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हिंद महासागर में नौसेना का अश्वमेध यज्ञ, साथ में होंगी नौ देशों की नौसेनाएं

हिंद महासागर के ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ और ‘सिक्योरिटी पार्टनर’ के तौर पर पहचान बनाने वाली भारतीय नौसेना अब हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में एक खास अश्वमेध यज्ञ की तैयारी कर रही है. इसके लिए नौसेना का एक जंगी जहाज, अश्वमेध रथ के तौर पर आईओआर के आधा दर्जन देशों के बंदरगाह की यात्रा करने जा रहा है. लेकिन ये जंगी जहाज, किसी के पोर्ट या फिर जमीन पर कब्जा करने के लिए नहीं बल्कि आईओआर के मित्र-देशों का दिल जीतने के लिए इस लंबी यात्रा पर निकल रहा है.

नौसेना का आईओएस-सागर मिशन

भारतीय नौसेना के डिप्टी चीफ, वाइस एडमिरल तरुण सोबती के मुताबिक, 5 अप्रैल को आईएनएस सुनयना युद्धपोत कर्नाटक के कारवार बंदरगाह से 8 मई तक दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र के अफ्रीकी देशों की यात्रा पर जाएगा. खास बात ये है कि इस दौरान, आईएनएस सुनयना पर भारतीय क्रू के साथ-साथ नौ (09) आईओआर देशों के नौसैनिक भी तैनात रहेंगे.

आईएनएस सुनयना, भारतीय नौसेना का एक स्वदेशी ऑफशोर पैट्रोल वैसल है.

भारतीय नौसेना ने इस समुद्री-यात्रा को इंडियन ओसियन शिप यानी ‘आईओएस-सागर’ नाम दिया है. इस दौरान, कोमोरोस, केन्या, मेडागास्कर, मालदीव, मॉरीशस, मोजाम्बिक, सेशेल्स, श्रीलंका और साउथ अफ्रीका जैसे नौ मित्र-देशों का साझा क्रू, आईएनएस सुनयना पर तैनात रहेगा. कुल 44 सदस्य का मल्टीनेशनल क्रू आईएनएस सुनयना पर तैनात रहेगा.

आईएनएस सुनयना युद्धपोत करेगा आईओआर क्षेत्र के देशों की यात्रा

इंडियन नेवी के मुताबिक, कारवार से आईएनएस सुनयना जहाज तंजानिया की राजधानी दार-एस-सलाम जाएगा. दार-अस-सलाम से नकाला (मोजाम्बिक), पोर्ट लुइस (मॉरीशस), पोर्ट विक्टोरिया (सेशेल्स) और माले (मालदीव) होते हुए कोच्चि लौटेगा.

5 अप्रैल को आईएनएस सुनयना को फ्लैग ऑफ करने के लिए खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कारवार में मौजूद रहेंगे. साथ ही नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी उपस्थित रहेंगे.

वाइस एडमिरल सोबती के मुताबिक, आईओएस सागर का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र-देशों के साथ मेरीटाइम सुरक्षा को सुनिश्चित करना है. ऐसे में आईएनएस सुनयना जिस किसी भी देश के बंदरगाह पहुंचेगा, उस देश के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (ईईजेड) की निगरानी भी रखेगा.

पीएम मोदी की सागर नीति बदली महासागर में

सोमवार को आईओएस-सागर की कर्टन रेजर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वाइस एडमिरल सोबती ने बताया कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सागर यानी सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन पॉलिसी के एक दशक पूरा होने के बाद अब भारतीय नौसेना महासागर यानी म्यूचुअल एंड हॉलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी अक्रॉस द रीजन नीति में तब्दील हो गई है.” ऐसे में आईओएस-सागर के साथ-साथ अफ्रीकी देशों के साथ ‘ऐकेमी’ (संस्कृत अर्थ एकता) यानी अफ्रीका इंडिया की मेरीटाइम इंगेजमेंट (एआईकेईवाईएमई) नाम की समुद्री-एक्सरसाइज भी करने जा रही है.

आईओएस-सागर यात्रा के लिए मित्र-देशों के नौसैनिक, भारतीय नौसेना के कोच्चि नेवल बेस पर दो सप्ताह का प्रशिक्षण लेंगे. इस ट्रेनिंग के दौरान समुद्र में प्रशिक्षण भी शामिल है. आईओएस सागर के प्रतिभागियों को तंजानिया के दार-एस-सलाम में अभ्यास एआईकेईवाईएमई के बंदरगाह चरण की गतिविधियों को देखने की भी योजना है.