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सेना का कैपिटल बजट पूरा खर्च, पहली बार खरीदे इतने बड़ी मात्रा में हथियार

हाल के सालों में पहली बार रक्षा मंत्रालय ने अपना पूरा कैपिटल बजट का इस्तेमाल सेना के हथियारों और दूसरे सैन्य साजो सामान खरीदने में खर्च किया है. इस साल (2024-25 में) कैपिटल बजट का शून्य फंड रक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को सरेंडर किया है. समय से सैन्य उपकरण न खरीदने के चलते हर साल रक्षा मंत्रालय का कैपिटल बजट बच जाता था.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शून्य फंड सरेंडर करना देश की रक्षा तैयारियों में एक मील का पत्थर साबित हुआ है. ये दर्शाता है कि देश का रक्षा बजट सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण और ऑपरेशन्ल तैयारियों तथा सेना के तीनों अंगों को मजबूत करने में खर्च हो रहा है.

1.72 लाख करोड़ था इस साल कैपिटल बजट

बीते वर्ष (2024-25) में देश का कैपिटल बजट 1.72 लाख करोड़ था. इसमे से 75 प्रतिशत यानी 1.05 लाख करोड़ स्वदेशी हथियारों में खर्च हुए हैं और बाकी हथियारों के आयात में. इस वर्ष (2025-26) में पूंजीगत खर्च (कैपिटल बजट) के लिए सरकार ने 1.80 लाख करोड़, रक्षा मंत्रालय को आवंटित किए हैं.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, स्वदेशी हथियारों के उत्पादन पर जोर और आयात पर कम निर्भर करने के चलते ही पूरा कैपिटल बजट खर्च हो चुका है. इससे रक्षा आत्मनिर्भरता बढ़ी है और सैन्य क्षमताओं में इजाफा हुआ है.

एक समय दुनिया के सबसे बड़े हथियारों के आयातक देश माने जाने वाला भारत अब 65 प्रतिशत तक अपनी रक्षा जरूरतों का सामान खुद तैयार करता है. रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल (2024-25 में) देश का रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया है.

साथ ही बीते वर्ष रक्षा सौदा का कुल आंकड़ा 193 पहुंच गया है. इन करारों और सौदों की कुल कीमत दो लाख करोड़ के पार पहुंच गई है.

फाइटर जेट से लेकर टैंक और तोप, हेलीकॉप्टर से लेकर एयरक्राफ्ट कैरियर तक बनते हैं देश में

देश में रक्षा उत्पादन को गति देने में स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) प्रोजेक्ट, सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, एलसीएच प्रचंड और एलयूएच हेलीकॉप्टर, मैन बैटल टैंक (एमबीटी) अर्जुन, आकाश मिसाइल सिस्टम, पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, अटैग्स तोप, स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बी, विक्रांत एयरक्राफ्ट कैरियर सहित दर्जनों जंगी जहाज शामिल हैं.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट की सुरक्षा कमेटी (सीसीएस) ने थलसेना के लिए 307 एडवांस टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) यानी अटैग्स तोप को खरीदने की मंजूरी दी थी. करीब सात हजार (7000) करोड़ की इस खरीद में 307 तोपों के अलावा 327 हाई मोबिलिटी टोइंग व्हीकल शामिल हैं.

प्राईवेट सेक्टर की हथियार और सैन्य साजो सामान बनाने में 21 प्रतिशत की भागीदारी

डीआरडीओ द्वारा तैयार की गई अटैग्स तोपों को टाटा एडवांस और भारत फोर्ज नाम की प्राईवेट कंपनियां, सेना के लिए निर्माण करेंगी. थलसेना, इन 307 अटैग्स तोपों से 15 आर्टिलरी रेजीमेंट का गठन करने की तैयारी कर रही है.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, देश के रक्षा उत्पादन में इस वक्त 21 प्रतिशत निजी क्षेत्र (प्राईवेट सेक्टर) की भागीदारी है. इस समय देश में 430 प्राइवेट कंपनियां हैं जिन्हें रक्षा मंत्रालय ने गोला-बारूद से लेकर तोप और एयरक्राफ्ट बनाने का लाइसेंस दिया है. साथ ही देश के डिफेंस इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करती हैं 16 डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट (पीएसयू).

माना जा रहा है कि वर्ष 2029 तक भारत में रक्षा उत्पादन करीब तीन लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा.

अभी भी दुनिया में हथियारों के निर्यात में है दूसरा स्थान: सिपरी

ग्लोबल थिंकटैंक इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी)  के मुताबिक, भारत इसलिए हथियारों का आयात ज्यादा करता है क्योंकि दो-दो पड़ोसी देश (चीन और पाकिस्तान) से तनातनी है.


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