रहे अहमदीनेजाद
अहमदीनेजाद 28 फरवरी को शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान उनके आवास पर हुए इजरायली हवाई हमले के बाद सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे. शुरुआत में दावा किया गया था कि अहमदीनेजाद भी अमेरिकी एयरस्ट्राइक में मारे गए. सड़कों पर ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की समर्थकों ने मातम जुलूस निकाला. हर जगह उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. कहा गया था कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के साथ अहमदीनेजाद भी मारे गए.
लेकिन खुलासा हुआ है कि मोसाद ने उन्हें एक सेफ हाउस में रखा था, क्योंकि वो इजरायल के लिए बतौर एजेंट काम कर रहे थे. अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि हमले के बाद उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था.
हालांकि, पिछले सप्ताह ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में सुरक्षा घेरे के बीच दिखाई दिए. 28 फरवरी के बाद ये पहला मौका था जब अहमदीनेजाद सार्वजनिक तौर पर दिखाई दिए.
और जैसे ही अहमदीनेजाद इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए खुफिया एजेंसी मोसाद के सेफ हाउस से बाहर निकले, आईआरजीसी की खुफिया शाखा ने अहमदीनेजाद से पूछताछ की है. पहले ऐसी खबरें आईं थीं कि अहमदीनेजाद नजरबंद हैं, लेकिन आईआरजीसी ने एक तस्वीर जारी करके ये दिखाने की कोशिश की है कि अहमदीनेजाद सुरक्षित और खुली हवा में हैं.
मोसाद ने लिखी स्क्रिप्ट, अहमदीनेजाद को बुडापेस्ट को बहाने से बुलाया
ईरान की मदद से जिस तरह से हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों ने मिलकर साल 2023 में इजरायल में आतंकी हमला किया था, उसके बाद से ही इजरायल, तेहरान से बदला लेना चाहता था. इजरायल-ईरान कट्टर दुश्मन तो थे ही लेकिन जिसतरह से हमास को ईरान की ओर से हथियार दिए जाने की बातें सामने आईं, उसने आग में घी डालने का काम किया.
ईरान में कट्टरपंथी सरकार को अमेरिका-इजरायल दोनों बदलना चाहते थे. ऐसे में मोसाद ने एक स्क्रिप्ट लिखी, जिसमें हंगरी शामिल रहा. साल 2024 में बुडापेस्ट की एक यूनिवर्सिटी के अधिकारी को हंगरी सरकार के एक बड़े अधिकारी से एक रिक्वेस्ट की गई. इसमें कहा गया कि लुडोविका यूनिवर्सिटी ऑफ पब्लिक सर्विस को क्लाइमेट चेंज पर एक कॉन्फ्रेंस आयोजित करनी चाहिए और उसमें ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को बुलाना चाहिए.
चूंकि ईरान की सत्ता में रहते हुए अहमदीनेजाद इजरायल की खिलाफत करते थे. और अमेरिका-इजरायल को घोषित शत्रु मानते थे. ऐसे में अहमदीनेजाद की इजरायली अधिकारियों से मुलाकात होना असंभव था. लिहाजा उन्हें यूनिवर्सिटी में लेक्चर के बहाने से बुडापेस्ट बुलाया गया, जहां मोसाद के अधिकारी अहमदीनेजाद का इंतजार कर रहे थे.
अहमदीनेजाद का 2024 में यूनिवर्सिटी का दौरा और अगले साल का दूसरा दौरा हुआ. उन्हें एक इंटेलिजेंस एसेट के तौर पर तैयार करने की इजरायल की कई सालों से चल रही कोशिश कामयाब हुई, क्योंकि अहमदीनेजाद ईरान की सत्ता में वापसी करना चाहते थे.
मोसाद चीफ से हुई अहमदीनेजाद की मुलाकात
तत्कालीन मोसाद के चीफ डेविड बार्निया 2024 में बुडापेस्ट पहुंचे ताकि अहमदीनेजाद से व्यक्तिगत रूप से मिल सकें. इसके कुछ समय बाद ही मोसाद ने सीआईए को सूचित किया कि वह मिस्टर अहमदीनेजाद के संपर्क में है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि इजरायल ने ही अहमदीनेजाद के यात्रा और ठहरने के कुछ खर्च भी उठाए.
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इजरायल ने अहमदीनेजाद को रहने और यात्रा के लिए गुप्त रूप से पैसे दिए और इजरायली एजेंट कई मौकों पर उनसे विदेश में मिले जिसमें बुडापेस्ट की उनकी यात्राएं भी शामिल थीं.
दरअसल इजरायल और अमेरिका चाहते थे कि ईरान में खामेनेई जैसे सुप्रीम लीडर और कट्टरपंथी सरकार को हटाकर सत्ता में अहमदीनेजाद को लाया जाए ताकि तेहरान को मोहरा बनाया जा सके.
28 फरवरी को ईरान पर हमला और अयातुल्ला खामेनई समेत शीर्ष सैन्य अधिकारियों को मारने के बाद प्लान था कि सत्ता में अहमदीनेजाद को लाया जाए. इसलिए एक बड़े ऑपरेशन के जरिये अहमदीनेजाद को हमले के बीच दूसरे जगह ले जाया गया, ताकि उन्हें सुरक्षित रखा जा सके और सही समय पर सत्ता परिवर्तन के जरिए उन्हें कुर्सी पर बैठाया जा सके. लेकिन आईआरजीसी और ईरान के कट्टरपंथी सरकार के चक्रव्यूह के आगे इजरायल-अमेरिका का प्लान फेल हो गया. अब अहमदीनेजाद, आईआरजीसी की कड़ी निगरानी में हैं, हालांकि चल रही जंग के बीच ईरान इन दावों को नकार रहा है और अहमदीनेजाद को विश्वासपात्र बताने में जुटा हुआ है.

