ऐसे समय में जब खाड़ी के देशों में जंग के बादल मंडरा रहे हैं, तब यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद ने अरब सागर को पार कर क्यों की दो घंटे से भी कम की दिल्ली यात्रा. ये सवाल, भारत से लेकर मिडिल ईस्ट तक हर किसी के जेहन में है.
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सिर्फ 1.45 घंटे के लिए नई दिल्ली पहुंचे. इस दौरान एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रिसीव करने पहुंचे, गले लगाया और गर्मजोशी से स्वागत किया गया.
यूएई के राष्ट्रपति के यूं अचानक भारत आने को यूएई के हालिया संकट से जोड़कर देखा जा रहा है. वहीं ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा फिलहाल के लिए टल गया है और गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए भारत को न्योता मिला है.
पीएम मोदी कार डिप्लोमेसी, शेख मोहम्मद बिन जायद के साथ एक कार में बैठे
एयरपोर्ट से रवाना होने के बाद पीएम मोदी की एक बार फिर से कार डिप्लोमेसी दिखी है. पीएम मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद एक साथ एक ही कार में एयरपोर्ट से रवाना हुए.
बताया जा रहा है कि दोनों के बीच भारत-यूएई के व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर बात हुई है. क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ, जिनमें ईरान मुख्य है.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति बनने के बाद नाहयान तीसरी बार भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए. जबकि पिछले दस वर्षों में यह उनका पांचवां भारत दौरा है.
पाकिस्तान- सऊदी अरब तो भारत-यूएई के साथ बढ़ा रहा साझेदारी
भारत और यूएई नागरिक और सैन्य, दोनों क्षेत्रों में अपने आपसी सहयोग को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं. इसी जनवरी महीने की शुरुआत में भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यूएई का दौरा किया था. जिससे भारत और यूएई के बीच रक्षा सहयोग और सैन्य संबंधों को मजबूत किया गया. जनरल द्विवेदी ने यूएई सशस्त्र बलों के प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया था.
दरअसल संयुक्त अरब अमीरात खाड़ी में भारत का सबसे अच्छा और भरोसेमंद दोस्त है. दोनों देशों के बीच व्यापार की बात की जाए तो साल 2024-25 में व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
जबकि सऊदी अरब ने हाल के दिनों में पाकिस्तान से दोस्ती बढ़ाई है. दोनों देशों ने एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं कि किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर किया हमला माना जाएगा.
पुतिन की 2021 की यात्रा के बाद सबसे छोटा दौरा
हाल के वर्षों में ये किसी भी हेड ऑफ स्टेट यानी राष्ट्राध्यक्ष की सबसे छोटी यात्रा थी. दिसंबर 2021 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने छह घंटे के लिए भारत का दौरा किया था. उस वक्त, हर कोई हैरान था कि पुतिन ने इतनी छोटी यात्रा क्यों की है. महज दो महीने बाद ही इसका जवाब मिल गया. क्योंकि फरवरी 2022 में पुतिन ने यूक्रेन पर आक्रमण करने का निर्देश दे दिया था. यानी यूक्रेन के खिलाफ जंग के चलते पुतिन ने पीएम मोदी से मुलाकात के लिए इतना छोटा दौरा किया था.
सऊदी-यूएई में चल रहा है जबरदस्त तनाव, यमन में 02 जहाज पर हुई थी ड्रोन स्ट्राइक
ऐसे में ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या यूएई भी क्या किसी ऐसी जंग की तैयारी कर रहा है. ऐसा इसलिए, क्योंकि हाल ही में सऊदी अरब ने यमन के एक बंदरगाह में यूएई से आए 02 जहाज पर ड्रोन अटैक किया था. सऊदी ने आरोप लगाया था कि यूएई ने सीरिया के विद्रोही संगठनों को मजबूत करने के लिए इन जहाज में कॉम्बेट व्हीकल भेजी थी. सऊदी ने इन जहाज पर ड्रोन अटैक का वीडियो भी जारी किया था.
ऐसे में ये कयास लगने शुरु हो गए हैं कि क्या यूएई और सऊदी अरब में कोई जंग छिड़ सकती है. बाहरी दुनिया को ऐसा लगता है कि यूएई और सऊदी, दोनों इस्लामिक राष्ट्र है और खाड़ी देशों के संगठन का अहम हिस्सा होने के चलते, अच्छे संबंध हो सकते हैं. लेकिन हकीकत ये है कि दोनों देशों के बीच अदावत का एक लंबा इतिहास रहा है.
ईरान से है पुरानी अदावत, अमेरिका का किया समर्थन
ईरान में चल रहे तनाव के चलते भी यूएई के राष्ट्रपति ने दिल्ली का दौरा बेहद छोटा रखा. क्योंकि, यूएई और ईरान भी एक दूसरे को सीधे आंख नहीं सुहाते हैं. यूएई उन इ्स्लामिक देशों में है जो, ईरान पर अमेरिकी हमले का समर्थन करता है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले का प्लान फिलहाल टाल दिया है, लेकिन अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन किसी भी वक्त अरब सागर में पहुंचने जा रहा है, जिससे ईरान पर खतरा पूरी तरह टला नहीं है.
दिसंबर में नूरखान एयरबेस को टच किया था एमबीजेड ने
यहां पर ये बताना भी जरूरी है कि दिसंबर के महीने में यूएई के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा भी किया था. लेकिन ये दौरा भी भारत की तरह बेहद छोटा था. एमबीजेड ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के करीब नूरखान एयर बेस का दौरा किया और वही पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और असीम मुनीर से मुलाकात कर वापस अपने देश रवाना हो गए. ये वही नूर खान एयरबेस था, जिस पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस मिसाइल दागकर पूरी तरह तबाह कर दिया था. पूरे सात महीने की मरम्मत के बाद पाकिस्तान ने नूरखान एयरबेस को फिर से ऑपरेशन्ल किया था, जहां यूएई के राष्ट्रपति के तौर पर पहली किसी विदेशी मेहमान की यात्रा हुई थी.


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