स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए-तेजस की बेहद धीमी चल रही सप्लाई को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकारी उपक्रम एचएएल को आड़े हाथ लिया है.
बेंगलुरु में तेजस से जुड़े कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि जब तक टेक्नोलॉजी वायुसेना के हाथ में पहुंचती है, वो ‘आउटडेटेड’ यानी पुरानी हो जाती है और दुनिया में उससे बेहतर तकनीक आ जाती है. इस दौरान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी मौजूद थे.
वायुसेना को 16 साल बाद मिला एलसीए तेजस का ट्रेनर
शुक्रवार को बेंगलुरु में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के 02 ट्रेनर एयरक्राफ्ट को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने रक्षा मंत्री की मौजूदगी में वायुसेना को सौंपा गया था. ये दोनों ट्रेनर एयरक्राफ्ट करीब 16 साल बाद वायुसेना को मिले हैं. वर्ष 2010 में रक्षा मंत्रालय ने एचएएल से 40 एलसीए-तेजस का करार किया था. इनमें से चार (04) ट्रेनर एयरक्राफ्ट थे.
इसके अलावा, तेजस के एडवांस वर्जन एलसीए मार्क-1ए के बनने में भी काफी देर चल रही है. मार्क-1ए प्रोजेक्ट तीन वर्ष पीछे चल रहा है. हालांकि, इसका एक बड़ा कारण, अमेरिका से इन फाइटर जेट के एविएशन इंजन की धीमी गति से हो रही सप्लाई माना जा रहा है. वायुसेना प्रमुख ने खुद कई बार एचएएल की कार्यशैली और देरी से सप्लाई पर सवाल खड़े किए हैं.
राजनाथ ने टेक्नोलॉजिक्ल ऑब्सिलिसेंस और टाइमलाइन को लेकर किया आगाह
राजनाथ सिंह के मुताबिक, एचएएल की कार्यशैली में ‘टेक्नोलॉजिक्ल ऑब्सिलिसेंस’ नहीं होना चाहिए. क्योंकि एक तो ये आउटडेटेड हो जाती है, दूसरा प्रोजेक्ट की ‘कॉस्ट’ (कीमत) बढ़ जाती है. रक्षा मंत्री ने कहा कि कई बार देखा गया है कि अलग-अलग कारणों से एचएएल के प्रोजेक्ट बेहद देरी से चल रहे हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि इस देरी को एचएएल को ‘गंभीरता’ से लेना होगा. क्योंकि इससे ‘जरूरी रक्षा जरूरतों’ पूरी नहीं हो पाती. ऐसे में सरकारी रक्षा उपक्रम को प्रोजेक्ट्स की ‘टाइमलाइन’ पर ध्यान देने की खास आवश्यकता है.
एचएएल ने वायुसेना को सौंपा बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट, ‘अंकुर’
शुक्रवार को एलसीए-तेजस के ट्रेनर एयरक्राफ्ट के अलावा, एचएएल ने वायुसेना को पहला स्वदेशी ट्रेनर एयरक्राफ्ट, हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर (एचटीटी-40) भी सौंपा. इस दौरान, एचटीटी-40 का नामकरण भी किया गया. वायुसेना में एचटीटी-40 को अंकुर के नाम से जाना जाएगा.
अभी तक मिलिट्री एयरक्राफ्ट बनाने में महारत रखने वाले एचएएल ने पहली बार सिविल एविएशन में भी कदम रखा है. एचएएल ने एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (एएलएल), ध्रुव का सिविल वर्जन, ध्रुव-एनजी भी तैयार किया है. शुक्रवार को 04 ध्रुव-एनजी को सरकारी कंपनी पवन हंस को सौंपे गए. इस मौके पर सिविल एविएशन मंत्री, के. राममोहन नायडू भी मौजूद थे.

