होर्मुज में अमेरिका और ईरान भिड़े हुए हैं तो अटलांटिक महासागर में फ्रांस और ब्रिटेन ने रूस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. फ्रांसीसी नौसेना ने ब्रिटिश नेवी के साथ मिलकर समंदर में कमांडो एक्शन लेते हुए एक ऑयल टैंकर को अपने कब्जे में ले लिया है. फ्रेंच नेवी ने दावा किया है कि कैमरून का फ्लैग लगाया ये जहाज रूसी है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में एक वीडियो शेयर करते हुए जानकारी साझा की. मैक्रों ने बताया कि “अटलांटिक महासागर में ‘टैगोर’ जहाज पर चढ़कर कमांडोज़ ने रोका. ये जहाज रूस से निकला था और प्रतिबंधित था.”
मैक्रों ने कहा, “इसे स्वीकार्य नहीं किया जा सकता, कि प्रतिबंधित जहाज तेल बेचकर रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में मदद करे.”
वहीं रूस ने फ्रांस के एक्शन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. क्रेमलिन फ्रांसीसी कार्रवाई को समुद्री डकैती करार दिया.
मैक्रों के कमांडो का एक्शन, रूसी जहाज को पकड़ा
ब्रिटेन के साथ मिलकर रूस के एक प्रतिबंधित तेल टैंकर ‘टैगोर’ को अटलांटिक महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कब्जे में लिया है. फ्रांसीसी नौसेना ने जहाज पर चढ़कर जांच की और पाया कि जहाज ने फर्जी झंडा लगाया था.
फ्रेंच प्रेसिडेंट मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो शेयर किया, जिसमें एक कमांडो हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे जहाज पर उतरता हुआ दिखाई दे रहा है. इसके अगले हिस्से में आधुनिक हथियार लिए हुए कमांडो जहाज पर कब्जा करते हुए दिख रहे हैं.
मैक्रों ने वीडियो के साथ लिखा, “यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करें, समुद्री कानून का उल्लंघन करें और उस युद्ध को वित्तीय मदद पहुंचाएं जो रुस पिछले चार वर्षों से यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहा है.”
मैक्रों ने लिखा, “यह ऑपरेशन अटलांटिक महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कई साझेदार देशों, जिनमें यूनाइटेड किंगडम भी शामिल है, सभी के सहयोग से समुद्री कानून का पूरी तरह पालन करते हुए चलाया गया.”
रूस के मरमांस्क से रवाना हुआ था जहाज: फ्रांसीसी नेवी
फ्रांस के नेवी के अधिकारियों के अनुसार यह टैंकर उत्तर-पश्चिमी रूस के मरमांस्क से रवाना हुआ था. इस जहाज पर फर्जी तरीके से कैमरून का एक झंडा लगा था, और ये जहाज पश्चिमी कैमरून के एक तटीय शहर लिम्बे की ओर बढ़ रहा था.
अटलांटिक समुद्री प्रीफेक्चर ने बयान में कहा कि “फ्रांसीसी नौसेना ने ब्रिटनी प्रायद्वीप के पश्चिम में 400 समुद्री मील से अधिक दूरी पर एक तेल टैंकर को रोका. यह जहाज रूस के मरमांस्क बंदरगाह से आ रहा था. इस ऑपरेशन का मकसद जहाज की राष्ट्रीयता की जांच करना था क्योंकि हमें शक था कि जहाज पर फर्जी झंडा लगा है. निरीक्षण दल के जहाज पर चढ़ने के बाद डॉक्यूमेंट्स की जांच में यह संदेह सही पाया गया कि जहाज ने फर्जी झंडा लगाकर गुमराह करने की कोशिश की थी.”
शैडो फ्लीट में कई बार झंडा बदला, कभी मेडागास्कर कभी कैमरून का फ्लैग: अधिकारी
अटलांटिक मैरीटाइम प्रिफेक्चर के प्रवक्ता गुइल्यूम ले रास्ले ने बताया कि यह टैंकर यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिबंधों के दायरे में था. यह एक ऐसा जहाज था जिसके बारे में जानकारी थी और जिस पर नजर रखी जा रही थी. यह टैंकर जिसका झंडा कई बार बदला है, बोर्डिंग के समय लगभग खाली था.
मैरिन ट्रैफिक ट्रैकर के अनुसार पिछली बार जब इसने एक हफ़्ता पहले ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम सिग्नल भेजा था, तब टैगोर नॉर्वे के तट के पास से गुजर रहा था तो उस पर मेडागास्कर का झंडा लगा हुआ था.
अधिकारियों के मुताबिक टैगोर टैंकप बाल्टिक सागर की तरफ जा रहा था और 29 मई को इसके वहां पहुंचने की उम्मीद थी. हालांकि, उसमें लदे तेल का डेस्टिनेशन तय नहीं था. आगे मिलने वाले आदेशों के आधार पर उसकी मंजिल तय की जानी थी. लेकिन फ्रांस ने जहाज को रोक लिया और रास्ता बदलकर दूसरी दिशा में जाने का आदेश दिया.
हाल के महीनों में फ्रांस ने ऐसे कई संदिग्ध ‘शैडो फ्लीट’ टैंकर रोके हैं. पश्चिमी देशों का आरोप है कि ये जहाज प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए रूसी तेल ले जा रहे हैं. फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम दोनों ने मिलकर यह फैसला किया है कि वो अपने जलक्षेत्र से गुजरने वाले रूस के प्रतिबंधित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े जहाजों को गुजरने नहीं देंगे.
फ्रांस-ब्रिटेन पर भड़का रूस, दी कड़ी प्रतिक्रिया
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने फ्रांस और ब्रिटेन की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि “रूस इस तरह की कार्रवाइयों को गैर-कानूनी मानता है. ये हरकतें समुद्री डकैती जैसी हैं.” “हम इस बात से बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं कि ये कार्रवाइयां इंटरनेशनल कानूनों का पूरी तरह से पालन करते हुए की जा रही हैं.”

