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भारत के ब्रह्मोस की मांग, वियतनाम ने किया बड़ा सौदा

फिलीपींस के बाद वियतनाम बन गया है भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का दूसरा बड़ा खरीदार. लेकिन बड़ा सवाल, भारत और वियतनाम ने दुनिया से क्यों छिपाई इस सौदे की जानकारी. क्या इसके पीछे चीन से सुधरते संबंध हैं.

30 और 31 मई को सिंगापुर में वार्षिक शंगरी-ला डायलॉग का आयोजन किया गया था. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रक्षा-सुरक्षा से जुड़ा ये बेहद कॉन्कलेव है, जिसमें हर साल चीन, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रलिया और आसियान देशों सहित भारत की भी मजबूत उपस्थिति रहती है. भारत की तरफ से रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शिरकत की.

पाकिस्तान के एक मिलिट्री कमांडर ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया था. ईरान जंग के चलते सभी की निगाहें, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के संबोधन पर लगी थी. हेगसेथ ने ईरान जंग को लेकर अमेरिका के पक्ष को मजबूती से रखा और फिर भारत और पाकिस्तान से संबंधों को लेकर भी चर्चा की. अमेरिकी रक्षा मंत्री ने चीन को लेकर ट्रंप प्रशासन के नरम रूख को भी रखा. लेकिन इसी दौरान, भारत के रक्षा सचिव ने ऐसा संबोधन किया कि हर किसी के कान खड़े हो गए.

आसियान देशों से मजबूत हो रहे भारत के रक्षा संबंध:  रक्षा सचिव

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र के सुरक्षा-हालात को लेकर भारत के आसियान देशों के साथ मजबूत संबंधों की जानकारी साझा कर रहे थे. आसियान यानी दक्षिण-पूर्व एशियाई देश, जिनमें फिलीपींस,इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं. इनमें से कई देशों का चीन के साथ समुद्री-विवाद रहा है और आए दिन साउथ चाइना सी में झड़प की खबरें आती रहती हैं.

इन संबंधों और पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर चर्चा करते हुए राजेश कुमार सिंह ने बताया कि भारत के आसियान देशों से रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है. इसी कड़ी में भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की डील की है. रक्षा सचिव ने खुद कबूल किया कि इस सौदे के बारे में कभी भी सार्वजनिक तौर से जानकारी साझा नहीं की गई है. डिफेंस सेक्रेटरी ने ये भी कहा कि एक दूसरे आसियान देश इंडोनेशिया से भी ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर वार्ता अंतिम चरण में चल रही है.

रक्षा मंत्री के वियतनाम दौरे पर लगी सौदे पर मुहर?

रक्षा सचिव के इस खुलासे के बाद भी भारत के रक्षा मंत्रालय या फिर वियतनाम की तरफ से ब्रह्मोस सौदे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है. ऐसे में कयास लग रहे हैं कि कुछ दिनों पहले जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम की राजधानी हनोई के दो दिवसीय दौरे पर गए थे, तब क्या ये सौदा हुआ था. पिछले महीने यानी 18-19 मई को राजनाथ सिंह ने वियतनाम का आधिकारिक दौरा किया था. राजनाथ के दौरे से पहले मई महीने के पहले हफ्ते में वियतनाम के राष्ट्रपति राष्ट्रपति टो लैम भी भारत के दौरे पर आए थे. उस दौरान, भारत ने वियतनाम को 500 मिलियन डॉलर…करीब 5000 करोड़ का क्रेडिट लाइन देने की घोषणा की थी. इस क्रेडिट लाइन से वियतनाम के लिए 03-04 ऑफसोर पैट्रोल वैसल–ओपीवी जहाज–और एक दर्जन से ज्यादा हाई स्पीड पैट्रोल बोट्स बनाई जानी थी. माना जा रहा है कि इसी क्रेडिट लाइन, जो एक तरह का लोन है, उससे ही वियतनाम ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का सौदा किया है. ऐसे में वियतनाम, फिलीपींस के बाद दूसरा देश बन गया है जिसने, भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को खरीदने का फैसला किया है.

फिलीपींस के बाद वियतनाम ने किया ब्रह्मोस का सौदा

वर्ष 2022 में भारत ने फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर (3500 करोड़) का ब्रह्मोस सौदा किया था. फिलीपींस ने इन ब्रह्मोस (एंटी शिप) मिसाइल को साउथ चाइना सी (समंदर)में चीन के साथ तनातनी के चलते खरीदी थी. फिलीपींस की तरह, वियतनाम का भी दक्षिण चीन सागर में बीजिंग के साथ पुराना समुद्री-विवाद रहा है. यही वजह है कि वियतनाम ने भी अपनी समुद्री-सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का फैसला किया है. लेकिन सवाल ये है कि भारत और वियतनाम ने इस डील की आधिकारिक जानकारी क्यों नहीं साझा की. क्या इसके पीछे भारत के चीन से सुधरते संबंध हैं. क्योंकि इसी साल सितंबर के महीने में ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत आ रहे हैं. इस सौदे का खुलासा कर भारत और वियतनाम, चीन को नाराज नहीं करना चाहते हैं.  जबकि, भारत की तरफ से हथियारों के निर्यात को बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है.

भारत ने वियतनाम के सुखोई फाइटर जेट और किलो क्लास सबमरीन की मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) का ऑफर दिया है.भारत की तरह, वियतनाम भी रूसी सुखोई लड़ाकू विमान और किलो क्लास पनडुब्बियां इस्तेमाल करता है. वियतनाम के भारत की तरह ही रूस के साथ मजबूत संबंध रहे हैं. हाल में वियतनाम के राष्ट्रपति ने मॉस्को का दौरा किया था. इस दौरान रूस और वियतनाम के बीच सिविल न्यूक्लियर डील पर भी हस्ताक्षर किए गए थे.

आपको बता दें कि भारत ने ब्रह्मोस मिसाइस को रूस की मदद से ही देश में तैयार किया है. भारत की सेना के तीनों अंग यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना, इस ब्रह्मोस मिसाइल का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करती हैं. पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय वायुसेना के सुखोई फाइटर जेट ने पाकिस्तान के एयरबेस पर हमला करने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल का जबरदस्त इस्तेमाल किया था. उसके बाद से इंटरनेशनल मार्केट में ब्रह्मोस मिसाइल की मांग बढ़ गई है

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