अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता करने की चाहत रखने वाले पाकिस्तान और उसके फेल्ड (फील्ड) मार्शल का मजाक बन गया है. पाकिस्तानको स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तगड़ा झटका लगा है. ईरान ने होर्मुज से पाकिस्तानी जहाज को गुजरने देने से इनकार कर दिया.
ये वही पाकिस्तान है, जो दावा कर रहा है कि इस्लामाबाद के जरिए अमेरिका-ईरान की बीच बातचीत की जा रही है. दुनिया में आतंकियों को पनाह और ट्रेनिंग देने वाला पाकिस्तान शांति का चोला ओढ़े हुए था. लेकिन ईरान ने पाकिस्तान साथ गहरी मित्रता की पोल खोल कर रख दी है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने पाकिस्तानी जहाज को कराची की ओर जाने की अनुमति नहीं दी. इसके बाद ईरान ने पाकिस्तान का झंडा लगे जहाज को वापस लौटा दिया.
पाकिस्तानी जहाज को होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं: ईरानी दूतावास
ईरान के काबुल दूतावास ने जानकारी देते हुए कहा, “ईरान ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह जा रहे एक जहाज को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति न मिलने पर वापस मोड़ दिया”. ईरानी दूतावास के बयान में कहा गया, “कंटेनर जहाज सेलेन को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) नेवी ने कानूनी प्रोटोकॉल का पालन न करने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी. इसके बाद उसे वापस लौटा दिया.”
आपको बता दें कि दुनिया के तेल और गैस व्यापार का लगभग एक-पांचवां हिस्सा गुजरने वाला यह महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण बाधित है. ईरान ने घोषणा की है दुश्मनों (इजरायल-पाकिस्तान) और ईरान का नुकसान चाहने वाले देशों को एक लीटर तेल नहीं ले जाने दिया जाएगा. मार्ग रोके जाने के कारण एशिया के साथ-साथ यूरोप में भी खलबली मची हुई है. गैस-तेल की किल्लत ने देशों की चिंताएं बढ़ा दी है.
हमारी इजाजत के बिना एक भी जहाज नहीं निकलेगा: आईआरजीसी
आईआरजीसी नेवी के रियर एडमिरल अलीरेज़ा तंगसीरी ने कहा कि जहाज को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति न लेने के कारण वापस मोड़ दिया गया. अब सभी जहाजों को ईरानी समुद्री प्राधिकरण के साथ समन्वय करना अनिवार्य है. इस जलमार्ग से किसी भी जहाज का गुजरना इस्लामिक गणराज्य ईरान की समुद्री प्राधिकरण के साथ पूर्ण समन्वय के बाद ही संभव है.”
आईआरजीसी नेवी ने पुष्टि की कि पाकिस्तानी जहाज कानूनी प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहा था, इसलिए उसे रोका गया. और फिर वापस मोड़ दिया गया.
युद्ध की भरपाई, कुछ जहाजों पर 20 लाख डॉलर की ट्रांजिट फीस
होर्मुज पर पूरी तरह से नियंत्रण के बाद तेहरान ट्रांजिट फीस भी वसूल कर रहा है. बताया जा रहा है कि ईरान ने कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर (लगभग 18.8 करोड़ रुपये) ट्रांजिट फीस वसूलने का फैसला किया है.
ईरानी सांसद अलाउद्दीन बोरूजर्दी ने कहा, “कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर ट्रांजिट फीस वसूलना ईरान की ताकत को दर्शाता है. दशकों बाद अब जलडमरूमध्य में एक नया ‘संप्रभु शासन’ स्थापित हो गया है. युद्ध की अपनी लागत होती है, इसलिए स्वाभाविक रूप से हमें जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूलनी चाहिए.”
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी होर्मुज को लेकर अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा था, “हॉर्मुज जलडमरूमध्य सिवाय उन देशों के सभी के लिए खुला है, जो हमारी जमीन का उल्लंघन करते हैं. ईरान को नक्शे से मिटाने का भ्रम हमारे खिलाफ हताशा दिखाता है. धमकियां और आतंक हमारी एकता को और मजबूत करते हैं.”
पाकिस्तान-अमेरिका में दिख रही थी गलबहियां, राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने दिखाई औकात
इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तान की ओर से ये प्रोपेगेंडा फैलाया गया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता हो रहा है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मध्यस्थता को लेकर एक पोस्ट लिखी, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रीपोस्ट भी किया.
शहबाज ने लिखा, “पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक और निर्णायक वार्ता की मेजबानी करने के लिए तैयार है. यह हमारे लिए सम्मान की बात होगी. पाकिस्तान क्षेत्र और इससे बाहर शांति और स्थिरता के हित में मध्य पूर्व में युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने के चल रहे प्रयासों का स्वागत करता है और उनका पूरा समर्थन करता है. अमेरिका और ईरान की सहमति से पाकिस्तान मौजूदा संघर्ष के व्यापक समाधान को लेकर सार्थक और निर्णायक वार्ता के लिए मेजबान बनने को तैयार है.”
पाकिस्तान अमेरिका से मिले सम्मान ले खुश हो ही रहा था कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तान का नाम लिखकर उनकी औकात दिखा दी और पाकिस्तान को डबल स्टैंडर्ड वाला देश बता डाला. पेजेश्कियान ने लिखा, “पाकिस्तान, तुर्की और इराक जैसे देशों के लोग अमेरिका और इजरायल के ‘अपराधों’ के प्रति अपनी घृणा जाहिर कर रहे हैं. पाकिस्तान की जनता अमेरिका को ‘अपराधी’ बता रही है.”
खबर ये भी है कि पाकिस्तान ने एक अहम भूमिका निभाते हुए अमेरिका का 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया है. हालांकि, तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ बातचीत करने के विचार को सिरे से खारिज कर दिया है.

