पुणे के आसमान में जब अमेरिकी और भारतीय कमांडो का हेलीकॉप्टर इंफोसिस के कैंपस पर मंडराया, तो लोग हैरान रह गए.
पुणे स्थित इंफोसिस का पूरा कैंपस भारत के खतरनाक एनएसजी कमांडो और अमेरिकी फोर्स के स्पेशल कमांडो से घिर गया. लेकिन राहत की बात रही कि ये कमांडो किसी हमले या अप्रिय घटना के चलते नहीं आए थे. ये अमेरिका और भारतीय कमांडो की एक संयुक्त ड्रिल थी. संयुक्त सुरक्षा अभ्यास का उद्देश्य किसी आतंकी हमले, बंधक संकट या अन्य आपातकालीन स्थिति के दौरान विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल और प्रतिक्रिया क्षमता को परखना था.
अमूमन एनएसजी ऐसे संयुक्त अभ्यास शहर के बाहर या अपने कैंपस में करती है. ये पहली बार है जब किसी बड़े शहर के अंदर एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी की इमारत के अंदर जाकर ऐसी ड्रिल की गई है. इंफोसिस के कैंपस को ही क्यों चुना गया, क्या इसके पीछे कोई रणनीति रही, इसकी इनसाइड स्टोरी आपको बताते हैं.
इंफोसिस में उतरे यूएस-भारतीय कमांडो, अचरज में लोग
हथियारों के साथ अचानक पुणे की हिंजवड़ी स्थित इंफोसिस के कैंपस में एनएसजी कमांडो और अमेरिकी सेना के कमांडो दाखिल हुए. स्पेशल हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट से पूरा इलाका गूंजने लगा.सैन्य वाहनों के काफिले को देख लोग दहशत में आ गए. सिर्फ कमांडो ही नहीं, पुणे पुलिस ने पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया था.
हालांकि थोड़ी देर में ये साफ हो गया कि एनएसजी और अमेरिकी सेना के जवान एक ड्रिल कर रहे हैं. ये सब राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी), अमेरिकी सेना के विशेष कमांडो और पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस का मिलकर एक बड़ा और उच्च तीव्रता वाला आतंकवाद-विरोधी संयुक्त अभ्यास का हिस्सा था.
यह अभ्यास 5 घंटे तक चलाया गया जिसमें संकट से निपटने की तैयारियों को परखा गया . इस ड्रिल में100 से अधिक एनएसजी कमांडो, अमेरिकी सेना के 17 कमांडो, महाराष्ट्र की फोर्स वन, एटीएस, स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग शामिल रहे.
ड्रिल के तहत कमांडो ने हेलीकॉप्टरों से इमारतों की छतों पर उतरकर (रैपलिंग) बंधक बनाए जाने की स्थिति से निपटने का अभ्यास किया. अगर देश पर ऐसी को आतंकी हमले या बंधक जैसी स्थिति आती है, तो सुरक्षा एजेंसियां किस तरह से तालमेल करेंगी, इन सबके बारे में जानकारी दी गई.
कॉर्पोरेट जिहाद के आरोपों में घिरी थी देश की कई बड़ी आईटी कंपनियां
पिछले कुछ महीने में बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी इंफोसिस दूसरी बार चर्चा में हैं. कुछ महीने पहले कंपनी पर कुछ कर्मचारियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से कॉर्पोरेट जिहाद के गंभीर आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से शिकायत की थी.
अप्रैल 2026 में सोशल मीडिया पर सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पुणे स्थित इंफोसिस की बीपीएम यूनिट में महिला कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न को लेकर दावे किए थे. इंफोसिस के एक पूर्व कर्मचारी ने भी अपनी कंपनी के खिलाफ शिकायत की थी. इंफोसिस के पूर्व कर्मचारी ने सोशल मीडिया के जरिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और मत्स्य पालन और बंदरगाह मंत्री को टैग करके पोस्ट लिखा, जिसमें दावा किया कि पुणे में इंफोसिस में “जिहादी उत्पीड़न” चल रहा है. मामले को लेकर नितेश राणे और सीएम फडणवीस को टैग कर शिकायत की गई थी.
इंफोसिस पुणे का यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की 8 महिला और एक पुरुष कर्मचारी ने कंपनी के अंदर की आपबीती सुनाई थी. टीसीएस पीड़ितों का आरोप था कि उन्हें न केवल मानसिक और यौन रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि उन पर बीफ खाने, नमाज़ पढ़ने और धर्म परिवर्तन के लिए भी दबाव बनाया गया.
हालांकि इंफोसिस कंपनी ने इन सोशल मीडिया दावों के बाद अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि उनका वर्कप्लेस पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या भेदभाव के प्रति जीरो टॉलरेंस है.
अपने बयान में इंफोसिस ने ये भी कहा था कि “वे हर शिकायत को गंभीरता से लेते हैं और स्वतंत्र समिति के जरिए उसकी जांच की जाती है.”
टीसीएस और इंफोसिस के अलावा कॉर्पोरेट जिहाद जैसे आरोप विप्रो कंपनी पर भी लगे थे.
आतंकियों के टारगेट पर आईटी कंपनियां, की गई सुरक्षा समीक्षा
मौजूदा समय में देश की अहम इमारतों के साथ-साथ आईटी कंपनियों पर भी आतंकियों की नजर है, जिसके चलते समय-समय पर कंपनियों की सुरक्षा समीक्षा की जाती रही है. अधिकारियों का मानना है कि साइबर सिटी और बड़े आईटी पार्क आतंकियों के निशाने पर रहते हैं. ऐसे में किसी भी आपातकालीन स्थिति या अचानक होने वाले आतंकी हमले से निपटने के लिए तैयारी करना जरूरी है.
इस मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा बलों ने एक काल्पनिक आतंकी हमले की स्थिति को तैयार किया. कमांडोज ने बेहद कम समय में आईटी कैंपस को अपने कब्जे में लिया. अमेरिकी कमांडोज और एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडोज के इस संयुक्त अभियान में दिखाया गया कि कैसे पलक झपकते स्थिति को काबू में किया जा सकता है.
भारत में क्यों मौजूद हैं अमेरिकी स्पेशल कमांडो
भारत और अमेरिका के विशेष बलों के बीच संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास ‘तरकश’ के आठवें संस्करण के तहत 17 अमेरिकी सेना के कमांडो भारत आए हैं, जिन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानि एनएसजी के साथ ड्रिल की है. इस संयुक्त अभ्यास का मकसद शहरी क्षेत्रों में आतंकवाद से निपटना, रासायनिक व जैविक हमलों के खतरों को रोकना और दोनों बलों के बीच तालमेल बढ़ाना है. इसमें मॉक ड्रिल, सामरिक अभियान और आधुनिक हथियारों व तकनीकों के बीच समन्वय बिठाकर ऑपरेशन को अंजाम दिए जाने की तकनीक सिखाई जाती है.

