मिडिल ईस्ट अभी धधक ही रहा ही कि अब वेनेजुएला की तरह ही क्यूबा पर एक्शन की तैयारी में जुट गए हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. अमेरिका और क्यूबा के बीच बढ़ते तनाव में अमेरिकी सेना की एंट्री होने से हलचल बढ़ गई है. अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस निमित्ज अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ कैरेबियन सागर में पहुंच गया है.
यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने बुधवार (20 मई) को क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर हत्या का मामला दर्ज किया है. तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यूबा को लेकर कहा है कि क्यूबा एक असफल राष्ट्र है, इनके पास तेल नहीं है. हम परिवारों और लोगों की मदद के लिए वहां हैं. मानवीय आधार पर, हम मदद के लिए वहां हैं.”
इसके बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को भी ठीक वेनेजुएला के निकोलस मादुरो की सरकार को गिराने के लिए सैन्य एक्शन ले सकते हैं.
दरअसल 94 साल के राउल कास्त्रो आज भी क्यूबा की राजनीति में काफी प्रभाव रखते हैं. राउल कास्त्रो, क्यूबा के दिवंगत नेता फिदेल कास्त्रो के छोटे भाई हैं. फिदेल कास्त्रो ने ही 1959 में क्यूबा की कम्युनिस्ट क्रांति का नेतृत्व किया था और वह लंबे समय तक अमेरिका के बड़े विरोधी माने जाते थे.
कैरिबियन सागर में पहुंचा अमेरिका का घातक युद्धपोत
क्यूबा से तनातनी के बीच अमेरिकी दक्षिणी कमान (साउथकॉम) ने पुष्टि करते हुए कहा, यूएसएस निमित्ज को कैरिबियन सागर में तैनात किया गया हैय
साउथकॉम ने कहा, ताइवान जलडमरूमध्य से लेकर अरब की खाड़ी तक, स्थिरता सुनिश्चित करते हुए और लोकतंत्र की रक्षा करते हुए दुनिया भर में अपनी युद्ध क्षमता साबित की है.
अमेरिकी नौसेना के इस शक्तिशाली स्ट्राइक ग्रुप में एफ/ए-18ई सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान, ईए-18जी ग्रोवलर इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमान और सी-2 ग्रेहाउंड सपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल हैं. इसके साथ यूएसएस ग्रिडली विध्वंसक युद्धपोत और यूएसएनएस पटक्सेंट ईंधन आपूर्ति पोत भी मौजूद हैं.
1975 में कमीशन किए गए इस एयरक्राफ्ट कैरियर ने हाल ही में रियो डी जनेरियो के तट पर ब्राजील की नौसेना के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया था.
क्यूबा ने अपना नियंत्रण खो दिया है: ट्रंप
ईरान के मोर्चे पर घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नजर अब क्यूबा पर नियंत्रण हासिल करने पर टिक गई है. वेनेजुएला में अपने कट्टर दुश्मन तत्कालीन राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद से ही ट्रंप क्यूबा, ग्रीनलैंड को धमका रहे हैं.
ट्रंप ने अपने ताजा बयान में पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा, “मियामी की क्यूबाई आबादी और निश्चित रूप से मियामी से बाहर के लोग भी… अटॉर्नी जनरल ने जो किया, उसकी सराहना करते हैं. क्यूबा हमारे दिमाग में है, यह बहुत महत्वपूर्ण है. वहां की सरकार ने वास्तव में क्यूबा पर से अपना नियंत्रण खो दिया है.”
इस एक्शन से कुछ दिनों पहले सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने क्यूबा अधिकारियों से मुलाकात की थी. जिसमें क्यूबा के साथ बातचीत की संभावनाओं से इनकार किया था.
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा की जनता के नाम स्पेनिश भाषा में संदेश जारी किया. रुबियो ने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार वहां की आर्थिक समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया. साथ ही अमेरिका की ईंधन नाकेबंदी नीति का भी समर्थन किया.
अमेरिका का पूर्व राष्ट्रपति पर एक्शन, क्यूबा की सरकार का पलटवार
पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर पर लगे आरोप 1996 की उस घटना से जुड़े हैं जिसमें कास्त्रो विरोधी पायलटों द्वारा उड़ाए जा रहे दो नागरिक विमानों को मार गिराया गया था. इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी.
क्यूबा सरकार ने अमेरिकी न्याय विभाग के एक्शन पर पलटवार करते हुए कहा, 1996 में विमानों को गिराने का कदम वैध था और आत्मरक्षा में उठाया गया था क्योंकि उनके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन हुआ था.
