अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सलाह का यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पर कोई खास असर पड़ता नहीं दिखाई पड़ रहा है. क्योंकि यूक्रेन ने एक बार फिर रूस की राजधानी मॉस्को की एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर बड़ा ड्रोन अटैक किया है. ड्रोन अटैक से पूरे मॉस्को के आसमान में धुआं फैल गया है, जिसके चलते राजधानी के तीनों एयरपोर्ट को बंद तक करना पड़ गया.
जेलेंस्की ने शनिवार-रविवार की रात मॉस्को की एक तेल रिफाइनरी और लॉजिस्टिक फैसिलिटी पर अटैक की जिम्मेदारी लेते हुए इन्हें रूस की वॉर-मशीन घोषित की हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति के मुताबिक, इन तेल रिफाइनरियों के जरिए रूस अरबों डॉलर कमाता है, जिन्हें युद्ध में झोंक दिया जाता है.
जेलेंस्की के मुताबिक, मॉस्को को बर्बर युद्ध की जगह शांति को चुनना होगा ना कि राजधानी पर एयर डिफेंस की अतिरिक्त लेयर बनाए. यूक्रेनी राष्ट्रपति ने हालांकि, अपने बयान में ये भी कह दिया कि युद्ध की तीव्रता कम करने के लिए ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए वार्ता चल रही है. लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है. यूक्रेन का ये बड़ा हमला उस दिन हुआ जब पूरे रूस में डूमा (संसद) में चुने जाने वाले प्रतिनिधियों का चुनाव चल रहा था.
इसी हफ्ते, ट्रंप ने यूक्रेन को रूस की तेल रिफाइनरी और ऑयल डिपो पर हमला ना करने की सलाह दी थी. अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, इन हमलों से दुनियाभर में तेल संकट खड़ा हो रहा है. कुछ दिनों पहले ट्रंप ने अपने दो (02) विशेष दूत, स्टीव विटकॉफ और जेरड कुशनर को मॉस्को और कीव (यूक्रेन की राजधानी) भेजा था ताकि युद्ध को रोका जा सके. लेकिन युद्ध रूकने के बजाए बढ़ता जा रहा है.
रूस ने एक रात में किए यूक्रेन के 2000 ड्रोन्स को इंटरसेप्ट
रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बीती रात (शनिवार-रविवार) यूक्रेन की तरफ से दागे गए करीब 2000 (1951) ड्रोन, क्रूज मिसाइल, गाईडेड एरियल बम और चार (04) हिमार्स रॉकेट्स को इंटरसेप्ट किए गए.
पिछले चार-पांच महीने से यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को सहित दूरदराज के इलाकों तक दर्जनों तेल रिफाइनरी और ऑयल डिपो पर लॉन्ग रेंज ड्रोन अटैक किए हैं. यूक्रेन का दावा है कि 3000 किलोमीटर दूर साइबेरिया तक रूस की ऑयल रिफाइनरी तक पर हमला किया गया है, जो पिछले साढ़े चार सालों का सबसे लंबी दूरी का हमला है.
रूस भी हमलों में कतई पीछे नहीं
रूस भी यूक्रेन पर हमले जारी रखे हुए है. बीती रात, रूस ने यूक्रेन के जपोरिजिया और दिनिप्रो क्षेत्रों में स्टील प्लांट्स पर बड़े हमले किए. इसके अलावा राजधानी कीव में भी एक इलेक्ट्रोनिक उपकरण बनाने वाले प्लांट पर हमला किया, जो यूक्रेनी सेना के लिए ड्रोन बनाने में मदद करता था. इसके अलावा कीव में यूक्रेनी सेना के डाटा सेंटर पर भी अटैक किया गया. रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ओडेसा बंदरगाह और ओडेसा के एक मिलिट्री लॉजिस्टिक सेंटर पर भी अटैक किया गया.


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