मिडिल ईस्ट में भड़के ताजा युद्ध के बाद ईरान ने दूसरा अहम समुद्री मार्ग बंद करने की तैयारी की है. ईरान और लेबनान पर हुए हमलों के बाद यमन के हूती आतंकियों ने इजरायल पर मिसाइल हमले शुरु किए हैं. होर्मुज स्ट्रेट के बाद हूतियों की मदद से ईरान अहम जलमार्ग बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की कोशिश में है.
ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार अली वेलायती ने कहा है कि अगर युद्ध बढ़ा तो फौरन बाब अल मंदेब ब्लॉक कर दिया जाएगा. हाल ही में ईरान ने इस अहम जलमार्ग को बंद करने के लिए हूतियों से बात की थी और अब जब इजरायल ने ईरान और लेबनान पर तगड़ी एयरस्ट्राइक की है तो ईरान, हिजबुल्लाह और हूतियों की मदद से इजरायल को घेर रहा है.
अगर ईरान, हूतियों की मदद से लाल सागर में ये ब्लॉकेड लगाने में कामयाब होता है तो एशिया और यूरोप में तेल की मारामारी बढ़ जाएगी और आर्थिक संकट गहरा जाएगा.
हूतियों का इजरायल पर हमला, लाल सागर में हमले की धमकी
पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. इजरायल पर देर रात से ईरान और यमन की तरफ से हमले किए जा रहे हैं. यमन के बाद ईरान ने एक बार फिर से इजरायल की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं.
इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने बताया कि, “ईरान के बाद यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल पर सोमवार सुबह हमले किए थे. लेकिन यमन से इजरायल की तरफ दागी गई एक मिसाइल को रोक दिया गया है.”
यमन के ईरान समर्थित हूती समूह ने इजरायल पर हमले की पुष्टि करते हुए कहा है कि “हम क्षेत्र में बढ़ते तनाव का जवाब और कड़े कदमों से देगा. हमने इजरायल को निशाना बनाकर हमला किया है.”
हूतियों ने चेतावनी दी है कि “लाल सागर में इजरायल से जुड़े जहाजों को फिर से निशाना बनाया जाएगा और इजरायली समुद्री आवाजाही पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी. हूतियों ने कहा कि यदि तनाव और बढ़ता है तो उनकी प्रतिक्रिया भी उसी अनुपात में बढ़ेगी.”
दुश्मन गलतफहमी में न रहे: मोजतबा के सलाहकार
ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली वेलायती ने ताजा हमलों पर इजरायल को धमकाया है. अली वेलायती ने कहा, मौजूदा हालात को देखकर दुश्मन को गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए. इजरायल के पास दो रास्ते हैं, या तो वह अपनी बेवकूफी रोक दे या फिर ऐसे हालात का सामना करे जहां दोनों अहम समुद्री रास्तों पर संतुलित जवाब मिल सकता है.
वेलायती ने सीधे तौर पर बाब-अल-मंदेब में समुद्री आवाजाही रोकने की धमकी दी है.
आपको बता दें कि होर्मुज के बाद बाब अल मंदेब एक प्रमुख जलमार्ग है, जिसपर दुनियाभर के देशों का व्यापार निर्भर करता है. बाब अल मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के रास्ते यूरोप-एशिया व्यापार का दरवाजा है.
होर्मुज बंद होने के बाद खाड़ी देशों के तेल व्यापार का यही रास्ता इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन अगर ईरान-हूती विद्रोहियों के साथ मिलकर ये मार्ग बंद करने में कामयाब हो जाता है तो दुनियाभर में हाहाकार मच जाएगा. यहां समुद्री यातायात रुकता है तो तकरीबन पूरी दुनिया में भीषण ऊर्जा संकट आना तय है.
बाब-अल-मंदेब को कैसे रोकेगा ईरान, जानिए
बाब-अल-मंदेब यमन और जिबूती के बीच स्थित है. 20 मील चौड़े और 70 मील लंबे बाब अल-मंदेव नाम का यह समुद्री जलडमरूमध्य हॉर्न ऑफ अफ्रीका को अरब प्रायद्वीप से अलग करता है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक बनाती है.
यह एक संकरा मार्ग, बेहद अहमियत रखता है, ये स्वेज नहर की ओर लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है, जो हिंद महासागर में खुलती है. यह स्वेज नहर के रास्ते यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया के बीच यात्रा करने वाले जहाजों के लिए एक प्रवेश द्वार का काम करता है.
यमन के बड़े हिस्से पर काबिज हूती विद्रोही ईरान के सबसे बड़े सहयोगी हैं. ऐसे में ईरान के इशारे पर हूती विद्रोही बाब अल-मंदेव से होकर गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को निशाना बना सकते हैं और शिपिंग में बाधा डाल सकते हैं.
हूतियों के पास अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों का जखीरा मौजूद हैं और मिसाइलें भी हैं, जो उन्हें ईरान ने ही दी हैं. जब हमास के खिलाफ इजरायल ने अपना बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरु किया था तो रेड सी में इन्हीं मिसाइलों और हथियार के जरिए हूती विद्रोही, इजरायली जहाजों को टारगेट कर रहे थे. नवंबर 2023 से हूतियों ने रेड सी मार्ग में 100 से ज्यादा हमले किए हैं, जिनसे 60 से अधिक देशों के जहाज प्रभावित हुए थे. साल 2024 के अंत तक बाब अल-मंदेब से गुजरने वाला तेल 50 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया था और हूतियों के डर के कारण एलएनजी टैंकरों की आवाजाही लगभग बंद हो गई थी.
एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस संग मिलकर ईरान ने बनाई रणनीति
इजरायली हमलों से बौखलाए ईरान और एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस में शामिल उसके सहयोगी समूहों ने इजराली हमलों का जवाब देने और अतिरिक्त मोर्चे खोलने पर विचार करने का फैसला किया है.
एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस ईरान के नेतृत्व में मध्य पूर्व में सक्रिय एक अनौपचारिक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन है. इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के प्रभाव का मुकाबला करना और फिलिस्तीनी समूहों का समर्थन करना है. इस गठबंधन में कई राज्य और गैर-राज्य सशस्त्र समूह शामिल हैं, जिन्हें ईरान द्वारा हथियार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इस ग्रुप में हिजबुल्लाह, हमास, हूती और इराक की मिलिशिया शिया समूह शामिल हैं.

