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सेना ने शामिल किए एंटी-टैंक FPV ड्रोन, पलक झपकते ही कर देंगे तबाह

रूस-यूक्रेन युद्ध में एफपीवी ड्रोन के जबरदस्त इस्तेमाल के बाद अब भारतीय सेना ने भी पहली बार एंटी-टैंक ‘कामेकाजी’ ड्रोन का सफल परीक्षण किया है. खास बात ये है कि इस ‘फर्स्ट पर्सन व्यू’ (एफपीवी) ड्रोन को सेना के ही एक सेवारत सैन्य अधिकारी, मेजर सेफस चेतन ने डीआरडीओ की एक लैब के साथ मिलकर तैयार किया है.

करीब 1.40 लाख की कीमत वाले ऐसे पांच (05) ड्रोन सेना की पश्चिमी कमान स्थित पठानकोट की एक ब्रिगेड ने खरीदे हैं. माना जा रहा है कि 95 और ऐसे ड्रोन खरीदे जाने की तैयारी है.

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) की चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल एंड बैलिस्टिक रिसर्च लिमिटेड (टीबीआरएल) की एक टीम ने मेजर सेफस चेतन के इस ड्रोन का बनाने में मदद की है. टीबीआरएल की इस टीम का नेतृत्व डॉ. राघवेंद्र ने किया है. पठानकोट के जनरल एरिया में ही पहली बार इस कामेकाजी ड्रोन का सफल परीक्षण किया गया है.

जानकारी के मुताबिक, ये एफपीबी ड्रोन करीब 400 ग्राम का पेलोड ले जाने में सक्षम है. ऐसे में इस ड्रोन में किसी भी 400 ग्राम के गोला-बारूद को लेकर दुश्मन के टैंक या फिर मिलिट्री व्हीकल में ले जाकर मारा जा सकता है. (https://x.com/neeraj_rajput/status/1905582217897599306)

रूस-यूक्रेन जंग में एफपीवी ड्रोन ने फैलाया खौफ

रूस-यूक्रेन युद्ध में इन एफपीवी ड्रोन का जमकर इस्तेमाल हुआ है. यूक्रेन की सेना ने हजारों की तादाद में ऐसे एफपीबी ड्रोन के जरिए रूस के टैंक, आईसीवी (इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल) और मिलिट्री ट्रक को तबाह किया है. साथ ही रूस के सैनिकों को भी चुन-चुनकर इन एफपीवी ड्रोन के जरिए अटैक किया गया. (https://x.com/SMO_VZ/status/1903645952130318701)

इन एफपीवी ड्रोन के अटैक का रूसी सेना और सैनिकों में इस कदर खौफ था कि रूसी टैंकों को खुद को बचाने के लिए लोहे की जालीदार सीलिंग लगानी पड़ी. कुछ टैंक तो डर के मारे अपने ऊपर झोपड़ी नुमा ढांचा लेकर जंग के मैदान में उतरने लगे. (https://x.com/ug_chelsea/status/1872577184566845798)

वर्ष 2020 में गलवान घाटी की झड़प के दौरान भी पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन ने एक दूसरे के खिलाफ टैंक और आईसीवी तैनात की थी. यही वजह है कि एंटी-टैंक ड्रोन को बनाने में भारतीय सेना तत्परता से जुटी है.

अशोक लीलैंड से 700 करोड़ की स्पेशलाइज्ड व्हीकल्स का करार

भारतीय सेना की लॉजिस्टिक के लिए रक्षा मंत्रालय ने हिंदुजा ग्रुप की अशोक लीलैंड से 700 करोड़ का करार किया है. इस करार के तहत सेना को अशोक लीलैंड से कई तरह के स्पेशलाइज्ड व्हीकल सप्लाई की जाएगी. इनमें स्टैलियन 44, स्टैलियन 66, शॉर्ट चैसिस बस और मोबिलिटी सिस्टम ट्रैवलिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं.

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