ईरान में सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार के भव्य कार्यक्रम के बीच अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से भयंकर सैन्य टकराव हुआ है. अमेरिका ने ईरान के तकरीबन 80 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो शेयर करके अमेरिका की ताकत दिखाई. वीडियो में कुछ ही सेकंड में कई धमाके होते दिखाई दिए.
ये कार्रवाई ईरान के बंदर अब्बास से लेकर जास्क आईलैंड और होर्मुजगान प्रांत तक हुई है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड सेंटकॉम ने हमले की पुष्टि करते हुए, इस हमले को ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई बताया है. अमेरिका का आरोप है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई.
अमेरिकी सेना के मुताबिक, हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार स्टेशनों, एंटी-शिप मिसाइल क्षमताओं और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास संचालित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की 60 से अधिक छोटी नौकाओं को निशाना बनाया गया.
अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों को उड़ाया
अमेरिका और ईरान के बीच हमलों का नया दौर शुरु हुआ है. अमेरिका ने ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर सटीक हमले करने का दावा किया है. बाकायदा एक वीडियो भी शेयर किया गया है जिसमें अमेरिकी सेना, ईरान के ठिकानों को बम गिराती दिखाई दी. और धमाकों से पूरा इलाका दहल गया.
अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले एम/टी अल रेकय्यात, सऊदी अरब के झंडे वाले एम/टी वेड्यान और लाइबेरिया के झंडे वाले एम/टी साइप्रस प्रॉस्पेरिटी पर हमला किया था.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, “अमेरिकी हमले 7 जुलाई को किए गए और इन्हें ‘होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों के तत्काल जवाब’ के तौर पर अंजाम दिया गया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने 7 जुलाई को ईरान के खिलाफ नए आक्रामक हमले पूरे किए. इस अभियान में सटीक हथियारों की मदद से 80 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया.”
सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा, कि “उनकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर सटीक हमला किया है. इस अभियान का उद्देश्य ईरान की अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों पर आगे हमले करने की क्षमता को कमजोर करना था.”
सेंटकॉम ने इन हमलों को युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए कहा, “ईरानी बलों की यह अनुचित आक्रामकता युद्धविराम का स्पष्ट और खतरनाक उल्लंघन है और इससे समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता प्रभावित होती है. यदि समझौते का पालन नहीं किया गया तो सेंटकॉम की सेनाएं ईरान को जवाबदेह ठहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.”
ईरान तेल बिक्री की अनुमति भी खत्म: अमेरिका
युद्धविराम के बाद अमेरिका का ताजा एक्शन बहुत बड़ा बताया जा रहा है. अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, “इस बार ईरान पर किया गया हमला दस दिन पहले हुए हमलों की तुलना में ‘चार से पांच गुना अधिक बड़ा और ज्यादा शक्तिशाली’ है. यह सैन्य अभियान कई घंटे और जारी रह सकता है तथा अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद यह अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई है.”
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, “यह अभियान ‘सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं बल्कि सजा देने के उद्देश्य से’ चलाया जा रहा है. यह सजा है और यह अभी खत्म नहीं होने वाला.”
सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अमेरिका ने वह सामान्य लाइसेंस भी रद्द कर दिया है, जिसके तहत ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई थी. अमेरिका ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की गतिविधियां ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ हैं और इनके गंभीर परिणाम होंगे.
वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को अमेरिकी फैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि “ईरानी तेल बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध हटाने का निर्णय वापस लेना 18 जून को हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुच्छेद-10 का स्पष्ट उल्लंघन है.”
हमारी कड़ी चेतावनियों को नजरअंदाज करना महंगा पड़ेगा: ईरान
कतर के तेल टैंकर अल रेक्य्यात को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह अमेरिकी नौसेना के समर्थन के साथ ओमानी मार्ग से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश कर रहा था और उसने ईरान की कई चेतावनियों को नजरअंदाज किया. आईआरजीसी ने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि “अमेरिका के हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पहले जैसी नहीं रहेगी. जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को केवल उन्हीं मार्गों का इस्तेमाल करना होगा जिन्हें ईरान ने निर्धारित किया है, अन्यथा उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती.”
दरअसल एलएनजीसी अल रेकय्यात नाम का विशाल एलएनजी जहाज कतर के रास लफ्फान बंदरगाह से गुजरात के दहेज के लिए रवाना हुआ था. 7 जुलाई को अरब सागर और ओमान की खाड़ी के मिलन बिंदु के पास ट्रांजिट के दौरान जहाज पर संदिग्ध ड्रोन से हमला किया गया. हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई, जिससे काफी देर तक घना धुआं उठता रहा. हालांकि आग पर काबू पा लिया गया.
इस जहाज पर कुल 29 चालक दल के सदस्य सवार हैं, जिनमें चार भारतीय नाविक भी शामिल हैं. गनीमत ये रही कि इस हमले में सभी क्रू मेंबर पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है.

