ईरान और इजरायल की अदावत अब जंग के मैदान से बाहर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और सोशल मीडिया तक पहुंच गई है. मौजूदा विवाद इजरायली सेना के उत्पीड़न से जुड़ी है जिसको लेकर संयुक्त राष्ट्र की सभा में इजरायली राजदूत की यूएन की एक महिला अधिकारी से तीखी नोकझोंक हो गई है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस नोंकझोंक को लेकर सोशल मीडिया पर इजरायल की जमकर लताड़ लगा दी.
संयुक्त राष्ट्र में इजरायली सेना द्वारा बच्चों के उत्पीड़न पर पेश की गई रिपोर्ट पर इजरायली राजदूत डैनी डेवन ने यूएन महासचिव पर इजरायल-विरोधी होने का आरोप लगाया था. इसका विरोध करते हुए यूएन की एक अधिकारी वेनिसा फ्रेजर ने इजरायली राजदूत के संबोधन में टोकने की कोशिश की. टोका-टाकी से डेवन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और वेनिसा को चुप रहने की हिदायत दे डाली. दोनों के बीच तूतू मैमै होता देख, बैठक में मौजूद दूसरे अधिकारियों ने बीच बचाव किया.
सोशल मीडिया पर भी हो गई भिड़ंत
यूएन की बैठक में हुई लड़ाई वहीं खत्म नहीं हुई और बाद में डेवन और फ्रेसियर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी भिड़ गए. विवाद अभी खत्म नहीं हुआ था कि इस जंग में ईरान की एंट्री हो गई.
विवाद पर क्या कहा ईरान ने
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने एक्स पर लिखा कि “तर्क, कानून, नैतिकता और न्याय के खिलाफ घमंडी अवज्ञा का यह शर्मनाक प्रदर्शन, रंगभेदी आतंकवादी (इजरायली) शासन को उसके समर्थकों (अमेरिका) द्वारा दी गई पूरी छूट का एक और अपरिहार्य नतीजा है.”
बाघई ने आगे लिखा कि इजरायली शासन सभी सभ्य मानदंडों की पूरी तरह से अनदेखी करते हुए फिलिस्तीनी लोगों और पूरे क्षेत्र में नरसंहार का अभियान जारी रखे हुए है.
अब दुनिया के लिए यह समय आ गया है कि वह जागे और शांति तथा मानवता के लिए इस गंभीर और अभूतपूर्व खतरे का सामना करें.
क्यों निशाना बना रहा इजरायल
दरअसल, अक्टूबर 2023 में ईरान समर्थित आतंकी संगठन हमास के नरसंहार के बाद से इजरायली सेना ने गाजा को पूरी तरह से कब्रिस्तान में तब्दील कर दिया है. इजरायली सेना ने गाजा में हवाई हमलों से लेकर रिहायशी इलाकों में टैंक के जबरदस्त तबाही मचाई है. गाजा में हमास की टनल (सुरंगों) को विस्फोट के जरिए जमींदोज किया जा रहा है. हमास के आतंकियों से सहानुभूति रखने वाले लोगों के घर और दुकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है.
माना जाता है कि इजरायली डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) के हमलों में गाजा में करीब 40 हजार फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है. इनमें बच्चे, बूढ़े और महिलाएं भी शामिल हैं.
लाखों की तादाद में गाजा के रहने वाले फिलिस्तीनियों को बेघर होना पड़ा और है रिफ्यूजी कैंप में शरण लेनी पड़ी है. हमास के कमांडरों को रिफ्यूजी कैंप तक में चुन चुन कर मारा जा रहा है. ऐसे में कोलेट्रल-डैमेज भी हो रहा है. यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार इत्यादि संगठनों ने आईडीएफ की ज्यादतियों को लेकर अपनी रिपोर्ट यूएन महासचिव को सौंपी है.

