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ईरान में अमेरिका का ग्राउंड ऑपरेशन, ट्रंप ने दी चेतावनी

जरूरत पड़ी तो ईरान में उतरेगी अमेरिकी सेना. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के लगातार हो रहे पलटवार पर दिया है बड़ा बयान. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इशारा कर दिया है कि अगर ईरानी सेना खाड़ी देशों में बने अमेरिकी बेस पर अटैक करने से नहीं रुकी तो ग्राउंड पर उतरकर अमेरिकी कमांडोज़ कोहराम मचा देंगे.

ट्रंप ने खुलासा किया है कि ईरान ऐसी मिसाइल बना रहा था, जो अमेरिका तक पहुंच सकती है. अगर इजरायल संग मिलकर हमला नहीं किया जाता तो ईरान सीधे-सीधे अपनी मिसाइल से अमेरिका को दहला देता.

ट्रंप ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के खात्मे को सही ठहराते हुए कहा, बीते 47 वर्षों में यह ईरानी सरकार अमेरिकियों पर हमला करती रही है. इस शैतानी सरकार पर हमला करने का ये हमारा आखिरी मौका था. 

ईरान में उतरेंगे अमेरिकी सैनिक: ट्रंप

अमेरिका के ईरान में हुए एयरफोर्स ऑपरेशन के बाद अब अमेरिकी सेना के जमीन पर उतरकर हमला करने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. ईरान अमेरिकी सैनिकों को नहीं बख्श रहा. चाहे बहरीन हो या कुवैत, दोहा हो या दुबई जहां जहां अमेरिकी सैन्य बेस हैं या जिन जगहों पर अमेरिकी सैनिक रह रहे हैं, हर जगह ईरान अपने घातक ड्रोन से हमला करने से गुरेज नहीं कर रहा. चारों ओर अटैक कर रहा है.

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर से ईरान पर धमकी दी है. ट्रंप ने कहा कि “अगर ईरान नहीं रुकता है, सरेंडर नहीं करता है, तो जल्द अमेरिकी सैनिकों को ईरान के ग्राउंड पर उतार दिया जाएगा. ट्रंप ने कहा, हमने पहले ही अंदाजा लगा लिया था कि ये युद्ध 4-5 सप्ताह तक चलेगा. लेकिन हमारे पास इससे कहीं अधिक समय तक चलने की क्षमता है. किसी ने कहा कि राष्ट्रपति इसे बहुत जल्दी निपटाना चाहते हैं और उसके बाद ऊब जाएंगे. मैं नहीं ऊबता. इसमें बोरियत कुछ भी नहीं है. हम ईरान को खत्म करेंगे. और वहां की जनता के लिए एक अच्छा शासन लाएंगे.”

अमेरिका के लिए खतरा था ईरान, बना रहा था हम तक पहुंचने वाली मिसाइल: ट्रंप

ट्रंप ने ईरान पर हमले की वजहें बताई हैं. ट्रंप ने कहा कि “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दुनिया का नंबर एक आतंकवादी प्रायोजक कभी भी परमाणु हथियार प्राप्त न कर सके. मैंने शुरू से ही कहा था कि उनके पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे. ईरान परमाणु हथियारों की अपनी जिद पर अड़ा हुआ था. इस वजह से अमेरिका पूरी तरह से अलर्ट था.”

ट्रंप ने कहा, “ईरानी शासन का पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम तेजी से और नाटकीय रूप से बढ़ रहा था, और इससे अमेरिका और विदेशों में तैनात हमारी सेनाओं के लिए एक बहुत बड़ा और स्पष्ट खतरा पैदा हो गया था. शासन के पास पहले से ही यूरोप और हमारे स्थानीय और विदेशी ठिकानों पर हमला करने में सक्षम मिसाइलें थीं, और जल्द ही उनके पास हमारे खूबसूरत अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम मिसाइलें होतीं.”

“इस तेजी से बढ़ते मिसाइल कार्यक्रम का उद्देश्य उनके परमाणु हथियार विकास को छिपाना और किसी के लिए भी उन्हें हमारे द्वारा प्रतिबंधित इन परमाणु हथियारों को बनाने से रोकना बेहद मुश्किल बनाना था. लंबी दूरी की मिसाइलों और परमाणु हथियारों से लैस ईरानी शासन मध्य पूर्व के लिए ही नहीं, बल्कि अमेरिकी जनता के लिए भी एक असहनीय खतरा होता. हमारा देश खुद खतरे में होता, और लगभग खतरे में था. “

ईरान आतंक फैलाने वाला देश: ट्रंप

ट्रंप ने ईरान को दुनिया में आतंक फैलाने वाला देश बताया. कहा कि “ईरान मध्य-पूर्व में कई आतंकी संगठनों को हथियार, पैसा और निर्देश देता है. उनके अनुसार, ईरान अपनी सीमाओं के बाहर आतंकी सेनाओं को समर्थन देना जारी नहीं रख सकता. ईरान अमेरिका पर हमला करना चाहता था और उसने अमेरिका की चेतावनियों को नजरअंदाज किया. अमेरिकी सेना ने ईरान को हिलाकर रख दिया है. उस पर जबरदस्त हमले किए जा रहे हैं लेकिन अभी तो बड़े हमले होना बाकी है. अमेरिका की सेना दुनिया की सबसे बड़ी और ताकतवर सेना है और हम बखूबी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.”

ईरान के 10 वॉरशिप तबाह किए: ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि “इस कार्रवाई के पीछे सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि अन्य देश भी उसके साथ हैं. अब तक ईरान के 10 युद्धपोत तबाह किए जा चुके हैं. उन्होंने अपने पुराने फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जनरल कासिम सुलेमानी को भी मार गिराया था.”

ट्रंप ने आगे कहा, “लगभग 47 वर्षों से यह (ईरानी) शासन संयुक्त राज्य अमेरिका पर हमला कर रहा है और अमेरिकियों को मार रहा है. जनरल सोलेमानी, जो सड़क किनारे बम का जनक था. मैंने उसे अपने पहले कार्यकाल में ही समाप्त कर दिया था. इस समय हमारे पास जो हम कर रहे हैं, उसे रोकने और इस बीमार और शातिर शासन द्वारा उत्पन्न असहनीय खतरों को समाप्त करने का यह हमारा आखिरी और सबसे अच्छा मौका था. 

अब अरब और यूरोप भी ईरान के खिलाफ: ट्रंप

ट्रंप ने कहा, “हम आश्चर्यचकित हैं कि खाड़ी देश भी अब ईरान से युद्ध करना चाहते हैं. ट्रंप बोले- ईरान के हमलों के बाद कई अरब देश अब सैन्य अभियान में शामिल होने के लिए दबाव बना रहे हैं. ईरान ने बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को निशाना बनाया, जिसके बाद इन देशों के रुख में बदलाव आया है.  ट्रंप ने कहा कि हम हैरान थे. हमने उनसे कहा था कि हम संभाल लेंगे लेकिन अब वे लड़ना चाहते हैं. वे आक्रामक तरीके से लड़ रहे हैं. फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी जैसे देश भी इस सैन्य अभियान में शामिल होने के लिए बेताब है.”

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