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नेपाल को भारत की सौगात, 50 मिलिट्री व्हीकल्स किए भेंट

जेन जी आंदोलन के बाद पड़ोसी देश नेपाल में शांति बहाली और राजनीतिक स्थिरता कायम करने के बाद नेपाल आर्मी को भारतीय सेना से मिली है बड़ी सौगात. भारतीय सेना ने नेपाल आर्मी को 50 मिलिट्री व्हीकल्स सौंपे हैं. संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (यूएन पीसकीपिंग फोर्स) के बाद, ये पहली ऐसी बड़ी मिलिट्री गाड़ियों की खेप है, जो भारतीय सेना ने किसी दूसरे देश की आर्मी को सौंपी है.

भारतीय सेना ने नेपाल बॉर्डर पर नेपाली सेना को ये मिलिट्री यूटिलिटी व्हीकल्स सौंपे हैं. जल्द इन गाड़ियों को नेपाल में भारतीय उच्चायुक्त द्वारा काठमांडू में एक समारोह के दौरान नेपाली सेना को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किए जाएंगे.

भारतीय सेना ने इन गाड़ियों के हैंडओवर सेरेमनी की वीडियो को साझा करते हुए कहा कि “यह पहल नेपाली सेना की क्षमता-निर्माण प्रयासों को बढ़ाने के लिए भारतीय सेना की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है और दोनों सेनाओं के बीच साझा की गई मित्रता, विश्वास और घनिष्ठ सहयोग के स्थायी बंधन को रेखांकित करती है.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेबर-फर्स्ट नीति के तहत सैन्य और कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में भारतीय सेना के इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है

भारतीय सेना और नेपाल आर्मी के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. दोनों देशों के सेना प्रमुख एक दूसरे की आर्मी के हॉनरेरी चीफ भी होते हैं. यहां तक की नेपाली मूल के गोरखा नागरिक भी भारतीय सेना का हिस्सा हैं. भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट में बड़ी संख्या में नेपाली मूल के सैनिक हैं. लेकिन हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आई राजनीतिक दरार के चलते संबंधों में खटास भी देखने को मिली है.

वर्ष 2021 में भारतीय सेना में लागू की गई अग्निपथ स्कीम (अग्निवीर) का नेपाल ने विरोध किया है. ऐसे में नेपाल ने अपने नागरिकों की भारतीय सेना में भर्ती करने पर रोक लगा दी है. इसके अलावा, पूर्ववर्ती नेपाली सरकार द्वारा भारत और चीन के ट्राई-जंक्शन पर विवादित काला पानी और लिपूलेख (पिथौरागढ़, उत्तराखंड) को अपने देश के नक्शे में शामिल करने पर भी तकरार पैदा हो गई थ

हाल में एक लिटरेचर फेस्टविल में जनरल नरवणे से पुस्तक को रिलीज करने को लेकर सवाल किया गया था. पूर्व थलसेना प्रमुख ने ये कहकर सवाल टाल दिया कि, उन्होंने किताब का ड्राफ्ट लिखकर प्रकाशक को भेज दिया है. अब ये प्रकाशक और रक्षा मंत्रालय के बीच है कि पुस्तक को कब प्रकाशित किया जाए. जानकारी के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने किताब को थलसेना के समक्ष भेज दिया है. क्योंकि (मौजूदा) थलसेना प्रमुख (या फिर सीडीएस) इस किताब को लेकर आखिरी निर्णय कर सकते हैं. क्योंकि पुस्तक के बारे में उनके विभाग से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होनी जा रही है.

एलएसी पर डिएस्कलेशन और डि-इंडक्शन का इंतजार

अक्तूबर 2023 में पुस्तक को रोकने का एक बड़ा कारण ये भी था कि उस दौरान, चीन से पूर्वी लद्दाख में चल रहा विवाद जारी था. पूरे एक वर्ष बाद यानी अक्तूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख का सीमा विवाद लगभग खत्म हुआ था. 22 अक्टूबर 2024 को भारत और चीन के बीच डिसएंगेजमेंट समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत, दोनों देशों की सेनाएं, विवादित इलाकों से पीछे हट गई थी. हालांकि, अभी भी दोनों देशों की सैनिकों की संख्या में कोई भारी कमी नहीं आई है. डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया के बाद पूर्वी लद्दाख में चीन से सटी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर डिएस्कलेशन और डि-इंडक्शन अभी बाकी है. ऐसे में ये कहना जल्दबाजी होगा कि भारत और चीन के संबंध एलएसी पर पूरी तरह सामान्य हो गए हैं.

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