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वॉशिंगटन को यूरोप लगा धोखेबाज, अमेरिका से दूरी बनेगी घातक?

यूरोप के खिलाफ खार खाए बैठा है अमेरिका. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड, वेनेजुएला के मुद्दे पर साथ न देना यूरोपीय नाटो देशों और यूरोपीय यूनियन की नाफरमानी मानी है. उल्टा यूरोपीय यूनियन ने भारत के साथ मदर ऑफ ऑल डील पर हस्ताक्षर करके ट्रंप को और चिढ़ाने का काम किया है. जिसके बाद अमेरिका यूरोप पर बुरी तरह से भड़क गया है. 

ट्रंप के ट्रेजरी मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत के साथ डील को लेकर यूरोप को धोखेबाज करार दिया है तो नाटो महासचिव मार्क रूट ने यूरोपीय संसद में कहा है कि बिना अमेरिका के नाटो टिक नहीं सकता है.

अमेरिका की सुरक्षा गारंटी खोना यूरोप के लिए घातक: मार्क रूट

ब्रसेल्स में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए नाटो चीफ मार्क रूट ने चेतावनी जारी की है. रूट ने कहा कि “अगर यूरोप को लगता है कि वह अमेरिका के सहयोग के बिना अपनी रक्षा कर सकता है, तो वह केवल सपना देख रहा है. यूरोप अकेले अपनी सुरक्षा करने में सक्षम नहीं है और उसे अमेरिका की सख्त जरूरत है. अमेरिका की सुरक्षा गारंटी खोना यूरोप के लिए घातक होगा.”

मार्क रूट ने यूरोप पर तंज कसते हुए कहा कि “अमेरिकी सहयोग के बिना सुरक्षा का रास्ता चुनना ‘गुड लक’ कहने जैसा होगा. अमेरिका के हटने का मतलब होगा कि यूरोप को अपनी स्वतंत्रता के अंतिम रक्षक को खोना.”

यूरोप का अंतिम रक्षक अमेरिका, उसके बिना यूरोप को बढ़ाना होगा रक्षा बजट: मार्क रूट

मार्क रूट ने कहा, “अगर यूरोप, अमेरिका के बिना अकेले चलना चाहता है, तो उसे अपना रक्षा बजट बढ़ाकर 10% करना होगा और अरबों यूरो खर्च कर अपनी परमाणु क्षमता बनानी होगी. अकेले रक्षा करने के लिए यूरोपीय देशों को अपने मौजूदा खर्च में भारी बढ़ोतरी करनी होगी, जो आर्थिक रूप से एक बड़ी चुनौती है.”

मार्क रूट ने आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का समर्थन किया और कहा, “रूस और चीन की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए आर्कटिक की रक्षा के लिए नाटो को ज्यादा सामूहिक जिम्मेदारी लेनी होगी.”  

भारत से ट्रेड डील, ट्रंप के मंंत्री ने यूरोप को बताया धोखेबाज

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के एलान से पहले ही अमेरिका इसको लेकर भड़क गया है. ट्रंप के ट्रेजरी मंत्री (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने यूरोप को धोखेबाज बताया है. बेसेंट ने कहा, कि “अमेरिका ने यूरोप से कहीं ज्यादा कुर्बानी दी है. रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जबकि यूरोप ने भारत से ट्रेड डील साइन कर ली. दरअसल, इस डील से यूरोप अपने ही खिलाफ चल रही जंग को फाइनेंस कर रहा है.”

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