मिडिल-ईस्ट में जंग के रोज नए-नए मोर्चे खुल रहे हैं. होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान जंग जारी है.. लेबनान में हिजबुल्लाह लड़ाकों के खिलाफ इजरायल के ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. यूक्रेन ने कैस्पियन सी में ईरान के जहाज पर हमला बोलकर, दोनों जंग यानी रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान को मिलाने की साजिश रच डाली है. अब खाड़ी यlमें सऊदी अरब और ईरान सर्मिथत हूती विद्रोहियों के बीच एक नया मोर्चा खुल गया है, जो पिछले एक हफ्ते से एक दूसरे पर अटैक कर रहे हैं.
अमेरिका-ईरान जंग के बीच, सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले यमन के बंदरगाह, अल-होदेदाह पर बड़ी एयर-स्ट्राइक की है. सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने ये हवाई हमला किया था. जवाबी कार्रवाई करते हुए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिम में यांबू बंदरगाह, जिज़ान इंडस्ट्रियल सिटी और डामाद में मिसाइल स्ट्राइक कर दी. जिज़ान में सऊदी की एक ऑयल रिफाइनरी पर हूती विद्रोहियों ने अटैक किया. इसके बाद हूती विद्रोहियों ने लाल सागर और खास तौर से बॉब अल मंडेब में सऊदी अरब के जहाजों के लिए नेवल ब्लॉकेड का ऐलान कर दिया.
अमेरिका-ईरान जंग में छिपा सऊदी-हूती मोर्चे का कारण
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या इस जंग का कारण भी अमेरिका-ईरान युद्ध है. तो जवाब है बिल्कुल. हालांकि, सऊदी और हूती विद्रोहियों के बीच अदावत पुरानी है, लेकिन मौजूदा जंग तब शुरू हुई जब ईरान के सुप्रीम लीडर अली अयातुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद हूती विद्रोहियों का एक विमान ईरान से यमन की राजधानी सना लैंड करने जा रहा था. उसी दौरान, एयरपोर्ट पर जबरदस्त बमबारी शुरू हो गई.
हूती विद्रोहियों और ईरान का आरोप था कि ये बमबारी सऊदी अरब ने की है. जानकारी के मुताबिक, ईरान की महान एयरलाइंस का ये विमान, हूती विद्रोहियों के टॉप कमांडर और पॉलिटिकल विंग के नेताओं के साथ-साथ ईरान की कुख्यात IRGC के चुनिंदा कमांडरों के साथ यमन पहुंच रहा था. सऊदी किसी कीमत पर नहीं चाहता था कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के कमांडर यमन में लैंड कर पाएं. हालांकि, इस प्लेन ने बाद में पश्चिमी यमन के एक दूसरे एयरपोर्ट अल-होदेदहा पर लैंड कर लिया, लेकिन वहीं से जंग शुरू हो गई. क्योंकि हूती विद्रोहियों ने सऊदी के खिलाफ हमले शुरु कर दिए.
हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी एक बंदरगाह पर हमला किया और एक सऊदी ऑयल टैंकर पर अटैक कर दिया, जिससे ये जहाज जलकर भस्म हो गया.
यमन क्यों जाना चाहते थे आईआरजीसी कमांडर
अब सवाल ये खड़ा होता है कि आईआरजीसी के कमांडर यमन क्यों जा रहे थे. इसके पीछे जवाब है अमेरिका. पिछले पांच महीने से अमेरिका और ईरान के बीच घमासान चल रहा है, जिसे पूरी दुनिया में तेल संकट छाया हुआ है. ईरान ने दरअसल, धमकी दी थी कि अगर अमेरिका ने ईरान के सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर यानी तेल के कुओं या रिफाइनरी पर अटैक किया, या खर्ग आईलैंड पर कब्जा करने की कोशिश की तो, होर्मुज स्ट्रेट के बाद बॉब अल मंडेब को भी पूरी दुनिया के लिए बंद कर दिया जाएगा.
