स्वदेशी एविएशन कंपनी के नए सीएमडी रवि के ने संभाल लिया है कार्यभार. एचएएल को और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी रवि के के कंधों पर आई है.
नए सीएमडी रवि के. के पास एयरोस्पेस एवं रक्षा, विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में तीन दशक से अधिक का समृद्ध अनुभव है. सीएमडी रवि ने इससे पहले एचएएल में निदेशक (ऑपरेशंस) के पद पर कार्यरत रहते हुए एचएएल की रणनीतिक योजना को दिशा दी और कंपनी को ‘महारत्न’ का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
एलसीए-मैन कहे जाने वाले रवि को ये जिम्मेदारी ऐसे वक्त में सौंपी जा रही है, जब एचएएल को एलसीए प्रोजेक्ट में हो रही देरी की मार झेलनी पड़ रही है और सरकारी उपक्रम अब सिविल एविशन में हाथ आजमाने की तैयारी में है.
इसी वर्ष जनवरी में एचएएल ने सिविल एविएशन में कदम रखा है. हैदराबाद में प्रदर्शित हुई विंग्स इंडिया प्रदर्शनी में एचएएल ने रूस के साथ मिलकर बनाए जाने वाले एसजे-100 प्लेन, हिंदुस्तान-228 एयरक्राफ्ट और ध्रुव-एनजी हेलीकॉप्टर को प्रदर्शित किया था.
एचएएल के मुताबिक एसजे-100 यात्री विमान के लिए रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) के साथ करार हो चुका है और अगले तीन साल में मेक इन इंडिया के तहत ये बेहद खास प्लेन भारत में बनकर तैयार हो जाएगा. इन विमान का निर्माण नासिक (और कानपुर) में किया जाएगा क्योंकि एचएएल की नासिक फैसिलिटी में रूस की मदद से करीब 250 सुखोई फाइटर जेट बनाए गए थे. अब इन विमानों का निर्माण पूरा हो चुका है.
फाइटर जेट तेजस-प्रचंड हेलीकॉप्टर्स के पीछे नए सीएम़डी का अहम रोल
डी के सुनील के रिटायर होने के बाद डायरेक्टर (ऑपरेशन्स) रवि के. को मिली है एचएएल की कमान. रवि के. ने सेवानिवृत्त हुए डॉ. डी के सुनील से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के 22वें अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यभार संभाल लिया है.
मैकेनिकल इंजीनियरिंग और आईआईएम (अहमदाबाद) के साथ फ्रांस से उच्च शिक्षा लेने वाले रवि पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से एविएशन सेक्टर में है.
ऑपरेशन्स डायरेक्टर के तौर पर रवि पर एचएएल की स्ट्रेटेजिक और फंक्शनल प्लानिंग की जिम्मेदारी है. इसके अलावा एचएएल की क्षमताओं को विकसित करना और कंपनी द्वारा निर्मित एयरक्राफ्ट का स्वदेशीकरण शामिल है. एचएएल द्वारा निर्मित, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए)-तेजस को भारतीय वायुसेना की फाइटिंग स्क्वाड्रन में शामिल करने में रवि की अहम भूमिका थी.
रवि के ने अपने करियर में कई अहम नेतृत्व पद संभाले हैं, जिनमें एलसीए तेजस डिवीजन के कार्यकारी निदेशक एवं महाप्रबंधक और कॉर्पोरेट प्लानिंग के कार्यकारी निदेशक शामिल हैं. रवि के कार्यकाल के दौरान एचएएल ने कई बड़े अनुबंध हासिल किए, जैसे भारतीय वायुसेना के लिए 180 एलसीए तेजस विमानों की आपूर्ति, तथा भारतीय सेना और वायुसेना के लिए 156 एलसीएच ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों का सौदा अहम रहा.
हाल के वर्षों में रक्षा मंत्रालय द्वारा वायुसेना के लिए एलसीए-मार्क 1ए के 02 बड़े करार में भी रवि ने महत्वपूर्ण रोल निभाया था–2021 में 36 हजार करोड़ के 83 मार्क-1ए और पिछले वर्ष (2025) में 97 लड़ाकू विमानों का.
रवि ने एचएएल की उन फैसिलिटी के स्थापना में भी अहम योगदान दिया जिससे हर वर्ष 16 एलसीए फाइटर जेट का उत्पादन किया जा सके. एचएएल के अलावा, सरकार ने रवि को वायुसेना के महत्वकांक्षी मल्टी रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमआरटीए) प्रोजेक्ट में भी (नोमेनी) डायरेक्टर नियुक्त किया है.
ग्राहक-केंद्रित पहलों के माध्यम से रवि ने विमानों की उपलब्धता दर में सुधार किया, वायुसेना के ठिकानों के साथ निर्बाध डेटा संचार व्यवस्था स्थापित की और त्वरित सहायता के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट (एसपीओसी) की शुरुआत की.
नए सीएम़डी के सामने क्या हैं चुनौतियां, सिविल एविएशन में भी एचएएल ने रखा कदम
कार्यभार संभालते हुए अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए रवि के ने कहा, कि “उनका लक्ष्य एचएएल को नवाचार, आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस, उत्कृष्ट संचालन और मानव संसाधन के दम पर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एयरोस्पेस एवं रक्षा कंपनी के रूप में स्थापित करना है.”
लेकिन आपको बता दें कि ऐसी कई चुनौतियां हैं, जिससे रवि के को निपटना होगा. जैसे एलसीए तेजस प्रोजेक्ट में आ रही देरी. स्वदेशी लड़ाकू विमान के लिए अमेरिका से मिलने वाले एविएशन इंजन (एफ-404) में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
तेजस प्रोजेक्ट समय से बहुत लेट हो चुका है. क्योंकि भारत-अमेरिका के बीच तल्ख संबंधों के चलते भारत को इंजन मिलने में दिक्कत हो रही है. हालांकि खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के सामने इंजन देरी का मुद्दा उठा चुके हैं.
तो वहीं रूस के साथ मिलकर एचएएल सिविल एविएशन में भी उतर चुका है. एचएएल का टारगेट है कि अगले तीन वर्षों में नागरिक उड़ानों में भी एचएएल की धूम मचे.

