वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते के तहत ईरान को 300 अरब डॉलर की पुनर्निमाण और आर्थिक विकास पैकेज की योजना बनाई है. लेकिन ईरान की जबरदस्त मार झेल चुके खाड़ी देशों में ये चिंता है कि अमेरिका के इन्हीं पैसों से तेहरान अपनी सैन्य क्षमताएं बढ़ाकर पड़ोसी देशों को आंख दिखाएगा.
इन्हीं आशंकाओं और चिंताओं को दूर करने के लिए खाड़ी देशों के दौरे पर हैं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो. रुबियो ने गल्फ देशों से उनके हितों की रक्षा करने का वादा किया है.
अमेरिका-ईरान के युद्ध के दौरान तेहरान ने इन खाड़ी देशों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया था. साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद होने के कारण तेल और गैस की आपूर्ति भी इस क्षेत्र में रुकने से आर्थिक तौर पर भी नुकसान हुआ था.
अब जब अमेरिका-ईरान के बीच एमओयू पर सहमति बन चुकी है तो मार्को रुबियो ने कुवैत पहुंच कर खाड़ी देशों में आत्मविश्वास जगाने की कोशिश की है और उनके साथ खड़े रखने की बात कही है.
गल्फ देशों को चिंता करने की जरूरत नहीं, हम आपके साथ: मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, कि “वाशिंगटन अपने खाड़ी सहयोगियों के हितों को सुरक्षित रखेगा. यह बातचीत पश्चिम एशिया में संघर्ष के स्थायी समाधान को लेकर ईरान के साथ की जा रही है.”
कुवैत सिटी की यात्रा के दौरान मार्को रुबियो ने कहा कि “अमेरिका और खाड़ी देश इस पूरे मुद्दे पर एक ही विचार के साथ आगे बढ़ रहे हैं. अमेरिका और खाड़ी देश ईरान के साथ स्थायी समाधान को लेकर एक ही दिशा में काम करेंगे.”
मार्को रुबियो यूएई, कुवैत और बहरीन की यात्रा पर हैं. कुवैत से पहले यूएई में भी रुबियो ने यही भरोसा दिया. कहा, “अमेरिका, खाड़ी देशों की सुरक्षा को खतरे में नहीं डालेगा.”
रुबियो ने कहा कि उनकी खाड़ी यात्रा का मकसद केवल अमेरिका का पक्ष रखना नहीं, बल्कि खाड़ी देशों की चिंताओं को समझना भी है. रुबियो ने कहा, “हम यहां ज्यादा सुनने आए हैं. अमेरिका चाहता है कि ईरान के साथ आगे होने वाली किसी भी प्रक्रिया में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों की सुरक्षा और आर्थिक चिंताओं को शामिल किया जाए.”
मार्को रुबियो की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका ईरान के साथ तनाव कम करने और क्षेत्र में स्थिरता की कोशिशों में जुटा है. रुबियो ने कहा कि “पश्चिम एशिया में स्थायी शांति तभी संभव है, जब ईरान समर्थित समूह मिसाइल और ड्रोन हमले बंद करें.”
होर्मुज को लेकर यूएई में मार्को रुबियो ने क्या बात की
मार्को रुबियो ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने ईरान-अमेरिका समझौते, होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की.
रुबियो और यूएई के राष्ट्रपति के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही को लेकर विस्तार से चर्चा हुई है. इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने माना कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए होर्मुज समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है. वहीं अमेरिका ने यूएई से वादा किया कि “वह इस क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करता रहेगा.”
रक्षा के बदले मुआवजा, किस आशंका में हैं खाड़ी देश
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में एक अहम मुद्दा है मुआवजे का. ईरान ने अपने देश में हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है. जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने संभावित समझौते के तहत ईरान को 300 अरब डॉलर देने की योजना बनाई है. एमओयू के अनुसार, वॉशिंगटन ने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की एक निश्चित और मिलकर योजना बनाने पर सहमति जताई है.
लेकिन खाड़ी देशों को लग रहा है कि इतना बड़ा फंड मिलने से तेहरान को महीनों के संघर्ष के बाद न केवल खुद को दोबारा खड़ा करने में मदद मिलेगी, बल्कि वो अपनी सैन्य ताकत बढ़ा लेगा.
खाड़ी देशों को इस बात का डर सता रहा है कि अमेरिका, ईरान को दिए जाने वाले का मुआवजा खाड़ी देशों से वसूल कर सकता है. खाड़ी देशों ने अभी तक आधिकारिक रूप से ये साफ नहीं किया है कि क्या वो ईरान के विकास की योजना के लिए वित्तीय मदद देने के लिए तैयार हैं या नहीं.
एक्सपर्ट मान रहे हैं कि मार्को रुबियो का ये दौरा इस नजरिए से भी अहम है, ताकि वो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत की तरह खाड़ी देशों को उनका फरमान सुना सकें.
ईरान के टारगेट पर खाड़ी देश क्यों?
28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की और उनके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई समेत सभी शीर्ष सैन्य अधिकारियों को मार दिया तो शायद ही किसी ने उम्मीद की थी कि तेहरान, वो कर देगा, जो नामुमकिन था.
अमेरिकी हमले के कुछ ही घंटों में ईरान ने अपनी सैन्य ताकत दिखाते हुए अपने प्रॉक्सी संगठनों के साथ मिलकर कई खाड़ी देशों में हमला बोल दिया. बहरीन, कुवैत, इराक, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन पर एयरस्ट्राइक कर दी. हालांकि ईरान ने इन सभी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर टारगेट किया.
ईरान के इन हमलों से खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया. आईआरजीसी ने ये भी चेतावनी दी कि पड़ोसी देशों को ईरान का सहयोग करना चाहिए और अमेरिका जैसे दुश्मन देशों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने से रोकना चाहिए.