बॉब अल मंडेब रूलाएगा खून के आंसू
बॉब अल मंडेब, होर्मुज की तरह एक बेहद संकरा स्ट्रेट यानी जलडमरुमध्य है, जो पूरे अरब सागर को रेड सी और स्वेज कैनाल के जरिए भूमध्य-सागर और यूरोप से जोड़ता है. यानी ईरान, होर्मुज की कॉपी रेड सी में करने की प्लानिंग कर रहा है. इसे वो यमन के हूती विद्रोहियों के जरिए अंजाम देना चाहती है. ऐसे में आईआरजीसी के कमांडर, हूती विद्रोहियों को ट्रेनिंग देने या फिर होर्मुज स्ट्रेट की तरह बॉब अल मंडेब और अदन की खाड़ी में अमेरिका और अमेरिका के मित्र-देशों के ऑयल टैंकर्स और कमर्शियल जहाजों पर ड्रोन अटैक के लिए यमन पहुंच रहे थे.
सऊदी और हूती विद्रोहियों की अदावत की असल कहानी
अब सभी के जेहन में ये सवाल कौंध रहा है कि आखिर यमन की सरकार और सेना, हूती विद्रोहियों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है. और दूसरा ये कि सऊदी और हूती विद्रोहियों में दुश्मनी क्यों है.
इसके पीछे दरअसल, शिया और सुन्नी मुस्लिमों की सदियों पुरानी दुश्मनी है. यमन में कभी सुन्नी मुस्लिमों का शासन था. लेकिन 90 के दशक में शिया बहुल हूती संगठन का जन्म हुआ, जिसे यमन में अंसर-अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है. इसे ईरान, जो खुद एक शिया बहुल देश है, उसका समर्थन था. हूती भी ईरान के ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ का हिस्सा है. गाजा (फिलिस्तीन) के हमास और लेबनान के हिजबुल्लाह के साथ हूती भी ईरान समर्थित मिलिशिया है, जिसे सुन्नी देशों के खिलाफ खड़ा किया गया है.
यमन में सुन्नी शासन को हटाकर शिया मुस्लिमों का राज कायम किया जाए. इसमें बहुत हद तक ईरान और हूती विद्रोही कामयाब भी हो गए हैं. वर्ष 2015 में शुरु हुए गृह युद्ध के बाद से हूती विद्रोहियों ने पश्चिमी यमन के एक बड़े क्षेत्र पर अपना कब्जा कर लिया है. इसमें राजधानी सना, अल होदेदाह जैसा बंदरगाह भी शामिल है. यमन की सरकार पूर्वी इलाके में सिमट कर रह गई है.
सऊदी की रेजिस्टेंस फोर्स भी हूती को बांधने में रही नाकाम
यमन की सरकार की मदद के लिए सऊदी अरब ने खाड़ी देशों के बाकी देश जैसे, यूएई, कतर बहरीन इत्यादि के साथ मिलकर एक रेजिस्टेंस फोर्स का गठन किया है. लेकिन ये फोर्स भी हूती विद्रोहियों के वर्चस्व पर लगाम कसने में नाकाम साबित हुई है. यही वजह है कि 2024 में जब इजरायल-हमास जंग शुरु हुई थी, इन हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में इजरायल सहित अमेरिका और दूसरे देशों के जहाज पर ड्रोन स्ट्राइकर कर नाक में दम कर दिया था.
यूएस नेवी ने किसी तरह हूती विद्रोहियों के पर अटैक कर रोक लगाई थी. लेकिन एक बार फिर ईरान के समर्थन से हूती विद्रोही, लाल सागर में अपनी ताकत दिखाने को बेकरार हैं. ऐसे में बड़ा सवाल, क्या अमेरिका और सऊदी मिलकर हूती विद्रोहियों को रोक पाएंगे. क्योंकि अगर लाल सागर भी होर्मुज बना तो वाकई पूरी दुनिया को एक बड़े तेल संकट और आर्थिक नुकसान से गुजरना पड़ेगा. अगर होर्मुज और लाल सागर, दोनों ऑयल टैंकर्स और कमर्शियल जहाजों की आवाजाही के लिए बंद हो जाएंगे.

