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पाकिस्तान की तरह हम दलाल नहीं: जयशंकर

हम पाकिस्तान की तरह दलाल नहीं हो सकते. ये दो टूक है भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की. ईरान युद्ध में मध्यस्थता को लेकर पूछे गए सवाल पर जयशंकर ने विपक्षी दलों को खरी-खरी सुना दी.

मिडिल ईस्ट धधक रहा है. अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान युद्ध को एक महीने होने वाले हैं, लेकिन युद्ध थमता नजर नहीं आ रहा. इस वैश्विक संकट पर चर्चा के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को सर्वदलीय बैठक हुई. संसद भवन में हुई इस बैठक में पक्ष और विपक्ष के कई नेता शामिल हुए, जबकि ममता बनर्जी की टीएमसी ने इस बैठक का बॉयकॉट कर अपना विरोध जताया है.

इस बैठक में जब विदेश मंत्री एस जयशंकर से ईरान युद्ध में मध्यस्थता को लेकर सवाल पूछा गया तो उनके जवाब से विपक्ष चित दिखा.

दलाल देश नहीं भारत, पाकिस्तान की तरह बिचौलिए का काम नहीं करेगा: एस जयशंकर

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच ऑल पार्टी मीटिंग में सरकार ने मिडिल ईस्ट के हालात और सरकार की तैयारियों के बारे में बताया. बैठक के दौरान जब विपक्ष ने ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता के ऑफर पर सवाल किया तो बेबाकी के लिए मशहूर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि हम पाकिस्तान की तरह ‘दलाल देश’ नहीं हैं.

दरअसल, पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पेशकश की है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका की मेजबानी करने के लिए तैयार है. शहबाज शरीफ की इस पोस्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी रीपोस्ट किया था.

पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर सर्वदलीय बैठक में विपक्षी सांसद धर्मेंद्र यादव और मुकुल वासनिक ने सरकार से सवाल किया था. इस पर जवाब देते हुए सरकार ने कहा कि “पाकिस्तान साल 1981 से ऐसा करता आ रहा है, इसमें कोई नई बात नहीं है.”

इस दौरान जयशंकर ने कहा कि “भारत, पाकिस्तान की तरह बिचौलिए और दलाल देश के तौर पर काम नहीं करेगा.”

पाकिस्तान की ओर से की गई मध्यस्थता की पेशकश पर सरकार ने तर्क दिया  है कि “अगर अमेरिका को पाकिस्तान के जरिए बातचीत करना उपयोगी लगता है तो भारत उसे नियंत्रित नहीं कर सकता.”

ईरान मामले भारत की संतुलित विदेश नीति, सरकार ने क्या-क्या बताया

इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, जेपी नड्डा, जेडीयू से लल्लन सिंह और संजय झा, कांग्रेस से तारिक अनवर और मुकुल वासनिक, सीपीआईएम से जॉन ब्रिटास, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और असदुद्दीन ओवैसी भी मौजूद रहे. सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात पर ब्रीफिंग दी. बैठक की अध्यक्षता राजनाथ सिंह ने की थी.

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने एक मजबूत और आश्वस्त करने वाला संदेश दिया कि “पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच हालात पूरी तरह से नियंत्रण में है. चिंतित होने की जरूरत नहीं है. सरकार की ओर से बताया गया कि होर्मुज स्ट्रेट से भारत के चार जहाज सुरक्षित वापस आ चुके हैं. खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों में कोई घबराहट नहीं है, भारतीय दूतावास नागरिकों की सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं, और लोगों को निकालने की योजनाएं तैयार हैं,लोगों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है.”

विदेश नीति की आलोचनाओं का जवाब देते हुए सरकार ने कहा कि “भारत लगातार सक्रिय रहा है. बयानों, कूटनीतिक पहलों और सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है. भारत चुपचाप नहीं रहा है लेकिन कभी-कभी खामोशी एक कारगर हथियार की तरह से काम करती है.”

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