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कैनेल बर्मुडेज ने एक्स पर लिखा कि इन आरोपों का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह “क्यूबा पर सैन्य हमला सही ठहराने के लिए बनाई जा रही फाइल” का हिस्सा है.
अमेरिका ने पांच अन्य क्यूबाई लोगों पर भी आरोप लगाए गए हैं, जिनमें वे वायुसेना पायलट भी शामिल हैं जिन्होंने विमानों को गिराया था. इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी खराब हो गए थे. करीब 20 साल बाद राउल कास्त्रो ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश की थी. लेकिन ट्रंप ने ओबामा की उस नीति को पलट दिया और क्यूबा पर लगातार नए प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए. क्यूबा पर कम्युनिस्ट क्रांति के बाद से लगभग लगातार अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं.
मातृभूमि या मौत, क्यूबा के राष्ट्रपति का है कड़ा रूख
कैरिबियाई सागर में स्थित देश क्यूबा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति आक्रामक हैं. वेनेजुएला के बाद क्यूबा पर नियंत्रण की कोशिश में हैं ट्रंप. इस साल की शुरुआत से ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप क्यूबा के खिलाफ आग उगल रहे हैं. जिसे लेकर क्यूबा के राष्ट्रपति ने कड़ा रुख अख्तियार किया.
क्यूबा के राष्ट्रपति बर्मुडेज ने कहा था, कि “ट्रंप प्रशासन बल प्रयोग के जरिए अपनी विदेश नीति थोपने का खतरनाक तरीका अपना रही है. यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि कौन से देश क्यूबा के साथ व्यापार कर सकते हैं. क्यूबा इस नए हमले का दृढ़ता, शांति और इस विश्वास के साथ सामना करेगा कि तर्क पूरी तरह से हमारे पक्ष में है.”
राष्ट्रपति बर्मुडेज ने अपने पोस्ट में कहा था, “हम अपने देश को ईंधन सप्लाई पर पूरी तरह से नाकाबंदी लगाने के अपने इरादे में क्यूबा के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार द्वारा किए गए नए हमले की कड़ी से कड़ी निंदा करते हैं. ट्रंप प्रशासन बल के इस्तेमाल के जरिए देश की विदेश नीति चलाने और साम्राज्यवादी वर्चस्व सुनिश्चित करने की अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का एक खतरनाक तरीका अपना रहा है.”
क्यूबा के राष्ट्रपति ने कहा, “फैसला एक है: मातृभूमि या मौत! हम जीतेंगे!”
वेनेजुएला में हमेशा से क्यूबा के सैन्य अधिकारियों की तैनाती थी. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को क्यूबा से सुरक्षा मिलती थी. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने सीधे-सीधे क्यूबा को धमकाया था. ट्रंप ने कहा था कि “क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला के तेल और वित्तीय सहायता पर निर्भर था लेकिन अब हालात बदल गए हैं. अभी वक्त है, इससे पहले कि देर हो जाए समझौता कर लो.”
रूस के करीबी क्यूबा को दुश्मन मानता है अमेरिका
अमेरिका और क्यूबा के संबंध 1959 की क्रांति के बाद से बेहद तनावपूर्ण रहे हैं. दशकों से तनावपूर्ण संबंधों को ओबामा प्रशासन के दौरान सामान्य करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद ये संबंध बेहद संवेदनशील मोड़ पर हैं.
वेनेजुएला में हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान क्यूबा के 32 अफसर मारे गए थे. इसके अलावा अमेरिका ने क्यूबा के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं. वहीं वेनेजुएला की तरह ही क्यूबा और रूस के बीच संबंध मजबूत हैं. रूस और क्यूबा ने आर्थिक और सैन्य सहयोग हैं. रूस क्यूबा को सैन्य, आर्थिक और ऊर्जा सहायता प्रदान कर रहा है.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी क्यूबा का नाम लेकर एक बयान में कहा था, “रूस, क्यूबा के संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा करने के दृढ़ संकल्प के साथ एकजुटता से खड़ा है.”
पुतिन ने लैटिन अमेरिकी देशों का नाम लेकर कहा, “मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूंगा कि रूस ने लैटिन अमेरिका के कई देशों के साथ लंबे समय से घनिष्ठ और रचनात्मक संबंध बनाए रखे हैं, और इस क्षेत्र के राज्यों को समान, संप्रभु साझेदार मानते हुए उनका पूर्ण सम्मान किया है.”

