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थिएटर कमांड का पहला कदम! Joint वॉर-रूम, ट्राइ सर्विस AEC और 03 साझा मिलिट्री स्टेशन

देश में साझा थिएटर कमांड बनाने से पहले सेना के तीनों अंगों यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना के एक ज्वाइंट वॉर रूम बनाने की कवायद शुरु हो गई है. इसे ज्वाइंट ऑपरेशन्स कमांड सेंटर का नाम दिया जाएगा. कोलकाता में तीन दिवसीय कम्बाइंड कमांडर्स कान्फ्रेंस (15-17 सितंबर) के दौरान इस ज्वाइंट कमांड सेंटर का खाका पीएम मोदी के सामने रखा गया.

इसके अलावा, सेना के तीनों अंग, अलग-अलग एजुकेशन कोर को एक ट्राइ सर्विस एजुकेशन कोर बनाने के लिए तैयार हो गए हैं. साथ ही देश में तीन एकीकृत मिलिट्री स्टेशन बनाने के लिए भी तैयार हो गए हैं.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान थलसेना के वॉर रूम में मौजूद थे तीनों सर्विस चीफ

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 6-7 मई की रात को जब पाकिस्तान पर हमला किया गया था, तब तीनों सेना प्रमुख, थलसेना के वॉर रूम में मौजूद थे. क्योंकि सेना के तीनों अंगों के अलग-अलग वॉर रूम हैं. जबकि ऑपरेशन सिंदूर में थलसेना और वायुसेना ने मिलकर पाकिस्तान में आतंकी कैंप पर हमला किया था. ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) हेडक्वार्टर के अंतर्गत, एक साझा वॉर रुम तैयार किया जाएगा, जिसे ऑपरेशन सिंदूर जैसे खास मिशन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

पीएम मोदी का सपना है देश में साझा थिएटर कमांड

सोमवार को देश के शीर्ष मिलिट्री कमांडर्स के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने तीनों सेनाओं के साझा ऑपरेशन्स और एकीकरण पर जोर दिया था. पीएम मोदी देश में लगातार साझा थिएटर कमांड बनाने पर जोर दे रहे हैं. थलसेना और नौसेना इसके लिए तैयार हैं, लेकिन वायुसेना की तरफ से मंजूरी मिलने बाकी है. हाल ही में वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने थिएटर कमांड से पहले आईडीएस के तहत एक साझा ऑपरेशन्स कमांड सेंटर बनाने की वकालत की थी.

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) मुख्यालय के अधीन बनेगा ज्वाइंट ऑपरेशन्स कमांड सेंटर

वायुसेना प्रमुख के जोर देने के बाद आईडीएस मुख्यालय ने इस साझा ऑपरेशन्स सेंटर पर काम करना शुरु कर दिया है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, तीन दिवसीय मिलिट्री कॉन्फ्रेंस की शुरुआत उच्च-प्रभाव प्रदर्शन वाले संयुक्त ऑपरेशन कमांड सेंटर के साथ-साथ लाइव एयर डिफेंस डेमो के साथ हुई जिसमें एयर सर्विलांस की क्षमताएं दिखाई गई. इसके अलावा मिसाइल डिफेंस और काउंटर ड्रोन ऑपरेशन्स भी सम्मेलन का हिस्सा थे.

सम्मेलन में पीएम मोदी के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोवल, सीडीएस जनरल अनिल चौहान और सेना के तीनों प्रमुखों सहित टॉप मिलिट्री कमांडर्स मौजूद थे. दो वर्ष में एक बार होने वाले देश की सुरक्षा से जुड़े सैन्य और असैन्य नेतृत्व वाले इस सम्मेलन का इस बार का थीम था, सुधारों का वर्ष, ट्रांसफोर्मिंग फॉर फ्यूचर. सम्मेलन में सशस्त्र सेनाओं का भावी रोडमैप, ज्वाइंटनेस का बढ़ावा देना, सैन्य क्षमताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालना है.

कंबाइड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने दिया जय (जेएआई) का मंत्र

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में सेनाओं को ‘जय’ (जेएआई) का विजय मंत्र दिया था, यानी ज्वाइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन (नवाचार). कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन, रक्षा मंत्री ने सेनाओं को “युद्ध की पारंपरिक अवधारणाओं से आगे बढ़ें और गैर पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया.”

राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों से युद्ध की पारंपरिक अवधारणाओं से आगे बढ़कर सूचना, वैचारिक, पर्यावरणीय और जैविक युद्ध जैसे गैर पारंपरिक खतरों से उत्पन्न छिपी चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क और तैयार रहने का आह्वान किया है. सम्मेलन के दूसरे दिन इंफॉर्मेशन वॉरफेयर पर चर्चा हुई तो ज्वाइंट मिलिट्री स्पेस (अंतरिक्ष) डॉक्ट्रिन को रिलीज किया गया.

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