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आतंकवाद के खिलाफ भारत-चीन एकजुट, शी के सुझावों पर दिल्ली तैयार

चीन के तियानजिन में होने वाली एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग में द्विपक्षीय वार्ता हुई और कई मुद्दों पर सहमति बनी. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इस द्विपक्षीय वार्ता के बारे में बयान देते हुए बताया कि पीएम मोदी और शी के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई. आतंकवाद जैसे मुद्दों पर दोनों देश एकजुट हुए. सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमति बनी. वहीं शी जिनपिंग ने चार सुझाव दिए जिसे भारत से स्वीकार कर लिया है.

आपसी विश्वास बढ़ाना भारत और चीन का लक्ष्य: विक्रम मिसरी

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में मौजूद रहे विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने रविवार को कहा, “भारत-चीन ने साझा सोच को आगे बढ़ाने पर जोर दिया. आपसी विश्वास को बढ़ाना दोनों देशों का लक्ष्य है. बातचीत के दौरान यह सहमति भी बनी कि मतभेदों को विवाद में बदलने नहीं देना चाहिए. चुनौतियों से मिलकर निपटना चाहिए, दोनों नेता समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं.”

भारत-चीन प्रतिद्वंदी नहीं पार्टनर्स बनें, मित्रतापूर्ण संबंध लाभकारी होंगे: विक्रम मिसरी

विक्रम मिसरी ने बताया, कि “तियानजिन में मोदी-शी के बीच हुई मुलाकात एक वर्ष के अंदर ये दूसरी मुलाकात है. इससे पहले पिछले वर्ष रूस के कजान में दोनों में मुलाकात हुई थी. विक्रम मिसरी के मुताबिक, बैठक में दोनों नेताओं ने जोर दिया कि भारत और चीन अपने घरेलू विकास लक्ष्यों पर केंद्रित हैं और इस दिशा में वे प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं. दोनों नेताओं ने ये बात स्वीकार की, कि भारत-चीन में स्थिर और मित्रतापूर्ण संबंध न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि 2.8 अरब लोगों के जीवन के लिए भी फायदेमंद होंगे.”

जिनपिंग और पीएम मोदी की बातचीत में हुआ सीमा विवाद का मुद्दा: विक्रम मिसरी

विदेश सचिव ने बताया कि बातचीत के दौरान सीमा विवाद का मुद्दा भी सामने आया. प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि “सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता, दोनों देशों के संबंधों की प्रगति के लिए अनिवार्य है. दोनों नेताओं ने पिछले साल हुई सफल डिसएंगेजमेंट और सीमा पर शांति बनाए रखने के प्रयासों को सकारात्मक माना.”

विक्रम मिसरी के मुताबिक, “इस दौरान दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के न्यायसंगत और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान की प्रतिबद्धता जताई.” 

आतंकवाद के खिलाफ भारत को मिला चीन का साथ

प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया. विक्रम मिसरी ने कहा, “पीएम मोदी ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि यह एक ऐसा संकट है जिसके शिकार चीन और भारत दोनों रहे हैं, और भारत अभी भी इस समस्या से जूझ रहा है. इसलिए ये महत्वपूर्ण है कि हम एक दूसरे को समझ और समर्थन दें, क्योंकि हम दोनों सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करते हैं. भारत ने चीन से आतंकवाद पर समर्थन मांगा.” 

विक्रम मिसरी बोले कि “मैं वास्तव में ये कहना चाहूंगा की चीन की तरफ से इस मुद्दे को समझने और उससे मुकाबला करने पर सहयोग प्राप्त हुआ है. हमने चल रहे एससीओ शिखर सम्मेलन के संदर्भ में सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे से निपटा है.”

“भारत चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार संतुलन, जनसंपर्क, सीमा-पार नदियों पर सहयोग और आतंकवाद से संयुक्त लड़ाई जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनी.”

रिश्तों को मजबूत करने के लिए शी जिनपिंग ने दिए 04 सुझाव

विक्रम मिसरी ने बताया कि पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रिश्तों को मजबूत करने के लिए चार सुझाव दिए. प्रधानमंत्री मोदी ने इन सुझावों का स्वागत किया.

1. रणनीतिक संवाद और आपसी विश्वास बढ़ाना.

2. सहयोग और आदान-प्रदान का विस्तार करना.

3. एक-दूसरे की चिंताओं का सम्मान करना.

4. बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करना.

पीएम मोदी ने शी को दिया भारत आने का न्योता

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विक्रम मिसरी ने कहा कि “पीएम मोदी और जिनपिंग की बैठक में वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ, दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय मंच पर सहयोग बढ़ाने और विश्व व्यापार को स्थिर करने में भारत और चीन की बड़ी भूमिका को मान्यता दी. प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को 2026 में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया.”

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