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भारतीय सेना की ‘प्रगति’ ने पकड़ी रफ्तार, मेघालय में जुटे 13 देशों के 400 सैनिक

मेघालय के उमरोई में 12 मित्र देशों की सेना के साथ चल रहा है बड़ा सैन्य अभ्यास. भारतीय सेना का बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास ‘प्रगति 2026’ पूरे जोरों पर है. संयुक्त सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 का पहला संस्करण पूरे जोरों पर है, जो क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और सहयोग की साझा प्रतिबद्धता के तहत भारत, 12 मित्र देशों के 400 से अधिक सैन्यकर्मियों को एक साथ लाया है.

मेघालय में 13 देशों के 400 सैनिक दिखा रहे शौर्य

मेघालय के उमरोई मिलिट्री स्टेशन में एक ऐसा सैन्य अभ्यास शुरू हुआ है, जिसमें भारतीय सेना के साथ 12 मित्र देशों की सेनाएं कदम से कदम मिला रही हैं. समानता, मित्रता और आपसी सम्मान की भावना से आयोजित इस अभ्यास ने भाग लेने वाली सेनाओं को एक साथ प्रशिक्षण लेने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और बहुराष्ट्रीय माहौल में अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया है. 20 मई से चल रहे प्रशिक्षण की एक प्रमुख विशेषता मिश्रित टीमों का गठन रहा है, जिनमें सभी भाग लेने वाले देशों के कर्मी शामिल हैं और जो एक साझा उद्देश्य के लिए बड़े पैमाने पर एक साथ भाग ले रहे हैं.

पिछले तीन दिनों में, मिश्रित टीमों ने अर्ध-पहाड़ी और जंगल वाले इलाके में रॉक क्राफ्ट, घात और जवाबी-घात अभ्यास, स्लिदरिंग, जंगल लेन शूटिंग और बस इंटरवेंशन का प्रशिक्षण लिया है. प्रतिभागियों के बीच परिचालन दक्षता, आत्मविश्वास और पेशेवर समझ को बढ़ाने के लिए स्नाइपर और एके-203 फायरिंग प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गई हैं.

कौन-कौन से देश ले रहे प्रगति 2026 में हिस्सा

भारत के अलावा प्रगति 2026 में भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम शामिल हैं. ‘प्रगति’ का पूरा नाम ‘पार्टनरशिप ऑफ रीजनल आर्मीज फॉर ग्रोथ एंड ट्रांसफॉर्मेशन इन द इंडियन ओशन रीजन’ है.

सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 सामूहिक तैयारी को मजबूत करना, सैन्य-से-सैन्य सहयोग को गहरा करना और क्षेत्रीय साझेदारों के बीच स्थायी संबंध बनाना जारी रखे हुए है. यह संयुक्त प्रशिक्षण, आपसी सीख और पेशेवर सहयोग के माध्यम से साझा सुरक्षा चुनौतियों के लिए मिलकर काम करने के भाग लेने वाले देशों के साझा संकल्प को दर्शाता है.

उमरोई के जंगल-पहाड़ों में आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक तैयारी

इस युद्धाभ्यास का मुख्य लक्ष्य अर्ध-पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों में आतंकवाद निरोधी अभियानों को कामयाबी से अंजाम देना है. उमरोई के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में सभी देश सामरिक स्तर पर सैन्य ड्रिल में हिस्सा ले रहे हैं. इस अभ्यास का एक बड़ा मकसद इन सभी मित्र देशों के बीच निर्बाध समन्वय बनाना भी है, ताकि भविष्य में किसी भी साझा खतरे का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके.

अभ्यास में खेलों और अनौपचारिक बातचीत के माध्यम से सौहार्द और सैन्य बंधन को मजबूत करने पर भी समान रूप से ध्यान दिया गया है. मित्र देशों के कर्मियों ने बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और रस्साकशी में भाग लिया, जिससे टीमवर्क, आपसी विश्वास और सीमाओं के पार सशस्त्र बलों को जोड़ने वाली सैनिक भावना को मजबूती मिली.

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